दिल्ली में ISI के लिए जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दंपती गिरफ्तार; पाकिस्तान भेजे थे भारतीय सिम कार्ड

Published on 29 अग॰ 2026

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है. पुलिस ने सराय काले खां इलाके से एक दंपती को गिरफ्तार किया है.

दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है. पुलिस ने सराय काले खां इलाके से एक दंपती को गिरफ्तार किया है.

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AROPI

Delhi ISI Spy Network: दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है. पुलिस ने सराय काले खां इलाके से एक दंपती को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों वर्ष 2024 से पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (PIO) के संपर्क में थे और उनके लिए काम कर रहे थे. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बदायूं निवासी मोहम्मद साहिल और उसकी पत्नी समीरा के तौर पर हुई है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों कथित तौर पर भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने और सैन्य से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने वाले नेटवर्क का हिस्सा थे.

पाकिस्तान तक पहुंचाए गए भारतीय सिम कार्ड

दिल्ली पुलिस की जांच में कथित तौर पर पता चला है कि ISI समर्थित नेटवर्क के लिए बड़ी संख्या में भारतीय मोबाइल सिम कार्ड जुटाए जा रहे थे. इन सिम कार्डों का इस्तेमाल भारतीय नंबरों पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय करने के लिए किया जाता था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ भारतीय सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान तक पहुंचाए गए. वहां मौजूद हैंडलर्स इन नंबरों पर WhatsApp अकाउंट चलाकर विभिन्न भारतीय ग्रुप्स में शामिल होते थे. आरोप है कि इन ग्रुप्स के जरिए सैन्य और सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश की जाती थी. 

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दंपती को सैन्य इलाकों की जानकारी जुटाने का काम

पुलिस के मुताबिक, साहिल और समीरा को भारत में सैन्य छावनी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए लोगों को नेटवर्क में शामिल करने का जिम्मा दिया गया था. जांच में साहिल पर ऐसे सैन्यकर्मियों की जानकारी जुटाने का आरोप भी सामने आया है, जिनसे संबंधित कोर्ट मार्शल मामले ट्रिब्यूनल में लंबित बताए जा रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने इसी कड़ी में हाल ही में हौजरानी इलाके से प्रदीप्त बसु नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया था. पुलिस अब इन सभी मामलों के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है.

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स्थानीय लोगों को नेटवर्क में शामिल करने का आरोप

स्पेशल सेल के उपायुक्त नारा चैतन्य के मुताबिक, आतंकी संगठनों, उनके मददगारों और स्लीपर सेल से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के दौरान जांच टीम को NCR में सक्रिय कथित PIO नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली।पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क ने सैन्य सूचनाएं हासिल करने के लिए स्थानीय लोगों को अपने संपर्क में लिया था. इन्हीं लोगों की मदद से भारतीय मोबाइल सिम कार्ड हासिल किए जाते थे. इसके बाद पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर्स इन नंबरों पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय करवाकर भारतीय यूजर्स और ग्रुप्स तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे.

मोबाइल फोन से मिली चैट की जांच

पुलिस ने आरोपी समीरा के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, फोन की जांच के दौरान पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स के साथ बातचीत से जुड़ी कुछ संदिग्ध चैट मिली हैं. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और भारत में मौजूद लोगों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित किया जाता था. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जाता था.

8 सिम कार्ड पाकिस्तान भेजने का आरोप

पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर जानकारी मिली कि साहिल और समीरा वर्ष 2024 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्ट्राग्राम के जरिए एक पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में आए थे. इसके बाद दोनों की पहचान एक PIO से कराई गई और कथित तौर पर उन्हें नेटवर्क के लिए काम करने के निर्देश मिले. जांच के मुताबिक, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दंपती ने दुबई के रास्ते आठ भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजे. इसके बदले उन्हें करीब 30 हजार रुपये मिलने की बात सामने आई है. पुलिस का आरोप है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन भारतीय नंबरों पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय किए गए. इसके जरिए कथित पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स भारतीय WhatsApp ग्रुप्स में शामिल हुए और वहां से संवेदनशील जानकारियां जुटाने के लिए भारतीय नागरिकों से संपर्क करने की कोशिश की. फिलहाल दिल्ली पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित तौर पर जुटाई गई जानकारी किस तरह और किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी.