शास्त्रीजी की जगह 'राजेंद्र बाबू' को श्रद्धांजलि: नरेश मीणा के धरने से 'दारूवालों' के लिए अपील; MLA भए मंत्री तो डर काहे का? - Rajasthan News

Published on 4 अक्टू॰ 2026

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सरकारी स्कूल में मास्टर साहबों ने गांधी-शास्त्री जयंती पर देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू को श्रद्धांजलि दे दी। बारां में नरेश मीणा के धरने पर मंच से कहा गया कि दारूवालों यहां मत आना। लोकतंत्र के उत्सव में बालोतरा की 101 साल की दादी मिसाल बन गईं और परिवहन मंत्री के इलाके में जीप 'खचाखच' भरकर चली।

राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…

1. महापुरुषों की आत्माएं

स्वर्ग के एक उद्यान में बापू, शास्त्रीजी और राजेंद्र बाबू आधुनिक भारत की कल्पना करते हुए टहल रहे थे।

बापू ने कहा- हमने जिस देश को आजाद कराया, वह कैसा होगा? राजेंद्र बाबू बोले- जैसा छोड़कर आए थे, यकीनन उससे बेहतर होगा। लोकतंत्र में पंडितजी ने आधुनिक भारत की नींव रखी। अब तक तो भारत देश दुनिया के शीर्ष विकसित राष्ट्रों में शुमार हो गया होगा।

शास्त्रीजी उनकी बातें सुन रहे थे। उन्हें चुप देख बापू ने कहा- आप कुछ नहीं कहेंगे महामना? आपकी क्या कल्पना करते हैं। शास्त्रीजी बोले- हमने तो वह गरीबी देखी कि नाव पर चढ़कर नदी पार करने के पैसे नहीं होते थे। अब तो शिक्षण व्यवस्था का कायाकल्प हो गया होगा।

उन्होंने कहा- बापू, एक बार चलकर देखें कि आज हमारे देश के बच्चे क्या पढ़ रहे हैं। बापू मंद-मंद मुस्कुराए और बोले- चलो, आज विशेष दिन भी है। 2 अक्टूबर है। विद्यालयों में आपको और मुझे याद किया जा रहा होगा।

तीनों दिव्यात्माएं धरती की ओर चलीं। राजेंद्र बाबू बोले-अहा देखो, वह रेगिस्तान में हमने विशाल रिफाइनरी लगा ली है। आधुनिक भारत का चमचमाता तिलक। बापू बोले- यह बालोतरा नाम का स्थान है। यहीं चलते हैं।

तीनों महापुरुष बालोतरा के धोरीमन्ना पहुंचे। जहां भारते की बेरी गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में गांधी-शास्त्री जयंती मनाई जा रही थी। 'रघुपति राघव' सुनकर बापू की आंखें नम हो गईं। तीनों परिसर में दाखिल हुए।

अचानक राजेंद्र बाबू चौंके। बोले- अरे यह क्या, शास्त्रीजी जयंती तो आपकी है, यहां तस्वीर मेरी लगा रखी है। शास्त्रीजी मायूस हो गए। राजेंद्र बाबू भी उदास होकर बोले- ये अध्यापक बच्चों को क्या सिखाएंगे, जिन्हें आपका और मेरा अंतर नहीं पता। बताइये, आपकी जयंती पर मुझे श्रद्धांजलि दे रहे हैं और टोकने वाला कोई नहीं।

बापू मुस्कुराते हुए बोले- कोई बात नहीं राजेंद्र बाबू, इस बहाने आपका अभिनंदन कर रहे हैं। वरना इन्हें यह भी ज्ञात नहीं होगा कि आपकी जयंती 3 दिसंबर को आती है। तीनों महापुरुष खिलखिलाकर हंसे और भारत दर्शन किए बिना वहीं से स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया।

बालोतरा के भारते की बेरी गांव के सरकारी स्कूल में लाल बहादुर शास्त्रीजी की जगह प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसादजी को श्रद्धांजलि देते टीचर्स।

बालोतरा के भारते की बेरी गांव के सरकारी स्कूल में लाल बहादुर शास्त्रीजी की जगह प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसादजी को श्रद्धांजलि देते टीचर्स।

2. ‌BSS प्रमुख नरेश मीणा का 'बैलेंस'

संतुलन बनाकर चलना बहुत जरूरी है। बीएसएस यानी भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा यह बात अच्छी तरह जानते हैं।

उन्होंने पहले ही ऐलान कर दिया कि परिवार ने पंचायत में 31 साल राज किया है और वे पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पैदा नहीं हुए।

तो जो चुनाव लड़ने के लिए उनका अवतरण हुआ है, उसके लिए वे पूरा जोर लगा रहे हैं। समाज के हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने बारां की धरती को इसके लिए मुफीद पाया। चौपहिया कार पर बैलेंस का प्रदर्शन करते हुए वे किसानों के बीज, मुआवजा, एमएसपी और अन्य तरह की समस्याएं लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए।

उन्होंने कहा- मैंने बालाजी मंदिर में दो कप चाय पी थी। पेट में अन्न का दाना नहीं है। अब आमरण अनशन पर बैठता हूं। प्रशासन ध्यान रखे कि…

उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी और मंच पर विराजित हो गए। उनका एक चहेता समर्थक भी मंच पर बैठ गया जिसे क्षेत्र विशेष के ‘पीने वालों’ के बारे में विशिष्ट जानकारी थी।

