MP में मानसून को लेकर रेलवे अलर्ट! 1023 KM ट्रैक की निगरानी, 292 कर्मचारी संभालेंगे संवेदनशील जगहें - Haribhoomi

Published on 5 सित॰ 2026

मानसून में तेज बारिश, बाढ़ और जलभराव से रेल परिचालन प्रभावित न हो, इसके लिए भोपाल मंडल ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। 1023 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क पर ट्रैक, पुल, सिग्नलिंग और जल निकासी व्यवस्था की विशेष निगरानी की जा रही है।

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भोपाल रेल मंडल में 1023 किमी नेटवर्क पर कड़ी निगरानी, 292 कर्मचारी संभाल रहे संवेदनशील स्थान

  • Published: 05 Sep 2026, 06:42 PM IST
  • Last Updated: 05 Sep 2026, 06:42 PM IST

भोपाल। मानसून के दौरान तेज बारिश, बाढ़, जलभराव और आंधी-तूफान से रेल परिचालन प्रभावित न हो, इसके लिए भोपाल मंडल ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। मंडल के करीब 1023 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क पर ट्रैक, पुल, सिग्नलिंग, विद्युत उपकरण और जल निकासी व्यवस्था की विशेष निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर 118 पेट्रोलमैन और 174 वाचमैन, यानी कुल 292 कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी के निर्देशन में मानसून को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील और जोखिम वाले स्थानों को पहले से चिन्हित कर वहां अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।

पांच प्रमुख रेलखंडों पर खास नजर
भोपाल मंडल का रेल नेटवर्क खंडवा-इटारसी, इटारसी-भोपाल, भोपाल-बीना, बीना-गुना और गुना-मक्सी जैसे महत्वपूर्ण रेलखंडों से जुड़ा है। इनकी लंबाई क्रमशः 183, 92, 138, 118 और 214 किलोमीटर है। मानसून में इन क्षेत्रों में रेल पथ की नियमित पेट्रोलिंग और निरीक्षण किया जा रहा है। इससे ट्रैक पर पानी भरने, क्षति होने या किसी अन्य खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।

पुलों पर जलस्तर की निगरानी
संवेदनशील पुलों पर वॉटर लेवल अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी मदद से नदी या नाले का जलस्तर बढ़ने पर समय रहते सूचना मिल सकेगी। जरूरत पड़ने पर ट्रेनों की सुरक्षा के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।

जलभराव रोकने के लिए ट्रैक और यार्ड में नालियों, पुलियों और जल निकासी मार्गों की सफाई कराई गई है। जरूरी अनुरक्षण कार्य भी पूरे किए गए हैं। विद्युतीकृत रेलखंडों में ओवरहेड उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए ट्रैक के आसपास बाधा बनने वाली पेड़ों की शाखाओं की छंटाई की गई है।

सिग्नल और संचार व्यवस्था भी दुरुस्त
मानसून के दौरान सिग्नलिंग व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए केबलों की जांच, मेगरिंग और तकनीकी अनुरक्षण किया जा रहा है। आपात स्थिति में त्वरित संपर्क के लिए वॉकी-टॉकी सेटों को भी चालू और चार्ज अवस्था में रखा गया है।

भोपाल मंडल स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। मंडल का कहना है कि यात्रियों की संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मानसून में सुरक्षित व विश्वसनीय रेल सेवा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।