उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश इस बार आफत बन गई है। 18 अगस्त से लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे लगे उत्तरी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है।

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश की वजह से सड़क पर जलभराव (फोटो साभार: खबर लहरिया)
खबर लहरिया के रिपोर्टरों ने यूपी के बाँदा, चित्रकूट, महोबा, प्रयागराज और वाराणसी से रिपोर्टिंग की और वहां की स्थिति को दिखाया। रिपोर्ट में देखा गया गया कि बारिश का असर सिर्फ शहरों की सड़कों तक सीमित नहीं है बल्कि गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं, खेतों में लगी धान की फसलें जलमग्न हैं और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। इसी तरह का हाल एमपी के पन्ना का भी है।
महोबा में पानी में फंसे जानवर और ग्रामीण
महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक के लाडपुर गांव में लगातार हो रही तेज बारिश से हालात बेहद खराब हो गए हैं। 25 अगस्त से जारी बारिश के बाद 27 अगस्त की रात कई ग्रामीणों के घरों में पानी घुस गया। लोग अपना सामान बचाकर दूसरों के घरों में जाने को मजबूर हैं। घर में परिवारों के घरों में 2 दिन से चूल्हा तक नहीं जला है क्योंकि सब पानी में डूबा हुआ है। लोग किसी तरह घरों से पानी निकालने में लगे हुए हैं। खबर लहरिया की रिपोर्ट में आप लोगों की बेबसी और दर्द को महसूस कर सकते हैं। वे किस हालात में रहने को मजबूर हैं उनके पास किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं पहुंच पा रही है।
बाँदा में उसरा नाला बना खतरा
26 अगस्त 2026 को बांदा जिले के जौहरपुर गांव का उसरा नाला लगातार बारिश की वजह से लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। पानी का इतना तेज बहाव है कि यदि कोई इस रास्ते से होकर गुजरे तो पैर फिसलने पर सीधा बहाव के साथ पानी में समा सकता हैं लेकिन यहां के लोगों की मज़बूरी है इसलिए वह रोजाना इसी रास्ते से गुजर रहे हैं।
बाँदा में बारिश से गिरी दिवार, दो लोग की मौत
लगातार बारिश होने से बांदा जिले के बबेरू क्षेत्र के तराया गांव में 26 अगस्त 2026 को कच्ची दीवार गिरने की खबर समाने आई। इस हादसे में पिता और 6 महीने की बेटी की दबकर मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
पन्ना में नदी का जल स्तर बढ़ा
मध्य प्रदेश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्से में इस समय बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। पन्ना, सतना, रीवा, डिंडोरी, छतरपुर और आसपास के जिलों में लगातार बारिश से कई जगह बाढ़ जैसे हालात और जलभराव बने हैं।
खबर लहरिया की 26 अगस्त की रिपोर्ट में एक तस्वीर सामने आई जिसमें पन्ना जिले के अजयगढ़ ब्लॉक के प्यारी गांव में नदी का जलस्तर बढ़ता हुआ दिखाई दिया। नदी का जल स्तर इतना बढ़ गया जिससे सड़क पर आवागमन बाधित हो गया। करीब 4 घंटे तक सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाढ़ से 500 किसानों की धान की फसल डूबी
प्रयागराज के जसरा ब्लॉक के घूरी गांव में करीब एक हफ्ते से किसानों की धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। किसानों का आरोप है कि बांध का फाटक नहीं खुलने की वजह से खेतों में पानी भर गया, जिससे धान की फसल सड़ने लगी है। इस बारिश ने करीब 500 किसानों को प्रभावित किया है।
राधे मोहन किसान बताते हैं कि खेतों में कमर से ऊपर तक पानी भरा हुआ है और धान के पौधे ढेड़ फिट के हो गए हैं। पानी को देखकर अंदाजा लगया जा सकता है कि 10 दिन में मुश्किल से पानी सुख पाएगा। नहीं सूखेगा तो पक्का धान की फसल सड़ जाएगी।

