भारतीय रेलवे के उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूटों पर प्रतिदिन सफर करने वाले करोड़ों दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, व्यापारियों और छात्र-छात्राओं के लिए रेल मंत्रालय ने डिजिटल टिकटिंग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर, गाजियाबाद-दिल्ली, प्रयागराज-वाराणसी और मेरठ-दिल्ली जैसे व्यस्त रेल गलियारों से लेकर मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के विशाल लोकल नेटवर्क पर रोज सफर करने वाले यात्रियों को हर महीने रेलवे काउंटरों पर सीजन टिकट (MST/QST) बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। पूर्व में रेलवे के टिकटिंग ऐप्स पर यह पाबंदी थी कि कोई भी व्यक्ति केवल अपने व्यक्तिगत प्रोफाइल से खुद का ही सीजन टिकट बुक कर सकता था। परिवार के अन्य सदस्यों या बुजुर्ग माता-पिता के लिए पास बनवाने के लिए उन्हें अलग-अलग स्मार्टफोन और खातों की आवश्यकता होती थी। भारतीय रेलवे ने दैनिक मुसाफिरों की इस पुरानी और जायज परेशानी को हमेशा के लिए समाप्त करते हुए अपने आधुनिक सुपर ऐप 'रेलवन' (RailOne) पर सीजन टिकट बुकिंग के नियमों में युगांतकारी संशोधन कर दिया है। अब एक ही रजिस्टर्ड यूजर अपने ऐप से परिवार के अन्य लोगों और सह-यात्रियों का भी सीजन टिकट आसानी से बुक और रिन्यू करा सकेगा।
1 यूजर और 5 अतिरिक्त टिकट: जानिए RailOne ऐप का नया 'शेयर्ड सीजन टिकट' फॉर्मूला
रेलवे बोर्ड द्वारा अनुमोदित यह नई और सुविधाजनक व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू हो चुकी है। नए प्रावधानों के तहत, RailOne ऐप पर पंजीकृत कोई भी वैध उपयोगकर्ता अपने व्यक्तिगत सीजन टिकट के अतिरिक्त अधिकतम 5 अन्य यात्रियों के लिए भी सीजन टिकट (Shared Season Ticket) बुक कर सकता है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि परिवार का कोई एक डिजिटल-फ्रेंडली सदस्य अपने एक ही स्मार्टफोन से परिवार के कुल 6 लोगों (स्वयं + 5 अन्य) के लिए मासिक, त्रैमासिक या छमाही सीजन पास जनरेट कर सकता है। इससे उन बुजुर्गों, ग्रामीण महिलाओं या छोटे स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जिनके पास या तो स्मार्टफोन नहीं है या जो ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और जटिल डिजिटल प्रक्रियाओं को समझने में सहज नहीं हैं। अब घर का मुखिया या बड़ा सदस्य दफ्तर या घर में बैठकर ही कुछ ही सेकंडों में सभी आश्रितों के लिए वैध रेलवे पास बनवा सकता है।
उम्र सीमा और वैधता की शर्तें: खुद के लिए आज से और दूसरों के लिए कल से लागू होगा पास
रेलवे प्रशासन ने इस सुविधा में पारदर्शिता बनाए रखने और टिकट चेकिंग व्यवस्था में किसी भी संभावित फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश और पात्रता मानक भी तय किए हैं। सीनियर डीसीएम कोटा, सौरभ जैन के अनुसार, उम्र और वैधता की समयसीमा को लेकर दो स्पष्ट विभाजन किए गए हैं। यदि कोई यूजर स्वयं के लिए सीजन टिकट बुक कर रहा है, तो उसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है। खुद के लिए बुक किया गया टिकट जियो-फेंसिंग और भौगोलिक सत्यापन (Geographical Verification) पूरा होते ही उसी दिन (Same Day) से यात्रा के लिए वैध माना जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, यदि यूजर परिवार के किसी अन्य सदस्य या साथी यात्री के लिए सीजन टिकट बुक करता है, तो उस सह-यात्री की न्यूनतम आयु कम से कम 5 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही, दूसरों के लिए बुक किया गया यह टिकट बुकिंग के दिन मान्य नहीं होगा, बल्कि बुकिंग के अगले दिन (Following Day) से ही यात्रा के लिए प्रभावी होगा। यह 24 घंटे का नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई व्यक्ति ट्रेन में टीटीई को देखकर ऑन-द-स्पॉट आनन-फानन में दूसरों के नाम पर पास बनाकर जुर्माने से बचने का प्रयास न कर सके।
