Published: Monday, August 24, 2026, 15:22 [IST]
Yashasvi Jaiswal: भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट के पहले दिन मैदान पर हुई यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो की गर्मागर्मी का मामला अब खत्म हो गया है। हालांकि यह मुद्दा बिना एक्शन के खत्म नहीं हुआ है। दोनों ही प्लेयर्स के ऊपर एक्शन देखने को मिला है।
आईसीसी ने मैच के दूसरे दिन फैसला सुना दिया। जायसवाल और फर्नांडो दोनों को ही सजा सुनाई गई है। दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आईसीसी ने 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही दोनों के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया गया है।
जायसवाल और फर्नांडो के बीच यह विवाद भारतीय पारी के 17वें ओवर में देखने को मिला था। फर्नांडो ने जायसवाल को आउट किया, जिसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ कहासुनी हुई। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और उनके सिर आपस में टकरा गए।
किस नियम के तहत हुई कार्रवाई?
आईसीसी ने दोनों खिलाड़ियों को लेवल 1 कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया। मामला आईसीसी कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.12 से जुड़ा है, जो किसी खिलाड़ी, टीम सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, मैच रेफरी या मैच में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से संबंधित है।
मैच अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लिया और दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ चार्ज लगाया। दोनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मैच रेफरी द्वारा प्रस्तावित सजा को मान लिया।
डिमेरिट पॉइंट का क्या मतलब है?
एक डिमेरिट पॉइंट मिलने से जायसवाल तुरंत किसी मैच से बाहर नहीं होंगे। अगले 24 महीनों के दौरान अगर किसी खिलाड़ी के डिमेरिट पॉइंट लगातार बढ़ते हैं तो मामला गंभीर हो सकता है।
आईसीसी के नियमों के अनुसार 24 महीने की अवधि में चार या उससे ज्यादा डिमेरिट पॉइंट होने पर इन्हें सस्पेंशन पॉइंट में बदला जा सकता है। दो सस्पेंशन पॉइंट होने पर खिलाड़ी को एक टेस्ट या दो वनडे/टी20 इंटरनेशनल मैचों के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। आईसीसी ने दोनों प्लेयर्स को दण्डित इसलिए किया है क्योंकि श्रीलंकाई खिलाड़ी ने उकसाया था, इसके बाद जायसवाल उनके पास जाकर टकरा गए थे।
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