Lord Ram and Jayant Katha: भगवान राम और माता सीता से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं मिलती हैं. इन कथाओं में श्रीराम के जीवन, उनके पराक्रम और माता सीता के प्रति उनके प्रेम और सम्मान का वर्णन मिलता है. इन्हीं में से एक कथा इंद्रदेव के पुत्र जयंत और श्रीराम से जुड़ी है. धार्मिक मान्यता है कि जयंत ने एक बार श्रीराम की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए ऐसा रूप धारण किया, जिससे माता सीता को चोट पहुंची.
ऐसा कहा जाता है कि माता सीता के पैरों से रक्त बहता देख भगवान श्रीराम अत्यंत क्रोधित हो गए थे. उन्होंने जयंत के पीछे ऐसा अस्त्र छोड़ दिया, जिससे बचने के लिए वह तीनों लोकों में भटकता रहा. आखिरकार उसे श्रीराम के सामने ही शरण लेनी पड़ी. आइए पढ़ते हैं श्रीराम और जयंत से जुड़ी ये पूरी कथा.
जयंत ने धारण किया कौवे का रूप
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इंद्रदेव के पुत्र जयंत ने श्रीराम की शक्ति की परीक्षा लेने का विचार किया. इसके लिए उसने कौवे का रूप धारण किया. उस समय श्रीराम और माता सीता एक स्थान पर बैठे हुए थे. जयंत कौवे के रूप में वहां पहुंचा और माता सीता के पैरों पर अपनी चोंच से वार कर दिया. बताया जाता है कि जयंत के वार से माता सीता के पैर में चोट लग गई और वहां से रक्त बहने लगा. माता सीता को इस तरह घायल देखकर भगवान श्रीराम अत्यंत क्रोधित हो गए.
श्रीराम ने कौवे पर छोड़ दिया ब्रह्मास्त्र
कथा के अनुसार, श्रीराम ने जयंत को सबक सिखाने के लिए एक तिनका उठाया और उसमें ब्रह्मास्त्र का प्रभाव स्थापित कर दिया. इसके बाद उन्होंने उस अस्त्र को कौवे बने जयंत के पीछे छोड़ दिया. ब्रह्मास्त्र का पीछा करते देखकर जयंत घबरा गया. वह उससे बचने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा. उसने देवताओं और अन्य शक्तियों से भी सहायता मांगने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे उस अस्त्र से बचाने के लिए तैयार नहीं हुआ.
श्रीराम की शरण में पहुंचा जयंत
जब जयंत को कहीं भी शरण नहीं मिली, तो उसे समझ आया कि अब उसके पास श्रीराम की शरण में जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. आखिरकार वह वापस श्रीराम के पास पहुंचा और उनके चरणों में गिरकर अपने किए की माफी मांगने लगा. जयंत ने अपनी गलती स्वीकार की और श्रीराम से प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की. श्रीराम ने उसकी गलती के लिए उसे क्षमा तो कर दिया, लेकिन ब्रह्मास्त्र का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता था.
दाहिनी आंख पर पड़ा ब्रह्मास्त्र का प्रभाव
मान्यता के अनुसार, श्रीराम ने ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को जयंत की दाहिनी आंख पर डाल दिया. इससे उसकी एक आंख हमेशा के लिए खराब हो गई. इस तरह जयंत को अपने किए की सजा भी मिली और श्रीराम ने उसे जीवनदान भी दे दिया.
पितृपक्ष में कौवे को भोजन कराने की मान्यता
इस कथा से जुड़ी एक अन्य मान्यता पितृपक्ष में कौवे को भोजन कराने से संबंधित है. मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान कौवे को भोजन कराने से पितरों की तृप्ति होती है. यही वजह है कि पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण के बाद कौवे को भोजन कराने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी
सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.
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