क्यों PK को कहना चाहिए दिपके को Thank You? वो 6 कारण जिनसे CJP के विरोध-प्रदर्शनों से बांकीपुर में भी हलचल मच गई

Published on 4 अग॰ 2026

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क्यों PK को कहना चाहिए दिपके को Thank You? वो 6 कारण जिनसे CJP के विरोध-प्रदर्शनों से बांकीपुर में भी हलचल मच गई

Prashant Kishor Bankipur Win: बिहार की राजनीति में 30 जुलाई 2026 को हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नया इतिहास रच दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर 'जन सुराज पार्टी' (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 11,000 से अधिक वोटों के निर्णायक अंतर से अपनी पहली ऐतिहासिक जीत दर्ज की। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए 37 दिवसीय राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन ने इस उपचुनाव के समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर प्रशांत किशोर के पक्ष में मोड़ दिया।

1. भाजपा के 30 साल पुराने मजबूत गढ़ का ध्वस्त होना

बांकीपुर सीट पिछले तीन दशकों से भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती थी, जहां से हाल तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रतिनिधित्व करते थे। नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक और जंतर-मंतर पर सीजेपी के लंबे विरोध प्रदर्शन से उपजे जनाक्रोश ने भाजपा की अजेयता को तोड़ दिया, जिससे प्रशांत किशोर को अपनी स्थिति मजबूत करने का सीधा मौका मिल गया।

2. छात्र वोट बैंक का एकजुट और आक्रामक होना

पटना का बांकीपुर इलाका विश्वविद्यालय, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों का बहुत बड़ा हब है। सीजेपी के आंदोलन ने युवाओं के मन में परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर जमा गुस्से को सीधे वोट में बदल दिया, जिसका खामियाजा सत्तारूढ़ एनडीए को भुगतना पड़ा।

3. बिहार पुलिस की दमनकारी कार्रवाई पर जनाक्रोश

उपचुनाव से ठीक पहले बिहार पुलिस ने एकजुटता दिखा रहे छात्रों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 700 युवाओं को हिरासत में ले लिया था। हालांकि सीजेपी की नई विरोध चेतावनी के बाद राज्य के गृह विभाग को प्राथमिकी (FIR) वापस लेनी पड़ी, लेकिन इस कार्रवाई से नाराज छात्र और उनके परिवार भाजपा से छिटककर वैकल्पिक राजनीति की ओर चले गए।

PK की मजबूत जीत

PK की मजबूत जीत

4. सवर्ण और फ्लोटिंग वोटर्स का जन सुराज के पक्ष में ध्रुवीकरण

सीजेपी आंदोलन से उपजी सत्ता विरोधी लहर ने पारंपरिक जातिगत वोट बैंकों को तोड़ दिया। शहरी पटना में भाजपा के पारंपरिक आधार माने जाने वाले भूमिहार और ब्राह्मण मतदाताओं के एक बड़े हिस्से ने भाजपा के खिलाफ अपना गुस्सा जताने के लिए जन सुराज को वोट दिया।

5. कम मतदान प्रतिशत का जन सुराज को सीधा फायदा

राजनीतिक अनिश्चितता और असंतोष के कारण चुनाव में कुल मतदान मात्र 34.30 प्रतिशत रहा, जो पिछले आम चुनावों के 41.45 प्रतिशत से काफी कम था। इस कम वोटिंग ने भाजपा की पारंपरिक संगठनात्मक मशीनरी को पंगु बना दिया, जबकि प्रशांत किशोर के युवाओं पर केंद्रित कैडर ने बाजी मार ली।

6. पारंपरिक विपक्ष RJD का पूरी तरह से साफ होना

सीजेपी के आंदोलन ने पूरे चुनाव को केवल सुशासन, युवा रोजगार और व्यवस्थागत जवाबदेही पर केंद्रित कर दिया। इसने पारंपरिक विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को पूरी तरह किनारे कर दिया, जिससे आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर खिसक गईं और सारा गुस्सा जन सुराज के हक में लामबंद हो गया।

Nitin Arora

नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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