
जन्माष्टमी 2026Image Credit source: pexels
Janmashtami Bhog: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देश-दुनिया में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. घर-घर में बाल गोपाल के स्वागत की तैयारियां महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं. कान्हा के जन्म के बाद उन्हें तरह-तरह के पकवानों, पंजीरी और मेवों का भोग लगाया जाता है, लेकिन एक चीज़ जिसके बिना भगवान कृष्ण की पूजा पूरी ही नहीं मानी जाती. वह है माखन और मिश्री. आइए जानते हैं, कान्हा को क्यों इतना प्रिय है माखन-मिश्री का भोग?
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव निशिता काल यानी मध्यरात्रि के समय मनाया जाता है. इसलिए इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा.
कान्हा को क्यों प्रिय था माखन?
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जिक्र आते ही माखन की कहानी याद आती है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, बाल गोपाल को माखन बेहद प्रिय था. गोकुल और वृंदावन में कान्हा अपनी बाल सखाओं के साथ मिलकर घरों से माखन चुराकर खाया करते थे. इसी वजह से उन्हें प्रेम से माखन चोर भी कहा जाता है. कृष्ण की माखन चुराने वाली लीलाएं केवल मनोरंजन की कथा नहीं मानी जातीं, यही कारण है कि जन्माष्टमी के दिन भक्त अपने आराध्य को उनकी पसंद का माखन अर्पित करते हैं.
माखन-मिश्री का भोग लगाने की क्या है मान्यता?
माखन को शुद्धता और सरलता से जोड़कर देखा जाता है. दूध से तैयार होने वाला माखन कई प्रक्रियाओं से गुजरकर बनता है. धार्मिक मान्यताओं में इसे मन की निर्मलता का प्रतीक भी माना जाता है. वहीं, मिश्री मिठास का प्रतीक मानी जाती है. इसलिए माखन के साथ मिश्री अर्पित करने का अर्थ भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति में मिठास बनाए रखने से भी जोड़ा जाता है.
जन्माष्टमी पर कैसे लगाएं माखन-मिश्री का भोग?
जन्माष्टमी की पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को स्नान कराया जाता है. इसके बाद उन्हें साफ वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाता है. पूजा स्थान को फूलों से सजाने के बाद कान्हा के सामने माखन और मिश्री का भोग रखा जाता है. भोग लगाते समय भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करके श्रद्धा से प्रार्थना की जाती है. इसके साथ तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है. माखन-मिश्री के साथ भक्त फल, मिठाई और बाकी सात्विक पकवान भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद आरती करके प्रसाद परिवार और बाकी भक्तों में बांटा जाता है.
जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री से जुड़ी कान्हा की बाल लीला
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन की लीलाएं ब्रज संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. कहा जाता है कि यशोदा मैया माखन तैयार करती थीं, लेकिन कान्हा अपने सखाओं के साथ मिलकर उसे चुरा लिया करते थे. कान्हा की इन शरारतों से जुड़ी कथाएं आज भी जन्माष्टमी के अवसर पर सुनाई जाती हैं. यही वजह है कि कई जगहों पर जन्माष्टमी के दौरान मटकी सजाई जाती है और दही-माखन से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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