
j-10C का बढ़ना कितना चिंताजनक
भारत का पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश अब चीन का फाइटर जेट J-10C खरीदने की फिराक में है. पाकिस्तान के बाद वह दूसरा देश होगा जो इस जेट को चाइना से खरीदेगा. इस डील का मसौदा तैयार हो गया बस फाइनल मुहर लगना बाकी है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या चीन ने अपने हथियारों का जाल भारत के चारों तरफ फैला दिया है? ऐसा इसलिए क्योंकि पश्चिम में पाकिस्तान और अगर बांग्लादेश जेट लेता है तो वह भारत के पूरब में होगा और चीन उत्तर में पहले से है ही. इस बीच इस जेट की ताकत और भारत की मौजूदा एयर डिफेंस ताकत पर बात नए सिरे से शुरू हो गई है. आइए इस खबर में आपको J-10C की नई डील के आसरे से यह बताते हैं कि इसकी असर में ताकत क्या है यह कितना खतरनाक है और भारत के पास इससे निपटने या इस तरह के जेट का तोड़ फिलहाल अभी क्या है.
मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में इसी जेट ने सुर्खियां बटोरी थीं, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने इससे दागी गई मिसाइल से एक भारतीय राफेल को मार गिराने का दावा किया था. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. बांग्लादेश करीब 2.2 अरब डॉलर के सौदे में 20 चीनी J-10C फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में है. हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 24 भी बताया गया है. अक्टूबर 2025 में सामने आया था कि सिर्फ एयरफ्रेम की कीमत ही करीब 1.2 अरब डॉलर होगी, जबकि हथियार, स्पेयर पार्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग सहित पूरा पैकेज 2.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. भुगतान 2036 तक दस वित्तीय वर्षों में फैलाया जाएगा और डिलीवरी 2026-27 के बीच शुरू होने की उम्मीद है.

सबसे खास बात यह है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने खुद माना है कि यह फैसला मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में चीनी PL-15 मिसाइलों से लैस J-10C के ‘मजबूत प्रदर्शन’ को देखते हुए लिया गया है. यह डील ढाका की ‘फोर्सेज गोल 2030’ रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है और अगर यह पूरी होती है तो बांग्लादेश पाकिस्तान के बाद चीन के बाहर J-10C ऑपरेट करने वाला दूसरा देश बन जाएगा.
पाकिस्तान के पास पहले से 36 जेट का पूरा बेड़ा तैयार
पाकिस्तान एयरफोर्स J-10C का पहला विदेशी ग्राहक रहा है. मार्च 2022 में पहला बैच पाकिस्तान पहुंचा और No. 15 ‘कोबरा’ स्क्वाड्रन में शामिल हुआ. अमेरिकी पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 तक चीन पाकिस्तान को 20 यूनिट डिलीवर कर चुका था, जो 2020 से अब तक दो ऑर्डरों में कुल 36 जेट के पैकेज का हिस्सा हैं
कितना खतरनाक है J-10C?
चेंगदु J-10C एक सिंगल-इंजन डेल्टा-कैनार्ड डिजाइन वाला 4.5-जनरेशन मल्टीरोल फाइटर है, जिसकी प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं.
- इंजन और स्पीड- इसमें शेनयांग WS-10B आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है. जिसकी अधिकतम स्पीड मैक 1.8 (करीब 2,223 किमी/घंटा), ऑपरेशनल ऊंचाई 18,000 मीटर और रेंज करीब 2,500 नॉटिकल मील (4,630 किमी) है.
- राडार और एवियॉनिक्स- इस जेट में AESA (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे) राडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स, कम राडार क्रॉस-सेक्शन और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है.
- हथियार सिस्टम- विमान को लॉन्ग-रेंज PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और कई तरह के प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों से लैस किया जा सकता है. इसे चीन के KJ-500 अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट सहित कॉम्बैट नेटवर्क से भी जोड़ा जा सकता है.
भारत की क्या तैयारी है?
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल करीब 29-30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी जरूरत और मंजूर संख्या 42 स्क्वाड्रन की है. पुराने हो चुके MiG-21, Jaguar और Mirage-2000 जैसे लड़ाकू विमानों के धीरे-धीरे रिटायर होने से वायुसेना की ताकत पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में भारत अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए राफेल विमानों पर भरोसा कर रहा है.
12 फरवरी 2026 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 114 और राफेल जेट खरीदने को मंजूरी दी. इनमें 90 विमान भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर बनाए जाएंगे और इनमें करीब 50% स्वदेशी सामग्री होगी. बाकी 24 विमान सीधे तैयार हालत में भारत को मिलेंगे. इससे पहले भारत के पास 36 राफेल विमान हैं और 26 नौसैनिक राफेल का ऑर्डर भी दिया जा चुका है. राफेल की METEOR मिसाइल भी भारत की बड़ी ताकत है. इसकी नो-एस्केप जोन रेंज 60 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है यानी इस दायरे में आने के बाद दुश्मन के विमान के बच निकलने की संभावना काफी कम हो जाती है.

ब्रह्मोस देगा कड़ी टक्कर
भारत के पास ब्रह्मोस मिसाइल भी एक बड़ी ताकत है. यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है और करीब मैक 2.8 से 3 की रफ्तार से उड़ सकती है. इसे जमीन, युद्धपोत, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान चारों जगह से दागा जा सकता है. इसकी तेज रफ्तार की वजह से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है. यही वजह है कि दक्षिण चीन सागर के आसपास के कई देश समुद्री सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
कुल मिलाकर चीन का J-10C अब सिर्फ पाकिस्तान की वायुसेना तक सीमित चुनौती नहीं है. अगर इसे चीन और दूसरे देशों में भी तैनात किया जाता है, तो भारत के लिए इसका खतरा क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ सकता है. हालांकि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ किसी एक लड़ाकू विमान की क्षमता नहीं, बल्कि फाइटर स्क्वाड्रनों की कम संख्या और नए विमानों की डिलीवरी में देरी है. भारत की रणनीति फिलहाल तीन स्तरों पर आगे बढ़ रही है.

देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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