लेफ्ट पार्टियों ने बढ़ा दी विजय थलपति की टेंशन? उपचुनाव में TVK को टक्कर देने की तैयारी

Published on 15 सित॰ 2026

Sep 15, 2026 10:53 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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तमिलनाडु में अक्टूबर में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में लेफ्ट पार्टियों ने अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है। लेफ्ट पार्टियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार को उनका  बाहर से समर्थन जारी रहेगा। 

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लेफ्ट पार्टियों ने किया टीवीके के खिलाफ उपचुनाव लड़ने का ऐलान

तमिलनाडु में टीवीके की थलपति विजय सरकार को बाहर से समर्थन देने के बाद भी लेफ्ट पार्टी उपचुनाव में अपने प्रत्याशी उतार रही है। अक्टूबर में मदुरंतकम और धारापुरम में उपचुनाव होने हैं। CPI और CPM ने फैसला किया कि वे टीवीके की सरकार को बाहर से समर्थन तो देते रहेंगे लेकिन दोनों उपचुनाव में अपने प्रत्याशी भी उतारेंगे। सीपीआई धारापुरम में और सीपीएम मदुरांतकम में अपने प्रत्याशी उतारेगी। प्रत्याशियों का ऐलान भी मंगलवार को ही किया जा सकता है।

दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेंगे वामदल

सीपीआई के प्रदेश सचिव एम. वीरपांडियन ने चेन्नई में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव ''स्वाभाविक'' नहीं, बल्कि ''थोपे गए'' हैं। किसी भी चुनावी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने के अपने रुख पर कायम रहते हुए सीपीआई ने सीपीएम के साथ मिलकर उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ''हमने चुनाव लड़ने के बारे में अपना विचार माकपा को बता दिया है और उसने भी यही रुख अपनाया है। सीपीएम धरापुरम से चुनाव लड़ेगी।''

गठबंधन में शामिल नहीं लेफ्ट पार्टियां

नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने टीवीके के नेतृत्व वाले नये मोर्चे 'सेक्युलर सोशल जस्टिस वेत्री अलायंस' में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके शामिल हैं। एमडीएमके को छोड़कर अन्य तीन दल विजय मंत्रिमंडल में शामिल हैं, जो तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पहली गठबंधन सरकार है।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर होने के कारण दोनों दलों के नेताओं ने 15 सितंबर को अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने की बात कही और मतदाताओं से विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व करने का अवसर देने की अपील की।

त्रिची में माकपा राज्य परिषद की बैठक के बाद प्रदेश सचिव पी षणमुगम ने भी यही रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यह एक जबरन थोपा गया उपचुनाव है, क्योंकि इन दो सीटों से चुने गये जन प्रतिनिधियों ने जनभावनाओं को दरकिनार करते हुए 20 दिनों के भीतर इस्तीफा दे दिया, जिससे खरीद-फरोख्त के आरोप लगे हैं। षणमुगम ने कहा कि टीवीके का समर्थन न करने का मतलब यह नहीं है कि वाम दल उपचुनाव में द्रमुक का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि इस चुनाव से सरकार बदलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि चुनावी मैदान में उतरने के बावजूद श्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आयेगा। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रपति शासन और राज्य में भाजपा के अप्रत्यक्ष शासन को रोकने के लिए ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी टीवीके को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन दिया गया था।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग के उपचुनाव की अधिसूचना जारी किये जाने के बाद द्रमुक, टीवीके, अन्नाद्रमुक और एनटीके अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं। वाम दल हालांकि इस बात पर अड़े थे कि अन्नाद्रमुक छोड़कर टीवीके में शामिल हुए दोनों पूर्व विधायकों को टिकट न दिया जाए, क्योंकि उन पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगे थे।

इसके बावजूद विजय ने इस्तीफा देने वाले पूर्व अन्नाद्रमुक विधायकों के मरागथम कुमारवेल को मदुरंतकम और पी सत्यभामा को धारापुरम सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। षणमुगम ने कहा कि माकपा टीवीके के ऐसे उम्मीदवारों के चयन से सहमत नहीं थी, जो 20 दिनों के भीतर इस्तीफा देकर उपचुनाव की स्थिति पैदा करने के लिए जिम्मेदार थे। वाम दलों के अलग चुनाव लड़ने का यह भी एक मुख्य कारण है।