Updated On: Jul 18, 2026 | 03:24 PM IST
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सार
Mumbai Bullet Train: पूर्व जापानी सलाहकार हिदेकी माकिहारा ने बुलेट ट्रेन में यूरोपीय सिग्नलिंग सिस्टम लगाने पर सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय ने इसे निजी राय बताकर खारिज किया।

बुलेट ट्रेन परियोजना (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Mumbai Bullet Train Shinkansen Signaling System: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की तकनीक को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना से पूर्व में जुड़े जापानी इंजीनियर व सलाहकार हिदेकी माकिहारा ने शिंकानसेन की मूल जापानी डीएस-एटीएस सिग्नलिंग प्रणाली के बजाय यूरोपीय ईटीसीएस-एल 2 प्रणाली अपनाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शिंकानसेन ट्रेनें और उनकी मूल सिग्नलिंग प्रणाली एक-दूसरे से अविभाज्य हैं। इस बदलाव का असर परियोजना के तकनीकी ढांचे के साथ-साथ भारत-जापान के भविष्य के हाई-स्पीड रेल सहयोग पर भी पड़ सकता है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना से जुड़े रहे पूर्व जापानी सलाहकार हिदेकी माकिहारा ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत यात्रा के बाद अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि परियोजना के दौरान भारतीय पक्ष ने कई बार निर्णय और रुख बदले, जिससे इसकी प्रगति प्रभावित हुई। उन्होंने सबसे गंभीर चिंता सिग्नलिंग प्रणाली को लेकर जताते हुए कहा कि जनवरी 2025 की निविदा में पूरे कॉरिडोर के लिए ईटीसीएस-एल 2 प्रणाली का उल्लेख है।
उनके अनुसार, यदि यही प्रणाली लागू हुई तो जापान की पारंपरिक डीएस एटीसी प्रणाली के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा। माकिहारा का कहना है कि शिंकानसेन केवल ट्रेन नहीं, बल्कि ट्रेन, सिग्नलिंग, नियंत्रण और परिचालन की एकीकृत तकनीक है। ऐसे में एक ही कॉरिडोर पर दो अलग-अलग सिग्नलिंग प्रणालियां साथ नहीं चल सकतीं और यह बदलाव 2015 के भारत-जापान हाई-स्पीड रेल सहयोग समझौते की मूल भावना के विपरीत है।
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स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन पर भी जताए संदेह
पूर्व जापानी सलाहकार ने स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेंट योजना पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीईएमएल के पास मेट्रो कोच निर्माण का अनुभव है, लेकिन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हाई स्पीड ट्रेनों का नहीं। उन्होंने आशंका जताई कि महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए यूरोपीय कंपनियों पर निर्भरता बढ़ सकती है और प्रस्तावित बी 28 ट्रेनसेट की तय समयसीमा में डिजाइन, निर्माण, परीक्षण व प्रमाणन पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण होगा।
डिपो डिजाइन पर भी सवाल
माकिहारा का दावा है कि परियोजना के डिपो जापान की ईऽ शिंकानसेन ट्रेनों के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं। ऐसे में भविष्य में भारतीय डिजाइन की ट्रेनें चलने पर रखरखाव और तकनीकी अनुकूलता की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
दो ट्रेनसेट देने का दावा
उन्होंने दावा किया कि जापान ने परीक्षण, चालक प्रशिक्षण और निरीक्षण के लिए दो शिंकानसेन ट्रेनसेट निःशुल्क देने की पेशकश की थी, लेकिन जापानी सिग्नलिंग प्रणाली नहीं अपनाने के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
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बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम जारी
508 किमी लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर निर्माण कार्य जारी है। जापानी तकनीक आधारित इस परियोजना में 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की योजना है। हालांकि, सिग्नलिंग को लेकर उठेढे सवालों पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
केंद्र सरकार सोशल विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बाताया की मीडिया पर प्रसारित संबंधित पोस्ट किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत राय है और तथ्यों पर आधारित नहीं है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच सकारात्मक सहयोग जारी है।
परियोजना का निर्माण तेजी से प्रगति पर है और पहला खंड 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है। शुरुआती परिचालन भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से किया जाएगा, जबकि जापान की ई20 ट्रेन श्रृंखला उपलब्ध होने पर उसे शामिल किया जाएगा। सिग्नलिंग सहित सभी तकनीकी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और परियोजना दोनों देशों के साझा उद्देश्य के अनुसार आगे बढ़ रही है।