डिजिटल वेरिफिकेशन और क्यूआर कोड: टीटीई कैसे जांचेंगे टिकट? जानिए फोटो और पीडीएफ के नियम
डिजिटल रूप से जारी किए गए इस शेयर्ड सीजन टिकट की जांच को लेकर यात्रियों के मन में यह संशय था कि बिना ओरिजिनल यूजर के फोन के दूसरा यात्री ट्रेन में टिकट कैसे दिखाएगा। रेलवे ने इसके लिए अत्याधुनिक क्यूआर कोड और फोटो सत्यापन प्रणाली विकसित की है। जब आप किसी अन्य व्यक्ति के लिए सीजन टिकट बुक करेंगे, तो उस पास पर संबंधित यात्री का नाम, उम्र, पहचान और उसकी स्पष्ट पासपोर्ट साइज फोटो के साथ एक यूनिक और एन्क्रिप्टेड क्यूआर कोड (QR Code) छपा होगा। यात्रा के दौरान यात्री अपने मोबाइल फोन में इस टिकट की डिजिटल पीडीएफ (PDF) फाइल दिखा सकता है या फिर इसका साफ प्रिंटआउट (हार्ड कॉपी) अपने साथ रख सकता है। ट्रेन में या स्टेशन परिसर में तैनात टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) अपने आधुनिक हैंडहेल्ड टर्मिनल (HHT) डिवाइस से टिकट पर बने क्यूआर कोड को तुरंत स्कैन करके उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे। रेलवे ने यात्रियों को सख्त चेतावनी दी है कि केवल बुकिंग का एसएमएस (SMS) या पेमेंट की इनवॉइस रसीद दिखाना यात्रा का वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा। यात्री के पास फोटो और स्पष्ट क्यूआर कोड वाला मूल सीजन टिकट होना अनिवार्य है; यदि क्यूआर कोड क्षतिग्रस्त या पढ़ने योग्य नहीं होगा तो रेलवे नियमों के तहत बिना टिकट यात्रा का जुर्माना लगाया जा सकता है।
150 किलोमीटर तक का सफर: सेकंड क्लास में असीमित फेरे, किन ट्रेनों में नहीं मिलेगी अनुमति?
भारतीय रेलवे के बुनियादी नियमों के तहत सीजन टिकट उपनगरीय (Suburban) और गैर-उपनगरीय दोनों रेल खंडों पर दो निर्धारित स्टेशनों के बीच अधिकतम 150 किलोमीटर तक की यात्रा दूरी के लिए ही जारी किए जाते हैं। यह टिकट सेकंड क्लास (अनारक्षित साधारण डिब्बों) में असीमित यात्रा की सुविधा प्रदान करता है, जिससे यात्री अपनी वैधता अवधि के दौरान प्रतिदिन कितनी भी बार आ-जा सकते हैं। यह सुविधा आम कामकाजी मुसाफिरों और रियायती दरों पर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं दोनों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। हालांकि, सीजन टिकट धारकों को किसी भी परिस्थिति में मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी या वंदे भारत जैसी ट्रेनों के आरक्षित कोचों (Reserved Coaches) में यात्रा करने की बिल्कुल अनुमति नहीं होती। इसके अलावा, जिन प्रीमियम ट्रेनों में दूरी-आधारित प्रतिबंध (Distance Restrictions) या विशेष किराया लागू होता है, वहां भी यह पास अमान्य रहता है। यदि कोई सीजन टिकट धारक गलती से भी स्लीपर या एसी कोच में पाया जाता है, तो उसे बिना टिकट माना जाएगा और रेलवे एक्ट के तहत कठोर आर्थिक दंड भुगतना पड़ेगा।
RailOne सुपर ऐप क्या है? एक ही प्लेटफॉर्म पर यूटीएस, आईआरसीटीसी और रेल मदद की सभी सेवाएं
