Paytm में बड़ी ब्लॉक डील! 4.98% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, शेयर पर होगा क्या असर?

Published on 17 अग॰ 2026

पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी One 97 कम्यूनिकेशन (One97 Communications) के शेयरों में बड़ी ब्लॉक डील की खबर सामने आई है। कंपनी ने सोमवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि रेज़िलिएंट एसेट मैनेजमेंट B.V. पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेचने की तैयारी कर रही है। RAM (Resilient Asset Management) मौजूदा OCD (Optionally Convertible Debenture) समझौते के तहत Paytm की अधिकतम 4.98% इक्विटी हिस्सेदारी ब्लॉक मार्केट डील के जरिए बेच सकती है। इस खबर ने पेटीएम (Paytm) के शेयरों को लेकर निवेशकों की नजर एक बार फिर कंपनी की शेयरहोल्डिंग और बड़े संस्थागत लेनदेन पर डाल दी है।

हालांकि, इस डील का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शेयर बेचने के बाद मिलने वाली आर्थिक वैल्यू रिजिलेंट (Resilient) के पास नहीं रहेगी, बल्कि मौजूदा समझौते के अनुसार इसका आर्थिक लाभ Antfin (Netherlands) होल्डिंग B.V. को मिलेगा, यानी बाजार में हिस्सेदारी का लेनदेन Resilient के नाम से होगा, लेकिन इसके पीछे मौजूद आर्थिक व्यवस्था Antfin के साथ हुए OCD समझौते से जुड़ी हुई है।

Paytm ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनी के फाउंडर और CEO विजय शेखर शर्मा की सीधे तौर पर रखी गई हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए प्रस्तावित ब्लॉक डील को फाउंडर की हिस्सेदारी में कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पेटीएम (Paytm) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, Resilient ने अगस्त 2023 में Antfin से Paytm की करीब 10.20% हिस्सेदारी हासिल की थी।

इसके बदले Resilient ने Antfin को OCDs (Optionally Convertible Debentures) जारी किए थे। उस समय शेयरों का मालिकाना हक Resilient के पास चला गया था, लेकिन दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते में आर्थिक हितों से जुड़ी कुछ शर्तें बरकरार थीं। अब इसी व्यवस्था के तहत Resilient अपनी Paytm हिस्सेदारी का अधिकतम 4.98% हिस्सा ब्लॉक डील के माध्यम से बेचने का प्रस्ताव रख रही है।

ब्लॉक डील आमतौर पर शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए इस्तेमाल होने वाला तरीका है। इसमें बड़ी संख्या में शेयर एक तय कीमत या निर्धारित दायरे में संस्थागत निवेशकों के बीच ट्रांसफर किए जा सकते हैं। ऐसी डील से शेयर की सामान्य ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब बेची जा रही हिस्सेदारी कंपनी की कुल इक्विटी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो।

Paytm जैसी बड़ी डिजिटल फाइनेंशियल सर्विस कंपनी में करीब 5% तक हिस्सेदारी की संभावित बिक्री इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बाजार में कंपनी के शेयरों की उपलब्धता बढ़ सकती है और निवेशकों का ध्यान बड़े शेयरधारकों की आगे की रणनीति पर जा सकता है। हालांकि, ब्लॉक डील का मतलब अपने आप यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति में कोई तत्काल बदलाव हो गया है।

इस पूरे मामले में Antfin की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पेटीएम (Paytm) के मुताबिक, Resilient को इस लेनदेन से मिलने वाली आर्थिक वैल्यू OCD समझौते के तहत Antfin के पास जाएगी। इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित शेयर बिक्री को केवल सामान्य शेयरधारक द्वारा हिस्सेदारी कम करने के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसके पीछे पहले से मौजूद वित्तीय समझौते की संरचना भी काम कर रही है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि शेयरों का कानूनी मालिकाना हक और किसी लेनदेन से मिलने वाला आर्थिक लाभ कुछ परिस्थितियों में अलग-अलग संस्थाओं से जुड़ा हो सकता है।

पेटीएम (Paytm) के शेयरधारकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा की डायरेक्ट शेयरहोल्डिंग इस प्रस्तावित बिक्री से प्रभावित नहीं होगी। वहीं, Resilient की तरफ से अधिकतम 4.98% हिस्सेदारी बेचने की योजना आने वाले कारोबारी सत्रों में शेयर की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकती है। अगर बड़ी संख्या में शेयर बाजार में आते हैं, तो शुरुआती स्तर पर सप्लाई बढ़ने के कारण शेयर पर दबाव भी बन सकता है। दूसरी ओर अगर बाजार इस डील को पहले से अपेक्षित मानता है या शेयरों को आसानी से संस्थागत खरीदार मिल जाते हैं, तो इसका असर सीमित भी रह सकता है।

पेटीएम (Paytm) में प्रस्तावित यह ब्लॉक डील कंपनी के कारोबार में किसी नए संकट की घोषणा नहीं है, बल्कि Resilient और Antfin के बीच मौजूद OCD व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शेयर लेनदेन है। फिर भी निवेशकों को आने वाले दिनों में डील की वास्तविक कीमत, खरीदार कौन हैं, कितनी हिस्सेदारी वास्तव में बेची जाती है और पेटीएम (Paytm) की शेयरहोल्डिंग में इसके बाद क्या बदलाव होता है, इन सभी बातों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही केवल ब्लॉक डील की खबर के आधार पर पेटीएम (Paytm) के शेयर में निवेश या बिक्री का फैसला करने के बजाय कंपनी के कारोबार, मुनाफे, वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ को भी ध्यान में रखना जरूरी है।