NSE IPO से पहले बड़ा प्लान! अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग कराने की तैयारी

Published on 20 अग॰ 2026

Aug 20, 2026 05:20 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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मुख्य बातें

  • NSE IPO 2026: NSE अपने प्रस्तावित IPO के बाद अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति लेने पर विचार कर रहा है
  • योजना के तहत NSE के शेयर पहले BSE पर औपचारिक रूप से लिस्ट हो सकते हैं
  • इसके बाद NSE पर इन्हें ‘Permitted to Trade’ कैटेगरी में ट्रेड करने की अनुमति मिल सकती है
NSE

NSE अपने प्रस्तावित IPO के बाद अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति लेने पर कर रहा विचार।

भारत के शेयर बाजार में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकता है। NSE (National Stock Exchange) अपने प्रस्तावित IPO के बाद अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति लेने की तैयारी में है। खास बात यह है कि NSE के शेयर औपचारिक रूप से प्रतिद्वंद्वी BSE पर लिस्ट हो सकते हैं, लेकिन इसके बाद NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर भी इन शेयरों में कारोबार की सुविधा मिल सकती है। इस कदम से NSE के शेयरों में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है और भविष्य में इन्हें NSE के प्रमुख Nifty Indexes में शामिल किए जाने का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि, इसके लिए बाजार नियामक SEBI की मंजूरी जरूरी होगी।

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, NSE के प्रस्तावित IPO को लेकर हाल में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर रोडशो के दौरान इस संभावित योजना पर निवेशकों के साथ चर्चा की गई थी। योजना के तहत NSE के शेयर BSE पर औपचारिक रूप से लिस्ट होंगे, लेकिन NSE पर इन्हें ‘Permitted to Trade’ कैटेगरी में कारोबार के लिए अनुमति दी जा सकती है। इसका मतलब यह होगा कि शेयर की मुख्य लिस्टिंग BSE पर रहेगी, लेकिन निवेशक NSE के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भी इन शेयरों को खरीद और बेच सकेंगे।

हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। मौजूदा नियमों में किसी स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर खुद के शेयरों की सेल्फ-लिस्टिंग की स्पष्ट अनुमति नहीं है। NSE को बाजार ढांचे से जुड़ी संस्था (Market Infrastructure Institution) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसलिए अपने प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग शुरू करने से पहले उसे SEBI से विशेष मंजूरी लेनी होगी। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार इस संबंध में चर्चा जारी है और अंतिम फैसला नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।

NSE के प्लेटफॉर्म पर पहले से ही ऐसी कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग होती है, जो वहां औपचारिक रूप से लिस्टेड नहीं हैं। परमिटेड टू ट्रेड (Permitted to Trade) व्यवस्था के तहत ऐसी सिक्योरिटीज NSE पर कारोबार कर सकती हैं, जबकि उनकी लिस्टिंग और डिस्क्लोजर से जुड़ी जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। NSE ने साल 2019 में अपने इंडेक्स एलिजिबिलिटी नियमों में बदलाव किया था, जिसके बाद ऐसी सिक्योरिटीज को भी कुछ शर्तों के तहत Nifty Indexes में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल करीब 250 ऐसी कंपनियां NSE के प्लेटफॉर्म पर इस कैटेगरी में कारोबार करती हैं।

अगर NSE को अपने शेयरों की ट्रेडिंग अपने प्लेटफॉर्म पर करने की मंजूरी मिलती है, तो निवेशकों को दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर NSE के शेयरों में कारोबार का विकल्प मिल सकता है। इससे शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी बढ़ सकती है। साथ ही भविष्य में NSE के शेयर को उसके ही प्रमुख इंडेक्स में शामिल करने की संभावना भी महत्वपूर्ण बन सकती है। हालांकि, इसके लिए इंडेक्स के सभी जरूरी मानदंडों को पूरा करना होगा।

NSE का IPO भी भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित अपकमिंग IPO में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, NSE को अपने ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के लिए अगस्त के अंत तक SEBI की मंजूरी मिलने की उम्मीद है और कंपनी सितंबर 2026 के दूसरे हिस्से में IPO लॉन्च करने का लक्ष्य रख रही है। अगर NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति हासिल कर लेता है, तो यह भारत के शेयर बाजार के इतिहास में एक बेहद अनोखी स्थिति होगी, क्योंकि एक्सचेंज खुद अपने प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों के कारोबार को सक्षम करेगा।