समर्थक ने मंच से कहा- भैया दारू वालों ध्यान रख लो, इधर कोई न आए। दारू पीकर आओ तो आना ही मत। नेताजी को बैलेंस तो पीने वालों से भी बैठाना पड़ेगा। वे सजग होते हुए मोबाइल वाले से बोले- अरे यार इसे तो रिकॉर्ड मत करो।

बारां में बीएसएस प्रमुख कार पर खड़े होकर धरना स्थल की ओर बढ़े। उन्होंने किसानों के हक के लिए आमरण अनशन शुरू किया।

बारां में बीएसएस प्रमुख कार पर खड़े होकर धरना स्थल की ओर बढ़े। उन्होंने किसानों के हक के लिए आमरण अनशन शुरू किया।

3. लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव का ऐलान कर दिया। अब गांवों की सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई।

नेतागण के लिए एक-एक वोट अमृत की एक-एक बूंद के बराबर है। किसी की जेब से नोट निकाला जा सकता है, लेकिन मतदाता से वोट निकलवाना टेढ़ी खीर है।

नेतागण यह बात अच्छी तरह जानते हैं। वोट अमूल्य होता है। एक वोट भी प्रत्याशी का भाग्य विधाता बन सकता है। नेताओं को यह याद रखना चाहिए।

कई बार नेताजी ही वोट लेकर लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार कर देते हैं। मतदाता उन्हें चाहता किस खेमे में है और वे अवसर देख पाला बदल बैठते हैं। मतदाता अपने को ठगा सा महसूस करता होगा।

इसके बावजूद एक मतदाता वोट डालने के लिए हजारों मील दूर से भी आ पहुंचता है। लाइन में लगता है। वोट डालता है और समझता है कि वह अपने सेवकों को चुन रहा है।

अगर नेता सेवक के रूप में काम नहीं कर सकते, अगर उन्हें राजा की तरह राज करना है तो उन्हें वोट पाने का अधिकार नहीं है।

बालोतरा में धोरीमन्ना के लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर नजर आई। एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई तहसीलदार साहब को साथ लेकर हेमी देवी के घर पहुंचे। हेमी देवी 101 साल की हैं। घर के अहाते में चारपाई पर बैठी थीं।

अधिकारी जमीन पर बैठे। हेमी देवी को माला पहनाई। वे समझ नहीं पाईं। राम-राम का जवाब भी नहीं दिया। उम्र के कारण सुनने की शक्ति बहुत क्षीण हो गई।

एसडीएम साहब ने ऊंची आवाज में बताया- हेमी देवी, हमें निर्वाचन आयोग ने भेजा है। आपने लोकतंत्र के हर पर्व में निष्ठा से भाग लिया और वोट दिया। इसके लिए आयोग आपका सम्मान करता है।

परिजन ने हेमी देवी को बात रिपीट करके ऊंची आवाज में समझाया कि आपकी वोट डालने की परंपरा का सम्मान किया जा रहा है।

हेमी देवी को अब बूथ पर जाकर वोट डालने की जरूरत नहीं, वे घर बैठे मतदान कर पाएंगी। लोकतंत्र की बुनियाद ऐसे ही मतदाता हैं। नेतागण को भी आकर उनका साधुवाद करना चाहिए।

बालोतरा के धोरीमन्ना में 101 साल की वोटर हेमी देवी को सर्टिफिकेट देकर बात करते एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई (काले चश्मे में)।

बालोतरा के धोरीमन्ना में 101 साल की वोटर हेमी देवी को सर्टिफिकेट देकर बात करते एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई (काले चश्मे में)।

4. चलते-चलते..

जिस प्रकार ‘सैंया के कोतवाल भयने’ से प्रेमिका को ‘डर काहे’ का हो। उसी प्रकार क्षेत्र के विधायक अगर परिवहन मंत्री बन जाएं तो इलाके के ड्राइवरों को डर काहे का हो?

शायद यही वजह है कि दूदू इलाके के फागी में लोकल चलने वाले जीप ड्राइवर निर्भय होकर सड़कों पर चल रहे हैं।

शहद की बूंद पर चींटियों के हुजूम की तरह हिलते-डुलते गुजरती जीप में ड्राइवर को गाड़ी चलाने तक जगह मुश्किल से मिलती है।

वह आधा अंदर होता है और आधा बाहर। अपनी साइड भी एक सवारी मुंह घुमाकर बैठा लेता है। बैक मिरर में पीछे आती गाड़ियां दिखने का सवाल ही नहीं।

वह अंतर्यामी होकर गाड़ी चलाता है। यहां तक कि गियर के जरिए वह यात्री की टांगों को उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में विभाजित कर देता है।

RTO-DTO भी पता नहीं अपनी गाड़ियां किस सुनसान इलाके में छुपाकर रखते हैं। उन्हें बड़े वाहनों को रोकने और दस्तावेज चेक करने में ज्यादा रुचि रहती है।

जब कोई बड़ी घटना घटती है तो अभियान चलाकर गाड़ी की फिटनेस, ड्राइवर की दक्षता, सड़क के ब्लैक स्पॉट सबका हिसाब-किताब कर दिया जाता है।

कम से कम परिवहन मंत्री का लिहाज कर उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में इस तरह लापरवाही नहीं करनी चाहिए। सवारियों को भी मजबूरी का नाम लेकर अपने जीवन से नहीं खेलना चाहिए।

जयपुर के फागी इलाके में लोकल सवारियों के जीवन को जोखिम में डालकर जीपें इस तरह चल रही हैं।

जयपुर के फागी इलाके में लोकल सवारियों के जीवन को जोखिम में डालकर जीपें इस तरह चल रही हैं।

वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।