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हिंदी न्यूज़ऐस्ट्रोLalita Saptami 2026: राधा अष्टमी से एक दिन पहले क्यों होती है ललिता सखी की पूजा? जानें दोनों का संबंध
Lalita Saptami 2026: ललिता सप्तमी 2026 आज 18 सितंबर को मनाई जा रही है. जानें राधा अष्टमी से एक दिन पहले ललिता सखी की पूजा क्यों होती है और राधारानी से उनका क्या संबंध है.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 18 Sep 2026 05:29 PM (IST)

ललिता सप्तमी 2026
Source : abplive
Lalita Saptami 2026: आज यानी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को ललिता सप्तमी मनाई जा रही है. इसके अगले दिन 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व होगा. ब्रज की परंपरा में ललिता सप्तमी को राधारानी के जन्मोत्सव से पहले आने वाला बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.
इस दिन राधा-कृष्ण की प्रिय सखी ललिता देवी का स्मरण और पूजन किया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि राधा अष्टमी से ठीक एक दिन पहले ही ललिता सखी की पूजा क्यों की जाती है और उनका राधारानी से क्या संबंध है?
कौन हैं ललिता सखी?
वैष्णव परंपरा में राधारानी की आठ प्रमुख सखियों का वर्णन मिलता है, जिन्हें अष्टसखी कहा जाता है. ललिता सखी इन सभी में प्रमुख मानी जाती हैं. उन्हें राधारानी की सबसे करीबी, विश्वासपात्र और निस्वार्थ सेविका के रूप में पूजा जाता है.
मान्यता है कि ललिता सखी का जन्म बरसाना के पास स्थित ऊंचागांव में हुआ था. यहां ललिता सखी का प्राचीन मंदिर भी है, जहां भक्त विशेष श्रद्धा के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं. ब्रज क्षेत्र में ललिता सप्तमी के अवसर पर भजन, कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है.
राधा अष्टमी से एक दिन पहले क्यों?
ललिता सप्तमी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जबकि इसके अगले दिन अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ललिता सखी का प्राकट्य राधारानी से पहले हुआ था. इसी वजह से उनकी जयंती राधा अष्टमी से एक दिन पहले मनाई जाती है.
इस परंपरा का एक आध्यात्मिक अर्थ भी है. भक्तों का मानना है कि राधा-कृष्ण की भक्ति को समझने के लिए पहले उनकी सखियों की सेवा-भावना और समर्पण को समझना जरूरी है. ललिता सखी को राधारानी की सेवा और राधा-कृष्ण की लीलाओं की प्रमुख संयोजक माना जाता है. इसलिए राधा अष्टमी से पहले ललिता सखी का पूजन, राधारानी के स्वागत की तैयारी के रूप में देखा जाता है.
राधारानी और ललिता सखी का संबंध
कथाओं के अनुसार, ललिता सखी राधारानी की परम मित्र थीं. वे राधा-कृष्ण के मिलन में सहायक बनती थीं, संदेश पहुंचाती थीं और उनकी लीलाओं की व्यवस्था करती थीं. कई भक्ति परंपराओं में उन्हें राधारानी की ऐसी सखी माना गया है, जो प्रेम के साथ-साथ सही बात कहने में भी संकोच नहीं करती थीं.
ललिता सखी का स्वभाव स्पष्ट, निर्भीक और सेवाभाव से भरा हुआ बताया गया है. उनके लिए राधारानी की प्रसन्नता सबसे महत्वपूर्ण थी. इसी कारण वे भक्तों के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की प्रतीक मानी जाती हैं.
ललिता सप्तमी पर क्या करें?
ललिता सप्तमी पर सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें. राधा-कृष्ण के साथ ललिता सखी का स्मरण करें और उन्हें फूल, फल, मिठाई तथा श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. राधे-राधे नाम का जाप, भजन और ललिता सखी की कथा सुनना शुभ माना जाता है.
व्रत रखने वाले भक्त अपनी स्वास्थ्य-क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं. पूजा की विधि और व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा को प्राथमिकता दें.
ललिता सप्तमी का संदेश यही है कि राधा-कृष्ण की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वास, सेवा और समर्पण से भी जुड़ी है.
FAQ
ललिता सप्तमी 2026 कब है?
ललिता सप्तमी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है.
राधा अष्टमी 2026 कब मनाई जाएगी?
राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी.
ललिता सखी कौन थीं?
ललिता सखी राधारानी की प्रमुख अष्टसखियों में से एक और उनकी परम विश्वासपात्र मानी जाती हैं.
ललिता सप्तमी पर किसकी पूजा होती है?
इस दिन ललिता सखी का स्मरण और पूजन किया जाता है. साथ ही राधा-कृष्ण की पूजा भी की जाती है.
ललिता सप्तमी राधा अष्टमी से पहले क्यों आती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ललिता सखी का प्राकट्य राधारानी से पहले हुआ था, इसलिए उनकी जयंती राधा अष्टमी से एक दिन पहले मनाई जाती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
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हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.
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वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
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श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
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Published at : 18 Sep 2026 12:16 PM (IST)
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