
रीब 10 लाख लोगों की आबादी वाला वो शहर अपनी खूबसूरती और आर्किटेक्चर के कारण भी जाना जाता है.
दुनिया में कई खूबसूरत शहर हैं, लेकिन कुछ शहर अपने अपने इतिहास तो कुछ अपने अजूबों के कारण जाने हैं. लेकिन एक शहर ऐसा भी है जो अपनी अपने आइलैंड की वजह से जाना जाता है. वो एक-दो नहीं, पूरे 14 आइलैंड पर बसा है. करीब 10 लाख लोगों की आबादी वाला वो शहर अपनी खूबसूरती और आर्किटेक्चर के कारण भी जाना जाता है. उसका नाम है स्टॉकहोम.
स्टॉकहोम स्वीडन की राजधानी है. यह इस देश का सबसे बड़ा देश होने के साथ इसे उत्तर का वेनिस भी कहते हैं क्योंकि यह पानी के बीच बसा है. दिलचस्प बात है कि यह शहर उस जगह बसा है जहां मीठे पानी की मालेरन झील बाल्टिक सागर से मिलती है. इसी मिलन-बिंदु पर जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाती है. इन्हीं टुकड़ों पर पूरा शहर खड़ा है।
14 द्वीप, 50 से ज्यादा पुल और खूबसूरती बेमिसाल
स्टॉकहोम का मुख्य हिस्सा 14 द्वीपों पर फैला है. इनमें गामला स्टेन (स्टैड्सहोल्मेन), सोडरमाल्म, कुंगशोल्मेन, स्केप्सहोल्मेन, जुरगॉर्डन और रिद्दारहोल्मेन जैसे द्वीप शामिल हैं. इन्हें आपस में जोड़ने के लिए 50 से ज्यादा पुल बनाए गए हैं. यहां पुल सिर्फ रास्ता नहीं हैं, शहर की जान हैं. लोग रोज पुलों से गुजरकर काम पर जाते हैं और बच्चे स्कूल पहुंचते हैं. कई जगह नाव और फेरी भी आम परिवहन का हिस्सा हैं.

स्टॉकहोम का मुख्य हिस्सा 14 द्वीपों पर फैला है. फोटो: Getty Images
खास बात ये है कि स्टॉकहोम के आसपास का पूरा स्टॉकहोम आर्किपेलागो करीब 30 हजार छोटे-बड़े द्वीपों और चट्टानी टापुओं का समूह है. यानी शहर के बाहर भी पानी और द्वीपों का जाल दूर तक फैला है.

स्टॉकहोम के मेट्रो स्टेशन किसी आर्ट गैलरी से कम नहीं हैं. फोटो: Unsplash
कैसे बसा स्टॉकहोम?
स्टॉकहोम की नींव 13वीं सदी में पड़ी. ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसका जिक्र 1252 के आसपास मिलता है. उस दौर में इसकी भौगोलिक स्थिति ही इसकी ताकत थी. मालेरन झील के रास्ते अंदरूनी इलाकों से आने वाला लोहा और दूसरा सामान बाल्टिक सागर तक पहुंचता था. स्टॉकहोम इस व्यापार का एंट्री गेट बन गया. द्वीपों पर बसे होने से हमलावरों से बचाव भी आसान था. समय के साथ ये छोटी सी बस्ती स्वीडन की राजधानी बन गई.

शहर की गलियां. फोटो: Pexels
शहर का पुराना दिल
स्टॉकहोम की सबसे पुरानी बसावट गामला स्टेन यानी ओल्ड टाउन है. यहां पत्थर की संकरी गलियां, रंग-बिरंगी पुरानी इमारतें और मध्यकालीन माहौल आज भी जिंदा है. इसी इलाके में स्टॉकहोम पैलेस है, जो यूरोप के बड़े शाही महलों में गिना जाता है और आज भी आधिकारिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल होता है. सैलानी सबसे ज्यादा इसी हिस्से में घूमने आते हैं.

हर तरफ खुशनुमा माहौल नजर आता है. फोटो: Pexels
हर आइलैंड की अपनी पहचान
- जुरगॉर्डन: हरियाली से भरा ये द्वीप शहर का म्यूजियम हब है. यहां 17वीं सदी का विशाल जहाज संजोए वासा म्यूजियम है. दुनिया का पहला ओपन-एयर म्यूजियम स्कैनसेन भी यहीं है. स्वीडिश म्यूजिक बैंड ABBA पर बना म्यूजियम भी यही हैं.
- सोडरमाल्म: कैफे, आर्ट गैलरी और युवाओं की चहल-पहल वाला ट्रेंडी इलाका.
- स्केप्सहोल्मेन: यहां मॉडर्न आर्ट के म्यूजियम हैं.
- कुंगशोल्मेन: यहां प्रसिद्ध सिटी हॉल है, जहां हर साल 10 दिसंबर को नोबेल पुरस्कार समारोह के बाद भव्य भोज होता है.

शहर के बीचों-बीच के पानी में लोग तैरते हैं और मछली भी पकड़ते हैं. फोटो: Pexels
पानी इतना साफ कि नहाइए और मछली पकड़िए
स्टॉकहोम की सबसे हैरान करने वाली बात इसका साफ पानी है. शहर के बीचों-बीच के पानी में लोग तैरते हैं और मछली भी पकड़ते हैं. पर्यावरण के प्रति गंभीरता की वजह से स्टॉकहोम 2010 में यूरोपियन ग्रीन कैपिटल का खिताब पाने वाला पहला शहर बना. यहां पार्क, पानी और शहरी जीवन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. बड़ी आबादी के बावजूद शहर में शांति और हरियाली बनी रहती है.
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अंकित गुप्ता
नवाबों के शहर लखनऊ में जन्मा. डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से MBA. लिखने की चाहत और खबरों से आगे की कहानी जानने का जुनून पत्रकारिता में लाया. 2008 में लखनऊ के पहले हिन्दी टेबलॉयड ‘लखनऊ लीड’ से करियर से शुरुआत की. फीचर सेक्शन में हाथ आजमाया. फिर बाबा गोरखनाथ के नगरी गोरखपुर से दैनिक जागरण के आइनेक्स्ट से जुड़ा. शहर की खबरों और हेल्थ मैगजीन में रिपोर्टिंग के लिए 2013 में राजस्थान पत्रिका के जयपुर हेडऑफिस से जुड़ा. यहां करीब 5 साल बिताने के बाद डिजिटल की दुनिया में नई शुरुआत के लिए 2018 में दैनिक भास्कर के भोपाल हेड ऑफिस पहुंचा. रिसर्च, एक्सप्लेनर, डाटा स्टोरी और इंफोग्राफिक पर पकड़ बनाई. हेल्थ और साइंस की जटिल से जटिल खबरों को आसान शब्दों में समझाया. 2021 में दैनिक भास्कर को अलविदा कहकर TV9 ग्रुप के डिजिटल विंग से जुड़ा. फिलहाल TV9 में रहते हुए बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर ‘नॉलेज’ सेक्शन की कमान संभाल रहा हूं. एक्सप्लेनर, डाटा और रिसर्च स्टोरीज पर फोकस भी है और दिलचस्पी भी.
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