क्या NDA के लिए मुस्लिम वोट साधेंगे मो. शमी: जयंत से मुलाकात के बाद RLD में एंट्री की चर्चा, डेढ़ साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला - Uttar Pradesh News

Published on 24 सित॰ 2026

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर मोहम्मद शमी अब सियासत की पिच पर नई पारी शुरू कर सकते हैं। RLD प्रमुख जयंत चौधरी से हालिया मुलाकात के बाद उनकी राजनीतिक एंट्री को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है। माना जा रहा है, तेज गेंदबाज के पास यूपी चुनाव में 2 ऑप्शन हो सकत

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  • पहला- RLD के टिकट पर खुद चुनावी मैदान में उतरना या बड़े भाई हसीब को चुनाव लड़ाना
  • दूसरा- RLD के लिए स्टार प्रचारक की भूमिका अदा करना

शमी करीब डेढ़ साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं। उन्होंने अपना आखिरी वनडे मार्च, 2025 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। अब सवाल है कि सियासत में संभावित एंट्री सिर्फ शमी की लोकप्रियता की वजह से है? या इसके पीछे पश्चिमी यूपी के मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच बनाने की RLD-भाजपा की रणनीति का हिस्सा है?

शमी 21 सितंबर को जयंत चौधरी से मिले थे। जयंत ने फेसबुक पर यह तस्वीर शेयर की है।

शमी 21 सितंबर को जयंत चौधरी से मिले थे। जयंत ने फेसबुक पर यह तस्वीर शेयर की है।

शमी के राजनीति में आने की संभावना 3 वजहों से बन रही

शमी ने अभी तक भारतीय क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है। इसलिए उनके राजनीति में आने की संभावित टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसके पीछे 3 कारण हैं-

1. भाजपा के करीब आने के लिए RLD का सहारा लेंगे : RLD इस समय NDA गठबंधन का हिस्सा है। सीधे भाजपा में जाने से मुस्लिम समुदाय में शमी की छवि को लेकर कई तरह के सवाल उठ सकते थे। वहीं, RLD की पहचान किसान, जाट और मजहबी सौहार्द की रही है। इसीलिए RLD शमी के लिए NDA के पाले में जाने का सबसे सुरक्षित और सहज 'पॉलिटिकल ब्रिज' साबित हो सकती है।

2. कानूनी मामलों से निपटने के लिए सत्ता को गले लगाएंगे : शमी के छोटे भाई मोहम्मद कैफ पर लखनऊ की एक युवती ने रेप के आरोप लगाए हैं। इसे लेकर उनका परिवार कानूनी उलझनों का सामना कर रहा है। पुलिस और प्रशासनिक दबाव से निपटने के लिए शमी सत्ता के करीब आना चाहते हैं।

3. 36 साल उम्र, गेंदबाजी में लंबा करियर नहीं : शमी तेज गेंदबाज हैं। उनकी उम्र 36 साल हो चुकी है। इंडियन क्रिकेट टीम में तेज गेंदबाज के लिए 35 साल के बाद सिलेक्शन के चांस कम होते जाते हैं।

क्या सपा के मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाना चाहती है RLD

जयंत चौधरी की पार्टी मुख्य रूप से जाट और किसान राजनीति के इर्द-गिर्द सिमटी रही है। 2024 के चुनाव में भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद RLD से उनका पारंपरिक 'जाट-मुस्लिम' समीकरण कुछ हद तक खिसका था। अखिलेश यादव की सपा-कांग्रेस गठबंधन की काट के लिए RLD को एक बड़े मुस्लिम चेहरे की जरूरत थी।

शमी सिर्फ एक मुस्लिम चेहरा नहीं, वे वर्ल्ड कप के हीरो और नेशनल आइकन हैं। मुस्लिम युवाओं के बीच उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग है। RLD उनके जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह NDA में रहते हुए भी मुस्लिम समुदाय के हितों की बात करती है।

तुर्क-मुस्लिम बिरादरी पर पकड़ बना सकते हैं शमी

मोहम्मद शमी मूल रूप से अमरोहा जिले की सहसपुर अलीनगर तहसील के रहने वाले हैं। पश्चिमी यूपी के अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, मेरठ और बुलंदशहर उनके प्रभाव वाले मुख्य जिले हैं।

अमरोहा सीट पर सवा 3 लाख से ज्यादा वोटरों में लगभग 2 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें 70 हजार से ज्यादा तुर्क बिरादरी है, जिससे शमी का परिवार खुद आता है।

अमरोहा सीट पर 2002 से सपा के कद्दावर नेता महबूब अली का कब्जा रहा है। 2022 में भी उन्होंने भाजपा के राम सिंह को हराया था। अगर शमी या उनके परिवार का चेहरा NDA के पास आता है, तो सपा के इस अजेय किले में सीधी सेंध लग सकती है।

तस्वीर में बाएं से दाएं- मोहम्मद शमी, मां अंजुम आरा, बड़े भाई मोहम्मद हसीब और भाभी हैं।

तस्वीर में बाएं से दाएं- मोहम्मद शमी, मां अंजुम आरा, बड़े भाई मोहम्मद हसीब और भाभी हैं।

पॉलिटिक्स में 'सेलिब्रिटी इमेज' का मिलेगा फायदा

भारत में क्रिकेट और बॉलीवुड के सितारों का राजनीति में आना नया नहीं है। मोहम्मद शमी को अपनी 'स्पोर्ट्स स्टार' वाली छवि का सीधा फायदा मिल सकता है। देश के लिए उनकी गेंदबाजी और 2023 वर्ल्ड कप के प्रदर्शन ने उन्हें हर धर्म और वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है।

जो युवा वोटर पार्टी लाइन या जातिगत राजनीति से हटकर सोचते हैं, वे शमी जैसे युवाओं के चहेते खिलाड़ी के नाम पर आकर्षित हो सकते हैं। भाजपा-RLD गठबंधन को यह साबित करने में आसानी होगी कि वे केवल एक वर्ग को नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन करने वाले मुस्लिम प्रतीकों को भी साथ लेकर चल रहे हैं।

विशेषज्ञ बोले- शमी की एंट्री से मुस्लिम वोटों पर असर की संभावना कम

वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में 2022 और 2024 के मुकाबले ज्यादा द्विध्रुवीय मुकाबला होने की संभावना है। ऐसे में मोहम्मद शमी के जरिए मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की संभावना बेहद कम है। शमी राजनीतिक चेहरा नहीं हैं, उनकी लोकप्रियता भी पहले जैसी नहीं रही है।

अमरोहा से चुनाव लड़ने पर RLD-भाजपा गठबंधन के सहारे वोट हासिल करना आसान नहीं होगा। उनकी मौजूदगी से मीडिया में चर्चा और प्रचार में ग्लैमर जरूर आ सकता है। लेकिन, वोटों पर खास असर पड़ने की संभावना कम है।

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