पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के बनूड में दर्ज 2015 के गैंगरेप मामले में शिकायतकर्ता रही महिला के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (ITPA) की धारा 4 और 5 के तहत लगाए गए आरोप रद्द कर दिए हैं। पुलिस जांच के दौरान महिला को ही गैंगरेप
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आरोप यह है कि महिला ने खुद पैसे लेकर यौन संबंध बनाए, तो केवल इस आधार पर उस पर ITPA की धारा 4 नहीं लगाई जा सकती। धारा 4 किसी दूसरी महिला या लड़की के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जीवन यापन करने वाले व्यक्ति पर लागू होती है। इसी तरह धारा 5 किसी दूसरी महिला या लड़की को देह व्यापार के लिए लाने, बहकाने या प्रेरित करने से जुड़ी है। कोर्ट ने महिला के खिलाफ इन दोनों धाराओं के आरोप हटाने का आदेश दिया।
2015 में महिला ने दर्ज कराई थी गैंगरेप की FIR
मामला पंजाब के बनूड थाना क्षेत्र का है। महिला ने पुलिस को बताया था कि 19 सितंबर की आधी रात के करीब वह चंडीगढ़ सेक्टर-43 पहुंची थी और जिरकपुर के बलटाना में अपने पति के पास जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान दो युवक मोटरसाइकिल पर आए और उसे वहां छोड़ने की बात कही।
महिला के अनुसार, दोनों उसे बनूर के एक खाली मकान में ले गए। वहां उसे जबरन अंदर ले जाकर शराब पिलाई गई और उसकी इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाए गए। इसके बाद करीब आधे घंटे में तीन और युवक वहां पहुंचे। महिला ने आरोप लगाया कि उन्होंने भी उसके साथ जबरन संबंध बनाए। उसने शोर मचाया तो उसका मुंह बंद कर जान से मारने की धमकी दी गई।
महिला ने बताया कि वह बेहोश हो गई थी। होश आने पर मकान बाहर से बंद था। वह दीवार फांदकर बाहर निकली और पुलिस से शिकायत की। इसके बाद 20 सितंबर 2015 को थाना बनूड में गैंगरेप और गलत तरीके से बंधक बनाने की धाराओं में FIR दर्ज की गई थी।
जांच में पुलिस ने बदल दिया पूरा घटनाक्रम
जांच के दौरान पुलिस ने घटना को लेकर अलग निष्कर्ष निकाला। चालान में पुलिस ने कहा कि महिला आरोपियों के साथ अपनी मर्जी से बनूर गई थी और उनके बीच पैसे के बदले सहमति से शारीरिक संबंध बने थे।
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि महिला ने अपने पति और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर आरोपियों के परिवार पर दबाव बनाने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए गैंगरेप का मामला दर्ज कराया था। इस दावे के समर्थन में पुलिस ने गवाहों के बयान, वीडियो सीडी, CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड का हवाला दिया।
गैंगरेप के आरोपियों के परिवार से 4 लाख मांगने का आरोप
पुलिस ने आरोप लगाया कि गैंगरेप मामले में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति के परिवार से उसका नाम केस से हटाने के लिए 4 लाख रुपए मांगे गए थे। पुलिस के अनुसार, इस रकम में से 1 लाख रुपए और 5 हजार रुपए दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने मूल शिकायतकर्ता महिला को भी आरोपी बना दिया। उसके खिलाफ ITPA की धारा 3, 4 और 5 के अलावा IPC की धारा 384 और 120-B के तहत चालान पेश किया गया। ट्रायल कोर्ट ने महिला के खिलाफ धारा 4 और 5 समेत अन्य आरोप तय किए थे। आरोपों से मुक्त करने की उसकी अर्जी भी खारिज कर दी गई थी।
दूसरी महिला की कमाई लेने का आरोप नहीं
जस्टिस मनीषा बत्रा ने धारा 4 पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस धारा का इस्तेमाल उस व्यक्ति के खिलाफ होता है, जो किसी दूसरी महिला या लड़की के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जीवन यापन करता है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में महिला पर यह आरोप नहीं है कि वह किसी दूसरी महिला की देह व्यापार से होने वाली कमाई ले रही थी। पुलिस का आरोप था कि वह खुद देह व्यापार में शामिल थी। उसके खिलाफ किसी दूसरी महिला की कमाई लेने, उसे नियंत्रित करने या किसी अन्य महिला के लिए बिचौलिए या दलाल के तौर पर काम करने का आरोप भी नहीं था। इसलिए धारा 4 के जरूरी तत्व पूरे नहीं होते।
दूसरी महिला को देह व्यापार में लाने का भी आरोप नहीं
कोर्ट ने धारा 5 के आरोप को भी कायम नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि धारा 5 किसी महिला या लड़की को देह व्यापार के लिए लाने, बहकाने, एक जगह से दूसरी जगह ले जाने या उसे देह व्यापार के लिए प्रेरित करने से जुड़ी है। इस मामले में महिला पर किसी दूसरी महिला या लड़की को देह व्यापार में लाने या इसके लिए प्रेरित करने का कोई आरोप नहीं है। इसलिए उसके खिलाफ धारा 5 के भी जरूरी तत्व नहीं बनते।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप तय करते समय कोर्ट को सबूतों की पूरी और विस्तृत जांच करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन यह देखना जरूरी है कि जांच में सामने आए आरोप संबंधित अपराध के जरूरी तत्वों को पूरा करते हैं या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आरोप कायम नहीं रखा जा सकता कि जांच एजेंसी ने चालान में उस अपराध की धारा लगा दी है। यदि आरोपों को सही मान भी लिया जाए और फिर भी अपराध के जरूरी तत्व पूरे नहीं होते, तो उस धारा के तहत आरोप कायम नहीं रह सकते।
महिला पर उगाही और साजिश का केस जारी रहेगा
हालांकि हाईकोर्ट ने महिला को सभी आरोपों से मुक्त नहीं किया है। कोर्ट ने उसके खिलाफ IPC की धारा 384 और 120-B के तहत लगाए गए आरोप बरकरार रखे हैं। कोर्ट ने कहा कि पैसे मांगने और लेने के आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं। इन आरोपों की सच्चाई का फैसला ट्रायल के दौरान होगा।
हाईकोर्ट ने संशोधन याचिका को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए केवल महिला के खिलाफ ITPA की धारा 4 और 5 के आरोप रद्द किए हैं। बाकी मामले में ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार आगे सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया गया है।