भारतीय रेलवे के तकनीकी विंग सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित 'रेलवन' (RailOne) ऐप को भारतीय रेल का आधिकारिक सुपर ऐप माना जा रहा है। अब तक रेल यात्रियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए फोन में 4 से 5 अलग-अलग ऐप्स रखने पड़ते थे—जैसे आरक्षित टिकट के लिए IRCTC Rail Connect, जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट के लिए UTS on Mobile, ट्रेनों की लाइव रनिंग स्थिति और प्लेटफॉर्म नंबर जानने के लिए NTES, शिकायतों के लिए Rail Madad और ट्रेन में गरमा-गरम खाना मंगाने के लिए IRCTC Food on Track। RailOne ऐप ने इन सभी अलग-थलग सेवाओं को एक ही सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाहित कर दिया है। इसमें एक एकीकृत वॉलेट और यूपीआई (UPI) पेमेंट सिस्टम दिया गया है, जिससे चंद सेकंडों में आरक्षित, अनारक्षित, प्लेटफॉर्म और अब शेयर्ड सीजन टिकट की बुकिंग की जा सकती है। इस सिंगल ऐप से फोन की स्टोरेज भी बचती है और बार-बार अलग-अलग पोर्टलों पर लॉगिन करने का झंझट भी पूरी तरह खत्म हो जाता है।
RailOne ऐप से दूसरों के लिए सीजन टिकट कैसे बनाएं? जानिए स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रिया
यदि आप अपने परिवार के किसी सदस्य या परिचित के लिए RailOne ऐप से सीजन टिकट बनाना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बेहद सरल और यूजर-फ्रेंडली है:
-
ऐप इंस्टॉल और लॉगिन: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक RailOne ऐप डाउनलोड करें और अपने 10 अंकों के मोबाइल नंबर से लॉगिन या साइन-अप करें।
-
सीजन टिकट मेनू का चयन: ऐप के मुख्य डैशबोर्ड पर जाएं और 'Unreserved Ticketing' सेक्शन के भीतर 'Season Ticket' विकल्प पर टैप करें।
-
'बुक फॉर अदर्स' चुनें: स्क्रीन पर आपको दो विकल्प मिलेंगे—'Issue Ticket for Self' और 'Issue Ticket for Others'। दूसरों के लिए पास बनवाने हेतु 'Issue Ticket for Others' पर क्लिक करें।
-
सह-यात्री का विवरण दर्ज करें: जिस व्यक्ति के लिए टिकट बन रहा है, उसका पूरा नाम, सही उम्र (न्यूनतम 5 वर्ष), लिंग और पहचान पत्र का नंबर भरें। इसके साथ ही उस यात्री की एक स्पष्ट और सीधी पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें।
-
स्टेशनों और अवधि का चुनाव: यात्रा का प्रस्थान स्टेशन (Source) और गंतव्य स्टेशन (Destination) चुनें (ध्यान रहे कि दूरी 150 किमी के दायरे में हो)। इसके बाद पास की अवधि—मासिक (Monthly), त्रैमासिक (Quarterly), छमाही या वार्षिक—का चयन करें।
-
डिजिटल भुगतान और टिकट डाउनलोड: स्क्रीन पर रियायती किराए की कुल राशि दिखेगी। भुगतान के लिए यूपीआई, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या रेलवे वॉलेट का इस्तेमाल करें। पेमेंट पूरा होते ही स्क्रीन पर फोटो और बारकोड/क्यूआर कोड वाला डिजिटल सीजन टिकट आ जाएगा। इसे तुरंत पीडीएफ के रूप में डाउनलोड करके यात्री के वॉट्सऐप या ईमेल पर शेयर कर दें।
दैनिक यात्रियों और छात्रों को लंबी कतारों से मुक्ति: देश भर के डेली पैसेंजर्स को बड़ा फायदा
रेलवे का यह प्रगतिशील फैसला उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के लाखों नियमित यात्रियों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, गाजियाबाद, खुर्जा, अलीगढ़ और पानीपत जैसे रूटों पर हर सुबह हजारों छात्र-छात्राएं कोचिंग और कॉलेजों के लिए निकलते हैं, जबकि लाखों कर्मचारी दफ्तरों का रुख करते हैं। महीने की पहली तारीखों पर टिकट काउंटरों पर लगने वाली भीषण मारामारी, समय की बर्बादी और कई बार ट्रेन छूट जाने की नौबत अब इतिहास बन जाएगी। रेलवे के इस डिजिटल कदम से न केवल पेपरलेस टिकटिंग को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि स्टेशन परिसरों में टिकट खिड़कियों पर भीड़ का दबाव भी उल्लेखनीय रूप से घटेगा। दैनिक यात्रियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत कराने वाला यह बदलाव डिजिटल रेलवे के सफर में एक बेहद अहम मील का पत्थर साबित हो रहा है।