NEET Protest: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का हमला: अखिलेश यादव बोले- यह केवल इस्तीफा नहीं, इंकलाब है| Navbharat Live

Published on 25 जुल॰ 2026

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सार

NEET Protest Opposition Reaction: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव ने कहा कि यह इस्तीफा नहीं, बल्कि इंकलाब है। विपक्षी नेताओं ने इसे छात्रों के संघर्ष और लोकतांत्रिक दबाव की जीत बताया।

NEET Protest: Opposition attacks Dharmendra Pradhan's resignation; Akhilesh Yadav says, "This is not just a resignation, it's a revolution."

अखिलेश यादव (सोर्स- आईएएनएस)

विस्तार

Akhilesh Yadav On Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के आंदोलन और जनदबाव की बड़ी जीत बताया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि “इंकलाब” है। सपा सांसद डिंपल यादव ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह जीत उनके साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कठिनाइयों पर दुख जताते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।

वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताते हुए कहा कि किसी भी सरकार से ऊपर जनता की आवाज होती है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने युवाओं की जीत के समर्थन में तिरंगा यात्रा निकालने की घोषणा की, जबकि मनसे नेता अमित ठाकरे ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि छात्रों की जीत है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया और अब बाकी मांगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

डिंपल यादव ने छात्रों को दी बधाई

सपा सांसद डिपंल यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि प्यारे बच्चों, यह जीत आपकी है। हम आपके साहस, दृढ़ संकल्प और लगन को सलाम करते हैं, जिसकी वजह से शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। साथ ही, मुझे इस बात का बहुत अफसोस है कि आपको इतनी तकलीफ, मारपीट, सदमे और अपमान का सामना करना पड़ा। देश को बदलाव की जरूरत है। ऐसा बदलाव, जिससे सिस्टम में जान-बूझकर फैलाए गए भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके, ताकि देश तरक्की कर सके और हमारे देश के युवाओं की उम्मीदें और सपने पूरे हो सकें। ढेर सारा प्यार।

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नवीन पटनायक ने लोकतंत्र की जीत बताया

ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने कहा कि मैं इस जीत के लिए भारत के युवाओं, खासकर ‘जेन जी’, को बधाई देता हूं। जवाबदेही और जनमत के प्रति संवेदनशीलता एक मजबूत लोकतंत्र के अहम मूल्य हैं। कोई भी जनता की इच्छा से ऊपर नहीं है। हमारे लोगों, खासकर युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। भारत का भविष्य युवाओं का है। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।

आदित्य ठाकरे ने तिरंगा यात्रा का ऐलान

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बताया कि रविवार को शिवाजी पार्क में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। हम युवाओं की इस जीत का जश्न मनाने और दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों पर भाजपा सरकार द्वारा की गई बेरहम हिंसा के बारे में और जवाब मांगने के लिए एकजुट हो रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों और विचारधाराओं के मतभेदों से ऊपर उठकर, यह देश के लिए है।

अमित ठाकरे बोले- यह छात्रों की जीत

वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित राज ठाकरे ने एक संदेश में कहा कि यह लड़ाई छात्रों की थी और यह जीत सिर्फ उन्हीं की है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न तो मेरी जीत है और न ही किसी राजनीतिक पार्टी की। यह पूरी तरह से देश के युवाओं की जीत है। इन युवा लड़के-लड़कियों ने जो कुछ सहा—चाहे वह पुलिस की लाठियां खाना हो, खुद पर वार झेलना हो, या चिलचिलाती धूप और बारिश में घंटों सड़कों पर डटे रहना हो—उनके संघर्ष को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

जिस तरह से आप सब एकजुट रहे, पूरी हिम्मत के साथ शांतिपूर्ण ढंग से लड़े और सरकार को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर किया, मैं फिर कहता हूं, मैं आपका ‘फॉलोअर’ बन गया हूं। आपकी ताकत और इस लड़ाई को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आपने इस तानाशाही सरकार को दिखा दिया कि जब युवा सड़कों पर उतरते हैं तो क्या होता है। यह तो बस पहला कदम है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तय था। उन्होंने देर से इस्तीफा दिया, जबकि एक समय ऐसा भी था जब उनके पास पद पर बने रहने के अलावा कोई चारा नहीं था। भारत के उन युवाओं को सलाम जिन्होंने अपनी लड़ाई लड़ी और अपना आत्मविश्वास बनाए रखा। हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हैं।

यह इस्तीफा तब आया जब कई दिनों तक सड़कों पर बच्चों को पीटने की कोशिशें नाकाम रहीं। यह देश के छात्रों के संघर्ष की जीत है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और विपक्षी पार्टियां उनके संघर्ष में मजबूती से उनके साथ खड़ी रहीं। गंभीर आरोप लगने और आलोचना होने के बावजूद, प्रधानमंत्री और भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करने की कोशिश की। आंदोलन के आखिर में धर्मेंद्र प्रधान को शर्मिंदगी के साथ पद छोड़ना पड़ा।

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शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उठी मांग

उन्होंने आगे कहा कि यह एक ऐतिहासिक जीत है। संघर्ष के साहस के आगे तानाशाहों को झुकना पड़ा, जिन्होंने दबाने की कोशिश की, जिन्होंने जान-बूझकर उकसाया और संघर्ष की भावना को खत्म करने की कोशिश की, जिन्होंने देश के विपक्ष के नेता को सड़कों पर घसीटा, जिन्होंने हमारे सांसदों के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिन्होंने हर तरह के अलोकतांत्रिक तरीके अपनाए, वे अब शर्म से सिर झुकाए खड़े हैं। नीट जैसी परीक्षाएं बिना किसी गड़बड़ी के आयोजित होनी चाहिए। कम से कम केंद्र सरकार को छात्रों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

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