OMR घोटाले के आरोपी को PMLA कोर्ट से राहत नहीं: डिस्चार्ज याचिका खारिज की; HPSC डेंटल सर्जन भर्ती केस - Panchkula News

Published on 1 सित॰ 2026

हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की डेंटल सर्जन और HCS भर्ती में हुए बहुचर्चित OMR शीट फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी पवन गुप्ता को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पंचकूला स्थित ED मामलों की विशेष कोर्ट (जज विजयंत सहगल) ने पवन गुप्ता की डिस्चार्

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कोर्ट ने साफ किया है कि भले ही मुख्य भ्रष्टाचार केस में आरोपी को राहत मिली हो, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत स्वतंत्र जांच और कार्रवाई जारी रह सकती है।

कोर्ट का कड़ा रुख

PMLA कोर्ट, पंचकूला के विशेष जज ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस चरण पर मामले के तमाम सबूत, व्हाट्सएप चैट, OMR शीट में गड़बड़ी और नकदी की बरामदगी आरोपी पवन गुप्ता की संलिप्तता की ओर मजबूत संदेह दर्शाते हैं। इसलिए उन्हें इस स्तर पर बरी नहीं किया जा सकता।

अब जानिए कोर्ट के फैसले के पॉइंट्स…

  • CBI कोर्ट से मिली छूट के बाद भी PMLA में राहत नहीं: आरोपी पवन गुप्ता ने दलील दी थी कि उन्हें 30 जनवरी 2026 को विशेष CBI जज की कोर्ट से मुख्य आपराधिक मामले में डिस्चार्ज कर दिया गया है, इसलिए ED का मामला भी खत्म होना चाहिए। हालांकि, PMLA कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक मुख्य केस अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ जीवित है और अपराध से अर्जित संपत्ति मौजूद है, तब तक मनी लॉन्ड्रिंग का केस खत्म नहीं होता।
  • वाॅटसएप चैट और रोल नंबर बने गले की फांस: ED की जांच में सामने आया कि पवन गुप्ता के मोबाइल से सह-आरोपी अश्विनी शर्मा को डेंटल सर्जन परीक्षा के 5 अभ्यर्थियों के रोल नंबर भेजे गए थे। FSL जांच में पाया गया कि इनमें से 4 अभ्यर्थियों की OMR शीट में गड़बड़ी/छेड़छाड़ की गई थी और वे पास हुए थे।
  • डिजिटल सबूतों पर कोर्ट का रुख: बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि व्हाट्सएप चैट के लिए धारा 65-B का सर्टिफिकेट संलग्न नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण पर 65-B का सर्टिफिकेट न होना पूरी तरह से केस को खारिज करने का आधार नहीं बन सकता, इसे ट्रायल के दौरान भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • भारी कैश बरामदगी का मामला: विजिलेंस ब्यूरो और ED की जांच के दौरान कुल 3.29 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जब्त की गई थी। आरोपी पर 1 करोड़ रुपये के लेन-देन में मध्यस्थता करने का आरोप है।

अब जानिए… क्या था पूरा मामला

17 नवंबर, 2021 को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (SVB) ने पंचकूला में बिचौलिये नवीन को 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद HPSC के तत्कालीन डिप्टी सेक्रेटरी अनिल नागर और मेसर्स पारू डेटा सॉल्यूशंस के निदेशक अश्विनी शर्मा की गिरफ्तारी हुई।

जांच में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों की OMR शीट में खाली गोलों को स्कैनिंग के बाद भरकर उन्हें पास कराया जाता था। ED ने इसी आधार पर 22 दिसंबर 2021 को मनी लॉन्ड्रिंग (ECIR) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

वकील बोले-हाईकोर्ट में करेंगी अपील

पवन गुप्ता के वकील दीपांशु बंसल ने बताया कि उन्हें यहां पर राहत नहीं मिली लेकिन वे इसको लेकर हाईकोर्ट जाएंगें। वहां पर अपना पक्ष रखेंगे, उनको केस में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है।