46 मिनट पहले
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अनूप कुमार साहा, जो 1 जनवरी 2027 से बैंक की कमान संभालेंगे।
कोटक महिंद्रा बैंक ने गुरुवार को अनूप कुमार साहा को नया मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्त किया। उनका कार्यकाल 3 साल का होगा। साहा 1 जनवरी 2027 से यह पद संभालेंगे।
वह अभी बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर हैं। साहा के पास 32 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें 25 साल का अनुभव बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में है।
साहा की नियुक्ति से शेयर 4% चढ़ा
अनूप कुमार साहा को कोटक महिंद्रा बैंक का नया MD & CEO बनाने की मंजूरी के बाद बैंक के शेयरों में 4% तक की तेजी है। ये ₹433 के करीब पहुंच गया है। ब्रोक्रेज फर्म्स ने साहा की नियुक्ति को बैंक के लिए सकारात्मक कदम बताया है।
जनवरी 2026 में कोटक बैंक से जुड़े थे
अनूप कुमार साहा जनवरी 2026 में कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े थे। मार्च 2026 से डायरेक्टर की भूमिका में वह बैंक के पूरे रिटेल बैंक, सरकारी कारोबार, डेटा एनालिटिक्स और मार्केटिंग का काम संभाल रहे थे।

एमडी वासवानी बोले- अनूप में बैंक को आगे ले जाने का दम
मौजूदा MD और CEO अशोक वासवानी ने कहा कि अनूप फाइनेंशियल सेक्टर के एक अनुभवी लीडर हैं, जिन्हें अलग-अलग बिजनेस, ग्राहकों और कामकाज का गहरा अनुभव है। कोटक से जुड़ने के बाद से उन्होंने हमारी टीमों के साथ मिलकर काम किया है और आने वाले मौकों की अच्छी समझ दिखाई है।
मुझे पूरा भरोसा है कि अनूप कोटक की मजबूत नींव को आगे बढ़ाएंगे, ग्राहकों से रिश्ते मजबूत करेंगे और बैंक को पूरी लगन व अनुशासन के साथ आगे ले जाएंगे। मैं उन्हें भविष्य की सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।
लॉयल्टी नहीं, बिजनेस प्लान के आधार पर नियुक्तियां
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अब लीडरशिप चुनने का तरीका बदल चुका है। नियोस्ट्रेट एडवाइजर्स के फाउंडर अबीजर दीवानजी के अनुसार, बैंकों में CEO की नियुक्ति अब वफादारी के बजाय मजबूत बिजनेस प्लान और काम पूरा करने की क्षमता देखकर की जा रही है।
वर्तमान MD अशोक वासवानी ने साबित किया था कि बैंक फाउंडर उदय कोटक के बिना भी बेहतर चल सकता है। अब बोर्ड ने अनूप साहा को चुनकर यह साफ कर दिया है कि बैंक का मुख्य फोकस रिटेल बैंकिंग का विस्तार करने और फैसलों को तेजी से लागू करने पर है।
साहा के सामने 3 बड़ी चुनौतियां होंगी
- डिपॉजिट जुटाना: लोग अब FD के बजाय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। ऐसे में बैंक में नया डिपॉजिट जुटाना चुनौती होगी।
- अनसिक्योर्ड लोन: रिजर्व बैंक पर्सनल लोन जैसे बिना गारंटी वाले कर्ज पर सख्त है। साहा को बैंक की ग्रोथ और सरकारी नियमों के बीच तालमेल बिठाना होगा।
- कम होता मार्जिन: जमा पैसों पर ज्यादा ब्याज देने और ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से बैंक के मुनाफे पर दबाव बन रहा है। इससे निपटना चुनौती होगी।
HDFC जैसे अन्य बैंकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोटक बैंक का यह कदम HDFC बैंक जैसे अन्य बैंकों के लिए भी एक इशारा है, जहां आगे चलकर नए CEO की तलाश होगी।
आने वाले समय में सभी बैंकों को दो चीजों पर एक साथ ध्यान देना होगा। पहला अपना मुनाफा (NIM) बढ़ाना और दूसरा तेजी से नए डिपॉजिट हासिल करना।
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