Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जरूर करें ये उपाय

Published on 18 अग॰ 2026

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जरूर करें ये उपाय

मंगला गौरी व्रत 2026Image Credit source: pexels

Mangla Gauri Vrat ke Upay: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा पाने का सबसे सही समय माना जाता है. जहां सावन के सोमवार भगवान शिव को प्रिय हैं, वहीं सावन के मंगलवार माता पार्वती को समर्पित होते हैं. सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. इस बार सावन मास का तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026 यानी आज रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है, वैवाहिक जीवन में आ रही दूरियां समाप्त होती हैं और दांपत्य जीवन प्रेम व मिठास से भर जाता है.

सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है मंगला गौरी व्रत

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. सावन में पड़ने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है और सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसलिए मंगला गौरी व्रत को अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख से जोड़कर देखा जाता है. अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस दिन माता गौरी की पूजा कर सकती हैं.

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करें ये उपाय

मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान माता को सिंदूर, लाल चुनरी, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और कुमकुम जैसी सुहाग सामग्री अर्पित करें. इसके बाद पति की लंबी उम्र और अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें.

माता गौरी को लाल फूल चढ़ाएं

माता पार्वती को लाल रंग प्रिय माना जाता है. ऐसे में मंगला गौरी की पूजा के दौरान लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. पूजा में गुड़, फल और मिठाई का भोग भी लगाया जा सकता है. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई पूजा से माता गौरी प्रसन्न होती हैं और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने का आशीर्वाद देती हैं.

पति-पत्नी मिलकर करें शिव-पार्वती की पूजा

अगर संभव हो तो मंगला गौरी व्रत के दिन पति-पत्नी को साथ बैठकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद माता पार्वती की पूजा करें. इसके बाद दोनों मिलकर सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं.

पति की लंबी उम्र के लिए करें यह काम

इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति के नाम से माता गौरी के सामने दीपक जलाएं और उनकी लंबी उम्र की कामना करें. इसके साथ ही जरूरतमंद सुहागिन महिला को सुहाग की सामग्री का दान करना भी शुभ माना जाता है.

मंगला गौरी व्रत का महत्व

मंगला गौरी व्रत को लेकर धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का विशेष महत्व होने के कारण यह व्रत दांपत्य जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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