मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकार ने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में 61,112 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। इनमें से 3,241 लड़कियों का अब तक पता नहीं चल पाया है। वहीं पुलिस ने 61,498 लड़कियों को खोजकर सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया है।
पांच साल में मध्य प्रदेश से 61,112 लड़कियां लापता
- Published: 22 Jul 2026, 10:06 AM IST
- Last Updated: 22 Jul 2026, 10:06 AM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान लड़कियों के लापता होने के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में 61,112 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 3,241 लड़कियों का अब तक पता नहीं चल पाया है, जबकि बड़ी संख्या में लड़कियों को पुलिस ने खोजकर उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया है।
सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार
सरकार की ओर से सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामलों में अपहरण का मामला दर्ज किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे मामलों की जांच गंभीरता और प्राथमिकता के साथ हो तथा किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में 9,407, 2022 में 9,093, 2023 में 11,250, 2024 में 11,907 और 2025 में 13,146 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। इन आंकड़ों से साफ है कि वर्ष 2025 में पिछले पांच वर्षों की तुलना में सबसे अधिक मामले सामने आए।
पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही
हालांकि सरकार ने यह भी बताया कि इसी अवधि में पुलिस ने 61,498 लड़कियों को खोजकर सुरक्षित वापस लाया है। इस संख्या में वे मामले भी शामिल हैं जो पिछले वर्षों से लंबित थे। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 की शुरुआत में 3,627 मामले पहले से लंबित थे, जिन पर भी पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही।
पांच वर्षों के आंकड़े
2021: 9,407
2022: 9,093
2023: 11,250
2024: 11,907
2025: 13,146
कुल (2021-2025): 61,112
सरकार के मुताबिक 2026 में
साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही 6,309 नई लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन सभी मामलों में पुलिस जांच कर रही है और लापता लड़कियों की तलाश जारी है।
लड़कियों की सुरक्षा और गुमशुदगी के बढ़ते मामलों को लेकर विधानसभा में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना। सरकार का कहना है कि पुलिस को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं और लापता बच्चों एवं लड़कियों की तलाश के लिए विशेष अभियान भी लगातार चलाए जा रहे हैं।