Published: Friday, September 18, 2026, 20:05 [IST]
Milan Pradhan Arrested: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार, 18 सितंबर को अचानक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब कुछ घंटे पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस ने इसे 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने मामले से जोड़ा है। आइए जानते हैं कि क्यों हुई गिरफ्तारी...
पहले समझिए पूरा घटनाक्रम
नंदीग्राम उपचुनाव में शुक्रवार को घटनाएं तेजी से बदलीं। ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। ममता ने इसे विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ एकजुटता से जोड़ते हुए कहा कि उनका गुट नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन करेगा। इसके कुछ ही घंटे बाद खबर आई कि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यही वजह है कि गिरफ्तारी ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
Who Is Milan Pradhan: कौन हैं मिलन प्रधान?
मिलन प्रधान पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम के सोनाचुरा इलाके के कांग्रेस नेता हैं। उनका राजनीतिक जुड़ाव नंदीग्राम के उस आंदोलन से रहा है, जिसने 2007 में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़े आंदोलन का रूप लिया था। पुरानी रिपोर्टों में उन्हें भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (BUPC) से जुड़े स्थानीय नेता के तौर पर दर्ज किया गया है। 2007 में वे नंदीग्राम में आंदोलन से जुड़े नेताओं के बीच सक्रिय थे। नवंबर 2007 की एक रिपोर्ट में उन्हें जिला यूथ कांग्रेस नेता और BUPC सदस्य के तौर पर उद्धृत किया गया था। 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिलन प्रधान स्थानीय कांग्रेस नेता थे और नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े रहने के कारण उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित था। उस समय वे पुलिस से बचने के लिए भूमिगत थे।
2007 के नंदीग्राम आंदोलन से क्या रिश्ता?
नंदीग्राम में 2007 में प्रस्तावित केमिकल हब के लिए जमीन अधिग्रहण की योजना के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था। इस दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा में लोगों की मौत हुई। इस आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। ममता बनर्जी और विपक्षी दलों ने उस समय भूमि अधिग्रहण के विरोध को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। आगे चलकर 2011 में 34 साल लंबे वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी सत्ता में आईं। मिलन प्रधान भी उस आंदोलन से जुड़े स्थानीय नेताओं में शामिल रहे। पुरानी रिपोर्टों में उनका नाम BUPC से जुड़े नेताओं में मिलता है।
मिलन प्रधान पर पुराने मुकदमे क्या हैं?
मिलन प्रधान का नाम नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने आपराधिक मामलों में भी सामने आया था। 2021 की रिपोर्टों के मुताबिक, केस नंबर 237 और 697 में कुल 63 लोगों पर आरोप थे। इनमें तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और भाजपा से जुड़े लोग भी शामिल थे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 5 मार्च 2021 को इन मामलों को वापस लेने पर रोक लगाई थी। इसके बाद मामलों को दोबारा खोलने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। मिलन प्रधान उन आरोपियों में शामिल बताए गए थे। 2011 में भी उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित होने की बात रिपोर्ट की गई थी। उस समय वे चुनाव के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपे हुए थे।
हालांकि, 18 सितंबर 2026 की उनकी मौजूदा गिरफ्तारी को सीधे इन्हीं मामलों से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि पुलिस की ओर से इस गिरफ्तारी का सटीक केस नंबर और धाराएं सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई हैं। ताजा रिपोर्टों में इसे पुराने कथित हत्या मामले से जोड़ा गया है।
ममता ने मिलन प्रधान को समर्थन क्यों दिया?
नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट ने पहले संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, नामांकन वापस लेने से पहले संचिता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने चुनाव से हटने का फैसला किया। संचिता के हटने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गुट अब नंदीग्राम में कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस के मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। उन्होंने इसे INDIA गठबंधन के साथ एकजुटता से जोड़ा। इसके बाद कुछ ही घंटों में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आई।
गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से इसे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया और आरोप लगाया गया कि ममता बनर्जी के समर्थन की घोषणा के तुरंत बाद उम्मीदवार की गिरफ्तारी महज संयोग नहीं है। हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। गिरफ्तारी की वास्तविक कानूनी वजह और मामले की स्थिति पुलिस तथा अदालत के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
नंदीग्राम उपचुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। कांग्रेस ने मिलन प्रधान को अपना उम्मीदवार बनाया था। यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भबानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़कर भबानीपुर अपने पास रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
TMC के बंटवारे से कैसे जुड़ा है मामला?
नंदीग्राम उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के संगठन, नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। 18 सितंबर को चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को नया नाम और नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया। इसी घटनाक्रम के बाद उनके गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।