Navabharat Nishanebaaz: दिल बहलाने के लिए ख्याल अच्छा, वोट चोरी का आरोप कितना सच्चा| Navbharat Live

Published on 4 अग॰ 2026

Updated On: Aug 04, 2026 | 09:35 AM IST

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सार

BJP Opposition Allegations: 'निशानेबाज' के व्यंग्य में विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर तंज कसते हुए राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की संस्कृति पर कटाक्ष किया गया है।

Navabharat Nishanebaaz: A nice thought for amusement, but how much truth is there in the allegation of vote theft?

(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

Vote Theft Political Debate: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, विपक्ष बगैर किसी ठोस सबूत के बीजेपी पर आरोप लगाता है कि वह इतने वर्षों से वोट चोरी कर सरकार बना रही है। चौकीदार को चोर कहकर अपनी झुंझलाहट दिखाता है। यह सब क्या चल रहा है?’

हमने कहा, ‘मिर्जा गालिब का शेर है हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल बहलाने के लिए गालिब ख्याल अच्छा है। बीजेपी नेता मानते हैं कि विपक्ष की हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी हो गई है। वह खुद को सत्ता का हकदार मानता है और अपनी विफलता पचा नहीं पा रहा है। इसलिए वह दिल बहलाने के लिए वोट चोरी का आरोप दोहराने लगा है।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, दिल बहलाने के और भी रास्ते हैं। पुराने राजा-महाराजा दिल बहलाने के लिए शिकार खेलने जाते थे या जुआ खेलते थे। आम जनता तमाशा और नौटंकी देखकर मन बहलाती थी। फिर सिनेमा और टीवी से दिल लगा बैठी। अब लोग मोबाइल से चिपक गए हैं। दिल बहलाने के लिए लोग क्लब से कैबरे तक जाते हैं या बार को गुलजार करते हैं।’

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हमने कहा, ‘जनता भी अपने दिल की बात सुनकर किसी पार्टी को वोट देते हुए कहती है- दिल भी तेरा, हम भी तेरे! जब दिल अपना और प्रीत पराई हो जाती है तो लोकप्रिय नेता भी चुनाव हार जाता है। चुनाव में पैसे का खेल होता है इसलिए उम्मीदवार पूछता है यार दिलदार तुझे कैसा चाहिए, प्यार चाहिए कि पैसा चाहिए! पैसा बांटने वाली खैराती योजनाओं की बदौलत चुनाव जीते जाते हैं।

जो पार्टी हार जाती है, वह कहती है दिल के अरमां आंसुओं में बह गए, हम वफा करके भी तन्हा रह गए। सत्ता के लिए बेमेल गठबंधन बनाते समय कहा जाता है दिल से मिला के दिल प्यार कीजिए, कोई सुहाना इकरार कीजिए! सहयोगी पार्टी कहती है मेरे दिल में आज क्या है, तू कहे तो मैं बता दूं, खुद को सेक्यूलर बताने वाले नेता किसी सांप्रदायिक पार्टी से गठबंधन कर लेते हैं तो उनकी भावना रहती है हम आज कहीं दिल खो बैठे, यूं समझो किसी के हो बैठे ! सत्ता से बाहर हो जाने वाला दुखी नेता गुनगुनाता है फिर वही शाम वही गम वही तन्हाई है, दिल को बहलाने तेरी याद चली आई है।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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