Updated On: Jul 13, 2026 | 04:03 PM IST
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सार
MBMC Development Plan: मीरा-भाईंदर की नई विकास योजना में बेघरों के लिए आरक्षित 800 करोड़ रुपये की भूमि को रिहायशी घोषित करने और सार्वजनिक भूखंडों में बदलाव पर सर्वदलीय विरोध हुआ।

मीरा भाईंदर विकास योजना (सोर्स: AI)
विस्तार
MBMC Development Plan Controversy In Thane: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (एमबीएमसी) की नई विकास योजना (डेवलपमेंट प्लान-डीपी) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि बेघरों के लिए आरक्षित लगभग 800 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को आवासीय क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया गया है, जिससे निजी डेवलपरों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है।
इसके अलावा संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को भी आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित किए जाने पर पर्यावरणविदों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में प्रकाशित विकास योजना के शेष भाग पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने के लिए आयोजित विशेष महासभा में सभी दलों के पार्षदों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
उनका आरोप था कि पार्क, स्कूल, अस्पताल, श्मशान, पुलिस स्टेशन, साप्ताहिक बाजार, पार्किंग, कंदलवन पार्क और झीलों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित कई भूखंडों का स्वरूप बदलकर उन्हें आवासीय क्षेत्र घोषित किया गया है।
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क्या है आरोप?
महासभा के दौरान भाईंदर पूर्व स्थित नवघर की निजी भूमि का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा। पार्षदों ने बताया कि यह भूखंड मूल रूप से बेघरों के लिए आवास निर्माण हेतु आरक्षित था, लेकिन नई विकास योजना में इसका आरक्षण हटाकर इसे सामान्य आवासीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया।
नियमों के अनुसार यदि किसी निजी भूमि पर सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षण रहता है, तो विकास के समय डेवलपर को कुल भूमि का 40% हिस्सा महानगरपालिका को देना अनिवार्य होता है।
आरोप है कि आरक्षण हटाए जाने से मीरा-भाईंदर मनपा को मिलने वाली लगभग 800 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि का नुकसान होगा, जबकि संबंधित डेवलपर को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। जनप्रतिनिधियों ने इसे सार्वजनिक हित के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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क्या हैं इनकी मांगें?
महासभा में उपस्थित सभी दलों के पार्षदों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की कि नई विकास योजना में बदले गए सभी सार्वजनिक आरक्षित भूखंडों का मूल स्वरूप बहाल किया जाए। उनका कहना था कि शहर के संतुलित विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पार्क, अस्पताल, स्कूल, झील और अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार के बदलाव लागू किए गए तो भविष्य में शहर को गंभीर पर्यावरणीय और आधारभूत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। महासभा का प्रस्ताव अब कोंकण संभागीय आयुक्त को भेजा जाएगा, जहां आपत्तियों और सुझावों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा विकास योजना में किए गए सभी विवादित संशोधनों की समीक्षा कर मूल आरक्षण बहाल किया जाए।
