Aug 30, 2026 06:27 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

जन्माष्टमी के मौके पर कन्हैया के भोग के लिए 56 व्यंजन तैयार किए जाते हैं। घर में 56 ना सही पर 5 प्रकार के भोग बनाने हैं तो उनका प्रिय ठोर जरूर बनाएं। गुजरात में द्वारिकाधीश को इसका भोग लगता है और कान्हा जी को ये बेहद प्रिय है, सीख लें बनाने का तरीका।

कान्हा जी को लगाएं गेहूं के आटे से बने ठोर का भोग
कृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर कन्हैया को पूरे 56 व्यंजन का भोग लगता है। लेकिन घर में 56 ना सहीं पर 5 या 7 व्यंजन का भोग तो लगाते ही होंगे। इन 7 चीजों में द्वारकाधीश का प्रिय ठोर भी बनाकर भगवान को भोग लगाएं, ये उनके प्रिय भोग में से एक है, जिसे गुजरात में द्वारकाधीश श्रीनाथ जी को लगाया जाता है। ठोर बनाना बहुत आसान है और ये मात्र 3-4 चीजों को मिलाकर बन जाता है। ना ज्यादा मेहनत, ना ज्यादा सामग्री, ना बहुत सारे मेवा और ड्राई फ्रूट्स की जरूरत। तो बस अपने कान्हा को प्रसन्न करना है तो इस जन्माष्टमी पर गेहूं के आटे से बने खस्ता, मीठे ठोर का भोग जरूर लगाएं। बस इस सिंपल सी रेसिपी को नोट कर लें और सीख लें कैसे बनेगा ठोर।
ठोर बनाने की सामग्री
एक कप मोटा गेंहू का आटा
दो कप चीनी
एक कप दूध
तीन से चार चम्मच देसी घी
सफेद तिल
ठोर बनाने की रेसिपी
- सबसे पहले गेहूं का मोटा चोकर वाला आटा लें। इस मोटे आटे से ही ये ठोर खस्ता और टेस्टी बनकर तैयार होता है।
- इस एक कप आटे में दो से तीन चम्मच सफेद तिल डाल दें।
- साथ में तीन से चार बड़े चम्मच देसी घी के डालें। देसी घी को पिघलाकर हल्का गुनगुना करके ही डालें। तभी ये आटा खस्ता बनकर तैयार होगा।
- अब अच्छी तरह से हाथ से मिक्स करें। जब घी को आटे में मिलाएं तो हाथ से बांधकर देंखे, अगर सूखा आटा घी की वजह से बंध जा रहा मतलब सही मात्रा में घी है। अगर ये भुरभुरा ही है तो थोड़ा सा घी और डाल सकती हैं।
- अब दूध करीब एक कप लें और जितनी जरूरत हो उतनी मात्रा में डालकर धीरे-धीरे कड़ा आटा गूंथ लें।
- ये दूध कमरे के तापमान जितना ही गर्म हो। ना ज्यादा गर्म ना ज्यादा ठंडा।
- अब इस गूंथे हुए आटे को पांच मिनट के लिए रेस्ट दें।
- फिर एक बड़ी लोई बनाकर मोटी रोटी बेल लें।
- चूंकि आटा कड़ा होगा और मोटा रहेगा इसलिए इसके किनारे चिकने नहीं रहेंगे लेकिन परेशान ना हो। ठोर की यहीं खासियत होती है।
- अब इस मोटी रोटी को कांटे की मदद से छेद-छेद कर लें। जिससे कि तेल में जाने के बाद ये गलती से फूल ना जाए।
- जब छोटे बारीक कांटे से छेद कर देंगी तो ये फूलने की बजाय खस्ता बनेंगे।
- रोटियों का आकार पसंद के मुताबिक छोटा या बड़ा कर सकती हैं।
- अब तेल या घी को कड़ाही में गर्म करें और जब मीडियम गर्म घी हो जाए तो तैयार ठोर को डाल दें और मीडियम फ्लेम पर ही पकने दें।
- इसे पलटने की जल्दीबाजी ना करें और जब ये हल्का सा रंग साइड से बदलता हुआ दिखे तभी इसे पलटें।
- इस बीच दूसरी गैस पर चाशनी बना लें। चाशनी के लिए एक भगोने में दो कप चीनी और एक कप पानी डालकर पकने के लिए रख दें।
- घी में जब ठोर अच्छी तरह से गोल्डन ब्राउन हो जाएं तो इन्हें छानकर निकाल लें।
- चाशनी जब अच्छी तरह पक रही हो तो कुछ इलायची के दानें और केसर के धागे डाल दें। जिससे कलर और महक दोनों ही बदल जाए।
- जब चाशनी दो तार वाली बन जाए तो गर्म चाशनी में तैयार पके हुए ठोर को डालकर निकालें और किसी थाली में रख दें। बची हुई चाशनी भी ऊपर से डाल दें और बस इसे ठंडा होने के लिए रख दें।
- ठंडा होने के बाद ये बिल्कुल खस्ता होंगे और इनका भोग भगवान को बेहद प्रिय लगेगा।