सावन और भादौ में महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब जिन भक्तों को संध्या या शयन आरती की बुकिंग नहीं मिलेगी, वे भी कार्तिक मंडपम से चलित रूप में आरती के दर्शन कर सकेंगे। टिकट और प्रोटोकॉल वाली पुरानी व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
सावन और भादौ में महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था लागू
- Published: 14 Jul 2026, 09:55 AM IST
- Last Updated: 14 Jul 2026, 09:55 AM IST
उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन और भादौ माह के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने संध्या आरती और शयन आरती की दर्शन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब जिन श्रद्धालुओं को आरती की बुकिंग नहीं मिल पाएगी, वे भी कार्तिक मंडपम से चलित रूप में आरती के दर्शन कर सकेंगे।
बिना बुकिंग के भी आरती दर्शन कर सकेंगे
अब तक मंदिर में संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए पहले से बुकिंग कराना अनिवार्य था। प्रतिदिन करीब 1200 श्रद्धालुओं को टिकट और निर्धारित प्रक्रिया के तहत गणेश मंडपम में बैठकर पूरी आरती देखने की अनुमति मिलती थी। सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती के दर्शन से वंचित रह जाते थे।
सावन और भादौ में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए म क्षकार्तिक मंडपम को अधिकतमता के साथ श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना बुकिंग के भी संध्या और शयन आरती का चलित दर्शन कर सकेंगे।
अधिक श्रद्धालुओं आरती दर्शन का फैसला
महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक ने बताया कि सावन के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। अधिकांश भक्तों की इच्छा रहती है कि उन्हें संध्या आरती और शयन आरती का भी लाभ मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्तिक मंडपम को पूरी तरह खाली रखने और वहां से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को आरती दर्शन कराने का फैसला लिया गया है।
भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन
उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट आधारित और प्रोटोकॉल के तहत संचालित व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से बुकिंग कराई है, उन्हें पहले की तरह गणेश मंडपम में बैठकर आरती देखने की सुविधा मिलती रहेगी। नई व्यवस्था केवल उन श्रद्धालुओं के लिए है जिन्हें बुकिंग नहीं मिल पाती।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से सावन और भादौ के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। साथ ही अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल की संध्या और शयन आरती के दर्शन का लाभ उठा सकेंगे। नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ने के साथ मंदिर में दर्शन व्यवस्था भी पहले की तुलना में अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।