Malnutrition in India: भारत का हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार! राजस्थान में 30 लाख बच्चों की हालत चिंताजनक

Published on 10 सित॰ 2026

Malnutrition in India: कुपोषण के खिलाफ जंग पूरी दुनिया में लड़ी जा रही है. कई देश इसकी चपेट में है, जिसमें भारत भी शामिल है. मैलन्यूट्रिशन के खिलाफ जंग के बीच देश में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. देश में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर पोषण ट्रैकर के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. देशभर में 0 से 5 साल तक के 6,69,92,507 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. इनमें 11% बच्चे अंडरवेट, 5% ओवरवेट, 28% बच्चों का शारीरिक विकास आयु अनुसार, गंभीर रूप से अवरुद्ध और 3% बच्चे गंभीर या मध्यम कुपोषण की श्रेणी में थे.

देश के बच्चों के सामने सिर्फ कम वजन की समस्या नहीं है बल्कि उनके शारीरिक विकास और पोषण से जुड़ी कई चुनौतियां भी है. खास बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में स्थिति एक सी नहीं है. राजस्थान में, मध्यप्रदेश में, छत्तीसगढ़ के आंकड़ों की तुलना करें तो MP में बच्चों का वेट कम के आंकड़े सबसे अधिक पाए गए हैं.

मध्यप्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा

मध्यप्रदेश में कुल 51,05,885 बच्चों का हेल्थ चेकअप किय गया. इनमें 22% बच्चे अंडरवेट थे. यानी जांच किए गए करीब हर 5 बच्चों में से एक बच्चा अपनी उम्र और शरीर के हिसाब से कम वजन का है. मध्यप्रदेश में 4 फीसदी बच्चे over weight पाए गए, जबकि 39% बच्चों में स्टंटिंग की समस्या पाई गई. वहीं, 7 फीसदी बच्चे वेस्टिंग की श्रेणी रहे. तीनों राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है. राजस्थान और छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 12-12 प्रतिशत है, जबकि मध्यप्रदेश में 22% है. ऐसे में मध्यप्रदेश का आंकड़ा इन दोनों राज्यों के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा है. स्टंटिंग के मामले में भी मध्यप्रदेश 39 फीसदी के साथ सबसे ज्यादा है. इससे पता लगता है कि यहां बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनकी उम्र के अनुसार, शारीरिक विकास को लेकर भी चुनौती बनी चुकी है.

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राजस्थान में 30 लाख बच्चों की हुई जांच

राजस्थान में जुलाई 2026 तक करीब 30, 29,160 बच्चों का हेल्थ चेकअप करवाया गया था. इनमें से 12% बच्चे अंडरवेट पाए गए थे. वहीं, 7 फीसदी बच्चे ओवरवेट थे. राजस्थान में 27 फीसदी बच्चों का शारीरिक विकास उम्र के हिसाब से कम पाया गया, जबकि 4 फीसदी बच्चे वेस्टिंग की कैटेगरी में रहे हैं. जिलों के आंकड़ों को देखें तो बच्चों के कम वेट की समस्या कुछ जिलों में बहुत अधिक पाई गई थी. झालावाड़ में 25% अंडरवेट बच्चों के साथ सबसे ऊपर है. इसके बाद सलूम्बर में 24%, डूंगरपुर में 23 फीसदी, प्रतापगढ़ में 21% और टोंक-बूंदी में 20 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट मिले हैं. इसका अर्थ स्पष्ट रूप यही है कि हर पांचवा बच्चा कुपोषित है.

वहीं, ओवरवेट बच्चों का आंकड़ा देखे तो कुछ जिलों की स्थिति चिंताजनक थी. जालोर में 19% बच्चे ओवरवेट थे, जो राज्य का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके बाद बाड़मेर में 13%, बांसवाड़ा में 12 फीसदी और डीग और डीडवाना-कुचामन में 11-11 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट मिले हैं.

राजस्थान में 40 लाख से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण

न्यूट्रिशन से जुड़ी योजना-परियोजनाओं के अंतर्गत राजस्थान में जुलाई 2026 तक 40,68,765 पात्र लाभार्थी हैं. पंजीकृत लाभार्थियों में 0 से 6 साल तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां शामिल हैं. इनमें 6 महीने से 3 साल तक के 17,57,943 बच्चे हैं और 3 से 6 साल तक के 13,40,599 बच्चे हैं.

छत्तीसगढ़ में 12% अंडरवेट

इस राज्य में जुलाई 2026 तक 17,29,273 बच्चों का हेल्थ चेकअप हुआ है. इनमें से 12% बच्चे अंडरवेट हैं जबकि सिर्फ 1 बच्चा ही ओवरवेट मिला है. राज्य में करीब 22 प्रतिशत बच्चों में स्टंटिंग और 6 फीसदी बच्चे वेस्टिंग की श्रेणी में पाए गए हैं. छत्तीसगढ़ में ओवरवेट बच्चों का आंकड़ा अन्य दो राज्यों की तुलना में बहुत कम है. मगर वेस्टिंग के मामले में यहां के हालात स्थिति से बाहर है. यहां 6 प्रतिशत बच्चे वेस्टिंग कैटेगरी मे हैं.

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