'JDU का नाम जनता दल नीतीश (JDN) किया जाए': संजय झा के बाद श्रवण कुमार का समर्थन; LJPR बोली- जेपी गंगा पथ का नाम रामविलास गोलंबर हो - Patna News

Published on 11 सित॰ 2026

पटना16 घंटे पहले

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बिहार में "नाम" या 'नामकरण' को लेकर नई सियासत गरमाई है। ये जदयू का नाम बदलने से लेकर शहरों के नामकरण, मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ, पटना) के गोलंबर और देश के नाम तक पहुंची।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने जनता दल यूनाइटेड का नाम "जनता दल नीतीश" करने की बात कही। उन्होंने बख्तियारपुर का नाम नीतीश के नाम पर 'नीतीशपुर' या 'नीतीशपुरम' पर भी सहमति जताई। इधर, राजद ने कहा कि फिर भारत का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर "मोदीपुरम" कर देना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि रामविलास पासवान, लालू प्रसाद, नीतीश कुमार जैसे बड़े नेताओं के नाम पर बिहार की जगहों (शहरों) के नाम रखे जाने चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम आक्रमणकारी पर है, इसे बदलें। वहीं 'हम' के अध्यक्ष व मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम नीतीश के नाम पर हो। इसे 'नीतीशपुर' किया जाए।

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के पार्टी के नाम से ‘यूनाइटेड’ हटाकर ‘जनता दल नीतीश’ किए जाने के बयान पर पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई हैं।

बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने संजय झा के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं और ये उनकी पार्टी है।

वहीं, उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि संजय झा की अपनी इच्छा है। इच्छा अच्छी है, लेकिन जब पार्टी के सामने प्रस्ताव आएगा तो पार्टी ही इस पर फैसला करेगी।

श्रवण कुमार बोले- प्रस्ताव आया तो सर्वसम्मति से पास होगा

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, ‘पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का कहना सही है। जब नीतीश कुमार जी के नाम पर पार्टी चल रही है और वो हम सभी के सर्वमान्य नेता हैं। सभी लोग नीतीश कुमार जी के चलते ही इस पार्टी से जुड़े हुए हैं। निश्चित रूप से यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास करने योग्य है।

नीतीश कुमार ने पार्टी को स्थापित किया है और पार्टी उनके नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। जितना जल्दी हो इस प्रस्ताव को लाकर पास भी कर देना चाहिए।’

वहीं, डिप्टी CM और JDU के वरिष्ठ नेता विजेंद्र यादव ने इस मुद्दे पर स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर प्रस्ताव आएगा तो पार्टी फैसला करेगी।

बख्तियारपुर का नाम बदलने के सवाल पर समर्थन

बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग पर श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की। इससे पहले भी सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं की ओर से बख्तियारपुर का नाम नीतीश कुमार के नाम पर किए जाने की मांग सामने आ चुकी है। इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

रामविलास, लालू और नीतीश के नाम पर जगह और प्रतिमा पर सरकार करेगी समीक्षा

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की ओर से रामविलास पासवान, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के नाम पर जगहों का नाम रखने और उनकी प्रतिमाएं लगाए जाने की मांग पर श्रवण कुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास अगर प्रस्ताव आता है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। समीक्षा के बाद ही सरकार इस पर निर्णय लेगी।

वहीं, विजेंद्र यादव ने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देने से खुद को अलग रखा।

राजद का तंजः पूरे भारत का नाम मोदीपुरम कर दीजिए

राजद के वरीय नेता भाई वीरेंद्र और शक्ति यादव ने कटाक्ष किया कि अगर इसी तरह नेताओं के नाम पर दलों और शहरों के नाम रखे जाने हैं, तो फिर पूरे भारत का नाम ही बदलकर 'मोदीपुरम' कर देना चाहिए। भाई वीरेंद्र ने इसे व्यक्ति पूजा और चापलूसी की पराकाष्ठा बताया। कहा-संजय झा पहले यह स्पष्ट करें कि वे भाजपा में हैं या जदयू में?

क्या है नाम बदलने का नियम?

किसी शहर का नाम बदलने के लिए सबसे पहले जन प्रतिनिधियों या राज्य सरकार की पहल पर प्रस्ताव तैयार होता है। इसे विधानसभा में बहुमत से पारित कराना होता है। विधानसभा से पारित होने के बाद केन्द्र सरकार की मंजूरी के लिए प्रस्ताव को गृह मंत्रालय भेजा जाता है।

गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद रेल मंत्रालय, डाक विभाग, इंटेलिजेंस ब्यूरो और सर्वे ऑफ इंडिया से हरी झंडी मिलने के बाद केन्द्र सरकार नाम बदलने की अधिसूचना जारी करती है। अंत में राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना यानी गजट में प्रकाशन किया जाता है।

एक शहर का नाम बदलने में कितना खर्च

शहर का नाम बदलने में कितना खर्च आएगा? इसका अनुमान इससे लगा सकते हैं कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने पर लगभग 300 करोड़ रुपए का खर्च आया था।

2018 में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया था। इस लिहाज से पटना या बिहार के अन्य किसी शहर का नाम बदले में अब के समय में 300 करोड़ के लगभग खर्च आएगा।

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