सिर्फ MBBS नहीं, वर्दी का भी रुतबा! सेना में डॉक्टर बनने के लिए कौन-सा एग्जाम देना होगा? देखें पूरी डिटेल

Published on 5 अक्टू॰ 2026

Time Published: Monday, October 5, 2026, 14:35 [IST]

How to Become a Doctor in the Indian Army: सफेद कोट पहनकर मरीजों का इलाज करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन जब इसी सफेद कोट के साथ सेना की वर्दी भी जुड़ जाए तो भूमिका और खास हो जाती है। भारतीय सेना के डॉक्टर सिर्फ मिलिट्री अस्पतालों में ही सेवाएं नहीं देते, जरूरत पड़ने पर उन्हें कठिन इलाकों और फील्ड यूनिट्स में भी काम करना पड़ता है।

सैनिकों और उनके परिवारों को मेडिकल सुविधा देने में Armed Forces Medical Services (AFMS) की अहम भूमिका होती है। ऐसे में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले कई छात्रों के मन में सवाल होता है कि सेना में डॉक्टर बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होगी, कौन-सी परीक्षा पास करनी पड़ेगी और चयन कैसे होगा? इसका एक प्रमुख रास्ता पुणे स्थित Armed Forces Medical College (AFMC) से होकर जाता है।

Indian Army Doctor

12वीं के बाद शुरू होगा सफर

सेना में डॉक्टर बनने की तैयारी स्कूल से ही शुरू हो जाती है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए छात्र का 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी जैसे जरूरी विषयों के साथ पढ़ना आवश्यक है। AFMC में MBBS एडमिशन के लिए तय शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होती है। इसमें 12वीं के अंकों से जुड़ी न्यूनतम शर्तें भी लागू होती हैं। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित वर्ष का आधिकारिक एडमिशन नोटिफिकेशन जरूर देखना चाहिए।

ये भी पढ़ें: NEET UG राउंड-3 का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, जानें MBBS और BDS की कैटेगरी वाइज कटऑफ

NEET UG है सबसे जरूरी पड़ाव

12वीं के बाद उम्मीदवार को NEET UG में शामिल होना पड़ता है। AFMC में MBBS एडमिशन के लिए NEET UG स्कोर बेहद अहम है। NEET के प्रदर्शन के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। केवल NEET पास कर लेने से ही AFMC में सीट पक्की नहीं होती।

NEET के बाद भी देना होगा टेस्ट

शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को AFMC की आगे की स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें अंग्रेजी और लॉजिक से जुड़ा कंप्यूटर आधारित टेस्ट ToELR, इंटरव्यू और मेडिकल फिटनेस जैसे चरण शामिल हो सकते हैं। इन सभी चरणों में प्रदर्शन और लागू एडमिशन नियमों के आधार पर अंतिम चयन किया जाता है।

डॉक्टर के साथ मिलती है सैन्य ट्रेनिंग

AFMC में एडमिशन मिलने के बाद छात्र MBBS की पढ़ाई करते हैं। मेडिकल पढ़ाई के साथ उन्हें सैन्य जीवन, अनुशासन और सेवा से जुड़ी ट्रेनिंग से भी परिचित कराया जाता है। पढ़ाई और जरूरी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद तय नियमों के अनुसार डॉक्टर Armed Forces Medical Services के जरिए भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में सेवा दे सकते हैं। कमीशन मिलने पर वे सैन्य अधिकारी के रूप में काम करते हैं।

कहां होती है आर्मी डॉक्टर की पोस्टिंग?

सेना के डॉक्टरों की पोस्टिंग केवल बड़े शहरों के अस्पतालों तक सीमित नहीं होती। उन्हें देश के अलग-अलग मिलिट्री हॉस्पिटल, कमांड हॉस्पिटल, फील्ड यूनिट और जरूरत के अनुसार दूर-दराज के इलाकों में तैनात किया जा सकता है। यानी डॉक्टर को अस्पताल के आरामदायक माहौल से लेकर कठिन सैन्य क्षेत्रों तक में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहना पड़ता है।

कितनी मिलती है सैलरी?

सेना के डॉक्टर को उसकी रैंक और सेवा के नियमों के अनुसार वेतन मिलता है। बेसिक पे के साथ लागू होने पर मिलिट्री सर्विस पे और दूसरे भत्ते भी मिल सकते हैं। पोस्टिंग और सेवा की स्थिति के आधार पर आवास, चिकित्सा, कैंटीन और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं। कठिन या विशेष क्षेत्रों में तैनाती के आधार पर कुछ अतिरिक्त भत्ते लागू हो सकते हैं।

समय और अनुभव के साथ डॉक्टर को आगे की रैंक पर प्रमोशन के अवसर भी मिलते हैं, जिससे वेतन और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ती हैं।

कब होता है रिटायरमेंट?

सेना के डॉक्टर की रिटायरमेंट उम्र एक ही नहीं होती। यह उसकी रैंक, सेवा के प्रकार और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करती है। कई मामलों में सेवा करीब 58 से 60 वर्ष या उससे आगे तक हो सकती है।

योग्य सैन्य डॉक्टरों को नियमों के अनुसार पेंशन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली चिकित्सा तथा पूर्व सैनिकों से जुड़ी दूसरी सुविधाओं का लाभ भी मिल सकता है। सेना में डॉक्टर का करियर इस मायने में अलग है कि यहां मेडिकल प्रोफेशन के साथ सैन्य सेवा और कठिन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

ये भी पढ़ें: NEET PG का पर्सनल स्कोरकार्ड जारी, काउंसलिंग में क्यों जरूरी है यह डॉक्यूमेंट, natboard.edu.in से करें डाउनलोड