Narottam Mishra Viral Video: दतिया में आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में रो पड़े पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, सीएम मोहन यादव ने कंधे पर हाथ रखकर संभाला

Published on 13 जुल॰ 2026

Narottam Mishra Viral Video: दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा रो पड़े। आशुतोष तिवारी के समर्थन में मंच पर भाषण देते हुए नरोत्तम मिश्रा के आंसू छलक आए। सीएम मोहन यादव ने कंधे पर हाथ रखकर उन्हें संभाला।

भाषण खत्म करते-करते हाथ जोड़कर रो पड़े नरोत्तम मिश्रा

बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन फॉर्म भरा। इसके बाद नामांकन रैली हुई। जनसभा में मंच पर बोलते हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा बेहद भावुक हो गए। भाषण खत्म करते-करते वे खुद को संभाल नहीं पाए और हाथ जोड़कर रो पड़े। मंच पर मौजूद सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व गृह मंत्री को ढांढस बंधाया।

'एक-एक दरवाजे पर शीश नवाऊंगा, आशुतोष को जिताऊंगा'

पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि 16 जुलाई से दतिया में डेरा जमाएंगे। सारे कार्यकर्ताओं के साथ एक-एक दरवाजे पर अपना शीश नवाऊंगा। एक-एक गांव के अंदर जाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा।

दिग्विजय सिंह के रावण वाले बयान पर पलटवार

पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह कह रहे थे कि हम रावण हैं, अहंकारी हैं। इसलिए साढ़े 7 हजार वोट से चुनाव हार गए। दिग्विजय सिंह जी हम अहंकारी थे तो साढ़े 7 हजार से हार गए और तुम भोपाल में साढ़े 3 लाख से हार गए तो क्या संस्कारी हो गए ?

जीतू पटवारी को दतिया उपचुनाव लड़ने का चैलेंज

नरोत्तम मिश्रा ने PCC चीफ जीतू पटवारी को दतिया से उपचुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी, हम साढ़े 7 हजार से हार गए तो अहंकारी हो गए और तुम 35 हजार से मऊ में हार गए तो क्या संस्कारी हो गए ? तुम मऊ से हारे हो, आशुतोष यहां से लड़ रहे हैं। आ जाओ लड़ लो इनके खिलाफ, पता चल जाएगा कि कौन अहंकारी है और कौन संस्कारी है।

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दतिया उपचुनाव की लड़ाई राजा और रंक पर आई

पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में कहा कि दतिया उपचुनाव की लड़ाई लड़ाई राजा और रंक पर आ गई है। एक तरफ राजा हैं जो सोने का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए हैं। दूसरे हमारे रंक हैं जो बचपन से ही राष्ट्र की सेवा के लिए घर छोड़कर निकल गए हैं। कार्यकर्ताओं के बीच में रहना। कार्यकर्ताओं के संग खाना-पीना। पार्टी की सेवा रात दिन करना। पता नहीं कहां-कहां रहे और हर जगह अपनी योग्यता के कीर्तिमान स्थापित किए। ऐसे हमारे प्रत्याशी हैं जिन्होंने चरैवेति चरैवेति, पंडित दीनदयाल जी का सिद्धांत अपने जीवन में उतारा है।

एक कार्यकर्ता के लिए होता है न कि पांव में चक्कर मुंह में शक्कर। पूरी की पूरी कार्यकर्ताओं की जितनी भी विशेषताएं हैं, वो हमारे प्रत्याशी में हैं। मैंने ये बात इसलिए कही कि राजा कांग्रेस का प्रत्याशी और भाजपा के प्रत्याशी रंक।