सैलरी के 8-हजार रुपए भी दो महीने से नहीं मिले: JLN के फार्मासिस्ट और कंप्यूटर ऑपरेटर बोले- बच्चों की फीस कैसे करवाएं जमा, पेट्रोल के भी पैसे नहीं - Ajmer News

Published on 7 अग॰ 2026

‘महज 8 हजार रुपए महीने की सैलरी में भी पिछले दो महीने से एक रुपया नहीं मिला है। घर का खर्च चलाना तो दूर, हॉस्पिटल में ड्यूटी पर आने के लिए गाड़ी में पेट्रोल भरवाने और टैंपो का किराया देने तक के पैसे नहीं बचे हैं। उधार लेकर परिवार का गुजारा करना पड़ रह

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ये कहना है, अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में पन्नाधाय एजेंसी के तहत कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर और फार्मासिस्ट का। कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन नहीं मिलने और कई महीनों से PF-ESI जमा नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने आज प्रदर्शन किया।

कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने को, सैलरी अटकी

कर्मचारी पूजा चौहान ने बताया कि JLN हॉस्पिटल के इमरजेंसी कैंपस में पन्नाधाय एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। पिछले दो महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा करीब 12 महीने से PF और ESI की राशि भी जमा नहीं कराई गई।

उन्होंने बताया कि आंदोलन में हॉस्पिटल के करीब 50 कंप्यूटर ऑपरेटर और 100 फार्मासिस्ट शामिल हैं। अब एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की स्थिति में है, लेकिन कर्मचारियों का बकाया भुगतान अब तक अटका हुआ है।

बच्चों की फीस तक भरना मुश्किल

फार्मासिस्ट सलोनी यादव ने कहा कि वे और उनके साथी पिछले दो महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। आठ महीने से PF और जनवरी, फरवरी व मार्च का ESI भी बकाया है। हर महीने सैलरी और PF के लिए आंदोलन करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि 8 हजार रुपए की सैलरी पहले ही महंगाई के दौर में बेहद कम है, उस पर भी दो महीने से भुगतान नहीं हुआ। कई कर्मचारी उधार लेकर घर चला रहे हैं। शादीशुदा कर्मचारियों के सामने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने तक का संकट खड़ा हो गया है।

सलोनी ने आरोप लगाया कि जब भी प्रशासन से बात की जाती है तो जवाब मिलता है कि "आप हमारे कर्मचारी नहीं हैं, एजेंसी के माध्यम से आए हैं। काम छोड़ना है तो छोड़ दो, नए लोग आ जाएंगे।

उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल से भी बातचीत की, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके बाद मजबूर होकर जिला कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा रखने पहुंचे।

जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग पूरी करने की दी चेतावनी।

जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग पूरी करने की दी चेतावनी।

मरीजों पर भी पड़ा असर

कर्मचारियों के प्रदर्शन का असर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी दिखाई दिया। कंप्यूटर ऑपरेटरों और फार्मासिस्टों के विरोध के कारण मरीजों की पर्चियां बनाने और दवा वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।