नीट यूजी धांधली मामले का मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट केवल नेशनल लेवल की मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक सीमित नहीं था। उसका गिरोह बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग यानी BPSCC की बहाली परीक्षाओं में भी सक्रिय था। इसका खुलासा नीट यूजी धांधली मामले में उसकी गि
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ईओयू को उसके ठिकाने और मोबाइल से BPSSC की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी यानी एईडीओ और हवलदार इंस्ट्रक्टर बहाली से जुड़े अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले। ओरिजिनल दस्तावेज और ब्लैंक चेक भी बरामद हुए। ईओयू अब सम्राट के पास से मिले रोल नंबरों और सीडीआर का मिलान कर रही है।
इन साक्ष्यों से BPSSC की इन परीक्षाओं में सॉल्वर और हॉल मैनेजमेंट के संगठित खेल के संकेत मिले हैं। डॉ. रविशंकर सम्राट का गिरोह मेडिकल परीक्षाओं के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी धांधली कर रहा था। जांच में सामने आया है कि गिरोह BPSSC की इन परीक्षाओं में सेलेक्शन कराने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 25 से 30 लाख रुपए की डील करता था। आधी रकम एडवांस में ली जाती थी। बाकी राशि परीक्षा परिणाम आने के बाद ली जाती थी।

वेंडरों से साठगांठ
लखीसराय, नालंदा और हाजीपुर के बायोमीट्रिक वेंडर कर्मियों से मिलीभगत थी। अभ्यर्थी की जगह मेडिकल छात्रों को बैठाया जाता था। थंब इंप्रेशन और फोटो की क्लोनिंग से फर्जी उपस्थिति दर्ज होती थी।
बायोमीट्रिक जांच के बाद केंद्र कर्मियों की मदद से सॉल्वर को पसंदीदा कमरों में बैठाया जाता था। वहां उनसे ओएमआर शीट भरवाई जाती थी।
धांधली का नेटवर्क
डॉ. रविशंकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फाइनल ईयर का छात्र है। एक पेपर में फेल होने के बाद वह परीक्षा देने आर्यभट्ट विश्वविद्यालय आया, जहां पकड़ा गया। वह अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा था।
रविशंकर का गिरोह कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी परीक्षाओं में भी धांधली करता था। नीट यूजी 27 की परीक्षा सीबीटी मोड में होने की संभावना है।
MBBS परीक्षा देने पहुंचा, वहीं से गिरफ्तारी
इस साल मई में आयोजित नीट-यूजी और जून में हुई री-नीट परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. उज्ज्वल राज और डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को ईओयू ने पटना से गिरफ्तार किया था।
बताया जाता है कि डॉ. उज्ज्वल राज को 11 अगस्त और डॉ. रविशंकर को 12 अगस्त को पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में MBBS की सप्लीमेंट्री परीक्षा के केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया।
दोनों की निशानदेही पर गिरोह के सदस्य और डॉ. रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया है कि गिरोह असली अभ्यर्थी की जगह स्कालर बैठाने, बायोमीट्रिक सत्यापन में हेरफेर और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के जरिए नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करता था।

12- 30 लाख रुपए में होती थी स्कॉलर की सेटिंग
ईओयू की जांच के अनुसार, गैंग परीक्षा फॉर्म भरने के समय ही कैंडिडेट और स्कॉलर के बीच सेटिंग कर लेता था।
मीडिया रिपोर्टस की माने तो इसके लिए कुछ अधिकृत आधार एजेंटों और कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की मदद से कैंडिडेट की जगह फर्जी अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक अपडेट कराया जाता था।
फोटो मिक्सिंग के जरिए बायोमीट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को चकमा देने की कोशिश होती थी।
फिर सेंटर पर असली अभ्यर्थी की जगह स्कॉलर को बैठाया जाता था। जांच में प्रति अभ्यर्थी 12 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है।
अश्विनी के ठिकाने से मिले कई परीक्षाओं के एडमिट कार्ड
डॉ. रविशंकर की निशानदेही पर उसके भाई अश्विनी कुमार को रामकृष्णानगर के संध्या हाइट अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद ईओयू ने उसके ठिकाने में छापेमारी की। छापेमारी में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की एमबीबीएस परीक्षा के खाली बुकलेट, एईडीओ, नीट, बीपीएसएससी और सीबीएससी आयोग समेत अलग-अलग परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले।
कई अभ्यर्थियों के स्कूल मार्कशीट, ओरिजिनल सर्टिफिकेट, टीसी और दो लाख कैश भी बरामद किए गए। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के ब्लैंक चेक मिलने की भी खबर है।

डॉ. रविशंकर पर पत्नी का फर्जी कास्ट सर्टिफिकेट बनाने का भी आरोप है।
फर्जी डॉक्यूमेंट भी बनाती थी गैंग
गिरोह केवल परीक्षा में स्कॉलर बैठाने तक सीमित नहीं था, बल्कि नीट काउंसिलिंग में नामांकन के लिए फर्जी आय, जाति और दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी तैयार कराता था।
मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईओयू की जांच में पता चला है कि डॉ रविशंकर की पत्नी मधु प्रिया एईडीओ की भी अभ्यर्थी थी। मधु प्रिया ओबीसी कैटेगरी में आती हैं, जबकि संपतचक प्रखंड कार्यालय से उनका फर्जी एससी जाति प्रमाण पत्र बनाया गया था।