Matra Navami 2026: पितृपक्ष में नवमी तिथि पर घर की दिवंगत माता पितरों का श्राद्ध किया जाता है. इस दिन उन महिलाओं का श्राद्ध करना होता है, जिनकी मृत्यु सुहागिन होते हुए हुई हो. उनका पिंडदान करने के लिए कुतूप मुहूर्त क्या होगा.
Published byNamrata Mohanty
Matra Navami 2026: पितृपक्ष में नवमी तिथि पर घर की दिवंगत माता पितरों का श्राद्ध किया जाता है. इस दिन उन महिलाओं का श्राद्ध करना होता है, जिनकी मृत्यु सुहागिन होते हुए हुई हो. उनका पिंडदान करने के लिए कुतूप मुहूर्त क्या होगा.
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Matra Navami 2026 Photograph: (ai-generated)
Matra Navami 2026: आज यानी 4 अक्टूबर 2026 को मातृ नवमी मनाई जा रही है. पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा होती है. मान्यता है कि इस दौरान पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. पितृपक्ष में महिलाओं के श्राद्ध को लेकर भी एक खास तिथि बताई जाती है. यह तिथि मातृ नवमी की होती है, जो कि आज है. आज के दिन उन दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु उनके पति के जीवित रहते हुए होती है.
मातृ नवमी का महत्व
मातृ नवमी के दिन घर की दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है. अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि इन स्त्रियों का श्राद्ध किस दिन किया जाना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में नवमी तिथि पर घर की दिवंगत महिलाओं का तर्पण और पिंडदान करना शुभ होता है. इस दिन माता, नानी-दादी और अन्य महिला पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है.
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मातृ नवमी 2026 में श्राद्ध का समय
पितृ पक्ष के समय में तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन आदि जैसे कार्य दोपहर के समय करवाएं जाते हैं. उस समय ही कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त भी होते हैं.
- कुतुप मुहूर्त- दोपहर में 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
- रौहिण मुहूर्त- दोपहर में 12 बजकर 33 मिनट से दोपहर 01 बजकर 20 मिनट तक
- अपराह्न काल- दोपहर 01:20 मिनट से दोपहर 3 बजकर 42 मिनट तक
मातृ नवमी पर कैसे करें श्राद्ध?
मातृ नवमी के दिन मातृ पक्ष के पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. इस दिन सबसे पहले विधि-विधान से दिवंगत महिला पितरों का तर्पण किया जाता है. इसके लिए कुशा, जल और काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है. श्रद्धापूर्वक तर्पण करते हुए अपने मातृ पक्ष के दिवंगत परिजनों का स्मरण करना चाहिए.
पंचबलि कर्म
- तर्पण के बाद पंचबलि कर्म किया जाता है. इसके लिए घर पर ही सात्विक भोजन तैयार किया जाता है और भोजन का एक हिस्सा अलग निकालकर गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों आदि के लिए अर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पंचबलि के माध्यम से अन्न पितरों तक पहुंचता है. इसलिए मातृ नवमी के श्राद्ध में इस कर्म का विशेष महत्व माना जाता है.
- पंचबलि के बाद किसी सुहागन महिला को घर पर आमंत्रित कर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराने की परंपरा है. उनके लिए घर पर सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें खीर, पूड़ी, सब्जी और अन्य पकवान शामिल किए जा सकते हैं. यदि घर पर सुहागन महिला को भोजन कराना संभव न हो, तो किसी ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जा सकता है.
- भोजन कराने के बाद सुहागन महिला को सुहाग सामग्री का दान किया जाता है. इसमें साड़ी, चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम आदि सामग्री रखी जाती है. इसके साथ अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है. मान्यता है कि मातृ नवमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से मातृ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)