भोपाल में ई-कचरे के निपटारे पर NGT सख्त: पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं की जांच के निर्देश; 1 महीने बाद सुनवाई - Bhopal News

Published on 31 अग॰ 2026

नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने भोपाल में ई-कचरे (ई-वेस्ट) के कथित अवैज्ञानिक निस्तारण एवं अनियंत्रित प्रसंस्करण से उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को संज्ञान लिया है। जिम्मेदारों से रिपोर्ट मांगी है।

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मामले की सोमवार को न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह, विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। नितिन सक्सेना की याचिका में भोपाल में ई-कचरे के कथित अनुचित निस्तारण, प्रसंस्करण और खुले में जलाने से संबंधित गंभीर चिंताएं उठाई गई हैं।

अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के अनुसार, शहर में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे के एक सीमित हिस्से का ही कथित रूप से वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है, जबकि शेष ई-कचरे के अनधिकृत स्क्रैप इकाइयों के माध्यम से अनियंत्रित तरीके से प्रसंस्करण किए जाने का आरोप है।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में जलाने का मामला एजीटी के आदेश में दर्ज आरोपों के अनुसार, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में जलाने या नष्ट करने से सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसे विषैले पदार्थ एवं भारी धातुएं निकल सकती हैं। जिससे वायु, जल एवं मिट्टी प्रदूषित होने तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

आदेश में मध्य प्रदेश में ई-कचरे की बढ़ती मात्रा से संबंधित सामग्री का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन में राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5,000 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न होने का उल्लेख किया गया है, जबकि वर्ष 2019 में यह मात्रा लगभग 500 मीट्रिक टन बताई गई थी। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में ई-कचरा उत्पादन का भी उल्लेख है।

अधिकरण ने ई-वेस्ट (मैनेजमेंट) रूल्स, 2022 के विभिन्न प्रावधानों पर भी विचार किया। जिनमें निर्माता, उत्पादक, रिफर्बिशर, बल्क कंज्यूमर, रिसाइक्लर और राज्य सरकार की जिम्मेदारियां, खतरनाक पदार्थों के नियंत्रण तथा दुर्घटना की सूचना देने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

एनजीटी ने इन्हें पक्षकार बनाया इस मामले में कलेक्टर भोपाल, सदस्य सचिव मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निगम भोपाल की कमिश्नर, प्रमुख सचिव पर्यावरण विभाग, प्रमुख सचिव विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग को पक्षकार बनाया गया है। संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने और चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

तथ्यात्मक जांच के लिए समिति गठित अधिकरण ने मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक समिति से रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के क्षेत्रीय कार्यालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का प्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति को आवेदन में उठाए गए मुद्दों की जांच कर चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।