
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के रेपो रेट में बढ़ोतरी के फैसले के बाद बैंकों की लोन ब्याज दरों में भी बदलाव देखने को मिला है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) और UCO बैंक समेत कई बैंकों ने अपनी अलग-अलग बेंचमार्क लेंडिंग दरों में बढ़ोतरी की है। इसका असर रेपो-लिंक्ड दरों पर होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है।
रेपो रेट बढ़ने से लोन पर क्या पड़ेगा असर?
दी गई जानकारी के मुताबिक, RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। रेपो रेट वह दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बदलाव होने पर रेपो-लिंक्ड लोन की ब्याज दरें भी प्रभावित हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक के लोन की ब्याज दर 7.50 फीसदी से बढ़कर 7.75 फीसदी हो जाती है, तो उसकी EMI बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर लोन की बकाया राशि, शेष अवधि, ब्याज दर के प्रकार और बैंक की शर्तों पर निर्भर करेगा। कुछ मामलों में EMI के बजाय लोन चुकाने की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा की दरों में बढ़ोतरी
बैंकों की ओर से जारी दरों के विवरण के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) 8.10 फीसदी से बढ़ाकर 8.35 फीसदी कर दी है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट बढ़ाकर 8.15 फीसदी कर दी है।
इंडियन बैंक ने अपनी रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट 7.95 फीसदी से बढ़ाकर 8.20 फीसदी कर दी है। यह बदलाव 8 अक्टूबर से लागू बताया गया है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी अपनी संबंधित दर 8.10 फीसदी से बढ़ाकर 8.35 फीसदी कर दी है।
UCO बैंक ने भी बदलीं लेंडिंग दरें
UCO बैंक ने अलग-अलग अवधि के ट्रेजरी बिल से जुड़ी लेंडिंग दरों (TBLR) में बदलाव किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नई दरें इस प्रकार हैं:
दर का प्रकार पुरानी दर नई दर
3 महीने की TBLR 5.25% 5.30%
6 महीने की TBLR 5.55% 5.70%
12 महीने की TBLR 5.70% 5.95%
इन बदलावों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 12 महीने की TBLR में हुई है, जो 25 बेसिस पॉइंट बढ़ी है। इन दरों का असर संबंधित बेंचमार्क से जुड़े लोन पर पड़ सकता है।
सरकारी सिक्योरिटीज से जुड़ी दरें भी बढ़ीं
UCO बैंक ने सरकारी सिक्योरिटीज (G-sec) से संबंधित दरों में भी बदलाव किया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक साल की G-sec दर 5.88 फीसदी से बढ़ाकर 6.26 फीसदी और 10 साल की G-sec यील्ड 7.09 फीसदी से बढ़ाकर 7.32 फीसदी कर दी गई है।
इसके अलावा, UCO Float की रेपो-लिंक्ड दर 8.05 फीसदी से बढ़ाकर 8.30 फीसदी और UCO Prime की दर 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी किए जाने की जानकारी दी गई है।
लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ब्याज दरों में बदलाव के बीच ग्राहकों को नया लोन लेने या पुराने लोन की EMI का आकलन करते समय कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए:
• बेंचमार्क चेक करें: पता करें कि आपका लोन रेपो रेट, TBLR या किसी अन्य दर से जुड़ा है।
• नई EMI की गणना करें: ब्याज दर में बदलाव के बाद बैंक से संशोधित EMI और कुल ब्याज की जानकारी लें।
• लोन की शर्तें समझें: ब्याज दर बदलने पर EMI बढ़ेगी या लोन की अवधि, यह बैंक से स्पष्ट करें।
• अलग-अलग बैंकों की तुलना करें: नया लोन लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी जरूर लें।
बैंक की बेंचमार्क दर बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की EMI तुरंत और समान अनुपात में बढ़ेगी। इसका वास्तविक असर लोन के प्रकार और बैंक की लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।