Maharishi Valmiki Jayanti 2026: अक्टूबर में इस दिन मनाई जाएगी महर्षि वाल्मीकि जयंती, जानें पूजा का समय और विधि

Published on 19 अक्टू॰ 2026

Maharishi Valmiki Jayanti 2026: अक्टूबर में इस दिन मनाई जाएगी महर्षि वाल्मीकि जयंती, जानें पूजा का समय और विधि

महर्षि वाल्मीकि जयंती 2026

Valmiki Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में महर्षि वाल्मीकि जयंती के पर्व को हर साल लोग बहुत श्रद्धा के साथ मनाते हैं. इस साल महर्षि वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर, सोमवार के दिन मनाई जाएगी. इस विशेष पर्व से जुड़ी तिथि और सही समय की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है. जीवन में ज्ञान और अच्छे मार्ग की प्राप्ति के लिए इस दिन को बहुत खास माना गया है. महर्षि वाल्मीकि का आशीर्वाद पाने वाले सभी लोगों को पूजा और समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन नियमों का पालन करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है. इस विशेष दिन का धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत अधिक महत्व माना गया है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस वर्ष महर्षि वाल्मीकि जयंती कब है और पूजा का शुभ समय क्या रहेगा.

महर्षि वाल्मीकि जयंती की तिथि और दिन का महत्व

पंचांग और मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष महर्षि वाल्मीकि जयंती सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 के दिन बहुत ही धूमधाम से मनाई जाएगी. यह पवित्र दिन आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके महान कार्यों को याद करने का सबसे बड़ा अवसर होता है. इस दिन देश भर में उनके अनुयायी विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. सही तिथि पर पर्व मनाने से समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलता है और लोगों को अच्छे विचार मिलते हैं. जो लोग इस पावन दिन पर महर्षि वाल्मीकि का स्मरण करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता हमेशा बनी रहती है. इसलिए सभी को इस खास दिन की सही तारीख और उसके महत्व की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि वे बिना किसी भ्रम के इस पावन पर्व को सही तरीके से मना सकें.

पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समाप्त होने का समय

धार्मिक आयोजनों के लिए पंचांग की तिथियों का सही ज्ञान होना बेहद जरूरी होता है ताकि समय पर सारे कार्य पूरे किए जा सकें. इस वर्ष पूर्णिमा तिथि का आरंभ 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे से होगा. इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 09:41 बजे समाप्त हो जाएगी. इन तय समय के अनुसार ही इस पर्व से जुड़े सभी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ संपन्न किए जाते हैं. सही समय पर की गई पूजा का फल हमेशा उत्तम प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति का वास रहता है. जो लोग इन निर्धारित समय और तिथियों का पूरा ध्यान रखते हैं, उन्हें पूजा का पूर्ण लाभ मिलता है और जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है तथा हर कार्य सफल होता है.

महर्षि वाल्मीकि जयंती की विधि

महर्षि वाल्मीकि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनकर पूजा की पूरी तैयारी करनी चाहिए. इस पावन अवसर पर पूजा का शुभ समय पूर्णिमा तिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखकर तय किया जाता है ताकि सभी भक्त विधि-विधान से पूजन कर सकें. इस दिन महर्षि वाल्मीकि के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाकर उनकी स्तुति की जाती है और उनके उपदेशों को याद किया जाता है. जो लोग पूरी निष्ठा और श्रद्धा भाव से इस दिन पूजा करते हैं, उन्हें ज्ञान और अच्छे आचरण का वरदान प्राप्त होता है. इस प्रकार से इस पवित्र पर्व को मनाने से परिवार में सदा खुशहाली बनी रहती है और आपसी प्रेम व सम्मान की भावना हमेशा मजबूत होती है तथा जीवन खुशहाल रहता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. .

दिव्या गौतम

दिव्या गौतम

दिव्या एक रचनात्मक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि वाली लेखक हैं, जो ज्योतिष, जीवनशैली और आत्म-ज्ञान से जुड़ी सामग्री लिखती हैं. इनके पास 3 साल 10 महीने का अनुभव है, जिसमें इन्होंने 2022 में इंडिया न्यूज़ डिजिटल के साथ बतौर लेखक काम करना शुरू किया था. दिव्या की लेखनी सरल, भावनात्मक और रोचक होती है, जो सीधे पाठक के हृदय तक पहुंचती है और जीवन के छोटे-छोटे रहस्यों, ज्योतिषीय सिद्धांतों और रोचक ज्ञान से परिचित कराती है. उनका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि पाठकों को आध्यात्मिक समझ, आत्म-ज्ञान से जोड़ना है. दिव्या का लेखन हर पाठक को उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है.

Read More

google button