31 अगस्त की ITR डेडलाइन निकल गई है, लेकिन टैक्सपेयर्स के पास बेलटेड रिटर्न समेत कुछ विकल्प अभी भी मौजूद हैं। 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल किया जा सकता है, जबकि इसके बाद वास्तविक परेशानी की स्थिति में कंडोनेशन का रास्ता उपलब्ध है।
ITR Filling report
- Published: 01 Sep 2026, 07:48 PM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 07:48 PM IST
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की 31 अगस्त की डेडलाइन निकल चुकी। अगर आपने अभी तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं किया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा। टैक्सपेयर्स अभी बेलटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
वहीं, जिन लोगों ने पहले ही इनकम टैक्स रिटर्न भर दिया, लेकिन उसमें कोई गलती या जानकारी छूट गई है, वे रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते। कुछ खास परिस्थितियों में देरी से रिटर्न की समयसीमा निकलने के बाद कंडोनेशन ऑफ डिले का विकल्प भी उपलब्ध है।
31 दिसंबर तक भर सकते हैं बीलेटेड ITR
मूल समयसीमा तक आईटीआर दाखिल नहीं करने वाले टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(4) के तहत बेलटेड रिटर्न भर सकते हैं। एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए यह रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, दाखिल किया जा सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बेलटेड रिटर्न पर धारा 234A के तहत टैक्स पर ब्याज और धारा 234F के तहत लेट फीस लग सकती है। लेट फीस अधिकतम 5,000 रुपए हो सकती है। अगर कुल आय 5 लाख रुपए तक है तो यह फीस 1,000 रुपए तक हो सकती है। इसके अलावा बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज लग सकता है।
बीलेटेड रिटर्न दाखिल करने पर बिजनेस और कैपिटल लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी खो सकता है। साथ ही टैक्स व्यवस्था और उपलब्ध डिडक्शन पर भी असर पड़ सकता है। रिफंड का दावा किया जा सकता है, लेकिन उसकी प्रोसेसिंग में सामान्य रिटर्न की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है।
रिवाइज्ड रिटर्न किसके लिए?
रिवाइज्ड रिटर्न उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले ही ओरिजिनल या बेलटेड ITR दाखिल कर दिया है और बाद में उसमें कोई गलती या जानकारी छूटने का पता चलता है। यानी जिसने अब तक कोई ITR ही दाखिल नहीं किया, वह सीधे रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भर सकता।
AY 2026-27 और उसके बाद के वर्षों के लिए रिवाइज्ड रिटर्न की विंडो 31 मार्च 2027 तक है। हालांकि 31 दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त फीस लागू हो सकती है।
31 दिसंबर के बाद क्या विकल्प?
अगर बीलेटेड रिटर्न की समयसीमा भी निकल गई है तो कुछ मामलों में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b) के तहत कंडोनेशन ऑफ डिले के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह सामान्य रूप से समयसीमा बढ़ाने का विकल्प नहीं है, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में राहत देने की व्यवस्था है। खासकर वास्तविक परेशानी के कारण देरी होने और रिफंड या लॉस कैरी फॉरवर्ड जैसे वैध दावे होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स को वास्तविक परेशानी का स्पष्ट कारण और उसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज देने चाहिए। जानबूझकर की गई देरी, लगातार नियमों का पालन नहीं करने का रिकॉर्ड या पर्याप्त सबूत नहीं होने पर आवेदन खारिज भी हो सकता है।
इसलिए जिन टैक्सपेयर्स ने 31 अगस्त तक ITR दाखिल नहीं किया है, उनके लिए सबसे अहम तारीख अब 31 दिसंबर 2026 है। समयसीमा का इंतजार करने के बजाय जल्द रिटर्न दाखिल करना अतिरिक्त ब्याज और लेट फीस के बोझ को नियंत्रित करने का बेहतर तरीका है।
(प्रियंका कुमारी)