खेतों में धान की फसल और भरा पानी (फोटो साभार: खबर लहरिया)
दो बांध के फाटक न खोलने का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि इतनी तेज बारिश से पानी जमा हुआ है। घूरी गांव में दो बांध है – बाघला बांध और बेला बांध। दोनों में गेट लगा हुआ है इस वजह से पानी उल्टा खेत की ओर आता है।
चित्रकूट में बढ़ता नदी का पानी, गांवों पर बढ़ती चिंता
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश का पानी जब नदी और नालों में पहुंचता है तो उसका असर सबसे पहले उन बस्तियों पर पड़ता है जो पहले से ही जलभराव और कमजोर रास्तों की समस्या से जूझ रही हैं।
चित्रकूट के रामघाट तक जानें का रास्ता भी पूरी तरह से बंद हो गया इतना पानी भर गया है।
हर साल ऐसी होता है। पिछली साल भी आई थी तो रामघाट पर मौजूद सभी दुकानों में पानी भर गया था। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पूरी खबर पढ़ सकते हैं।
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वाराणसी की गलियों से सड़क तक भरा बारिश का पानी
वाराणसी जिले में ईश्वर गंगे तालाब है वो बहुत प्रसिद्ध है। दो दिन पहले यानी 25 अगस्त को वहां के आसपास की गलियों में बारिश का पानी और सीवर का पानी भरा हुआ था। इसकी वजह से लोगों को गंदे पानी से होकर रास्ता पार करना पड़ रहा था।
वाराणसी में गंगा का बढ़ा जलस्तर
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों का डूबना सिर्फ धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि नदी किनारे बसे लोगों की पूरी दिनचर्या बदल देता है। वाराणसी घाटों की वजह से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है और लगातार बारिश की वजह से अब वहां तक पहुंचना असंभव है। जानकारी के मुताबिक बारिश ने 84 घाटों का संपर्क तोड़ दिया है। वहीं गंगा नदी का जलस्तर 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि अब आरती छत पर की जा रही है।

गंगा नदी और घाट (फोटो साभार: खबर लहरिया)
गंगा नदी का जल स्तर बढ़ने से अब मणिकर्णिका पर होने वाले अंतिम संस्कार छतों पर किये जा रहे हैं।
गंगा का पानी बढ़ता है तो सबसे पहले घाटों की सीढ़ियां गायब होती हैं, फिर घाटों से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होती हैं और उसके बाद नदी किनारे रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ती जाती है। वाराणसी में लंबे समय से बारिश और बाढ़ का असर देखने को मिलता रहा है। लेकिन हर बार पानी बढ़ने के साथ वही सवाल लौटता है- क्या नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए सिर्फ राहत और अस्थायी इंतजाम ही समाधान हैं?
महोबा में बरसात में कीचड़ और गंदगी
महोबा नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 में करीब 400 मीटर सीसी रोड का निर्माण न होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि वर्ष 2025 से लगातार सड़क निर्माण की मांग की जा रही है और नगर पालिका, तहसील दिवस व अधिकारियों को आवेदन भी दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बारिश के मौसम में रास्ते में घुटनों तक पानी और कीचड़ भरने से बच्चों, मजदूरों और स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। 19 अगस्त 2026 को करीब दो दर्जन महिला-पुरुषों ने नगर पालिका में लिखित दरखास्त देकर तत्काल अस्थायी रास्ते की व्यवस्था कराने की मांग की।
आंगनबाड़ी केंद्र से लेकर स्कूल तक जलभराव
बारिश होते ही आंगनबाड़ी केंद्र में घुटनों तक पानी भर जाता है। महोबा के आंगनबाड़ी केंद्र में जलभराव के कारण पढ़ने वाले छोटे बच्चों के साथ आंगनबाड़ी सहायिका को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। केंद्र में पानी निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आंगनबाड़ी केंद्र में पानी भर जाए तो वहां बच्चों के बैठने, पढ़ने और पोषण से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होती हैं। स्कूल तक जाने वाली सड़क पर पानी और कीचड़ हो तो अभिभावकों के सामने बच्चों को भेजने और उनकी सुरक्षा की चिंता रहती है। खबर लहरिया की रिपोर्टिंग में ग्रामीण क्षेत्रों में खराब रास्तों और जलभराव की ऐसी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं।
ये बारिश की तस्वीरें उस कमी को सामने ला देती है जो पूरे साल मौजूद रहती है -नालियों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था, पक्की सड़क और सुरक्षित रास्ते की कमी। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ना कोई नई बात नहीं है। नई बात यह भी नहीं कि हर साल लोगों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ता है। असली सवाल यह है कि हर साल सामने आने वाली इस समस्या के बावजूद स्थायी इंतजाम क्यों नहीं हो पाते?
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