ICC: नए अमेरिकी प्रतिबन्ध न्यायालय की स्वतंत्रता पर ‘खुला हमला’
ICC ने एक वक्तव्य में कहा, “ये प्रतिबन्ध एक निष्पक्ष न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता पर खुला हमला हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य देशों द्वारा दिए गए शासनादेश के तहत काम करती है.”
रोम संविधि के तहत 2002 में स्थापित ICC एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था है और संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा नहीं है. हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद किसी मामले को जाँच और कार्रवाई के लिए ICC के पास भेज सकती है.
रोम संविधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों की सहमति से ICC, जनसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराधों के लिए व्यक्तियों पर मुक़दमा चलाता है.
ICC के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, अमेरिका के ताज़ा प्रतिबन्धों और ICC के अन्य कर्मचारियों को भी लगातार निशाना बनाए जाने को लेकर गम्भीर रूप से चिन्तित हैं.
अमेरिका ने दबाव बढ़ाया
अमेरिका रोम संविधि का पक्षकार नहीं है और उसका कहना है कि ICC उसकी राष्ट्रीय सम्प्रभुता के लिए ख़तरा है. अमेरिका को आशंका है कि ICC को मान्यता देने वाले देशों में कथित अपराधों के लिए अमेरिकी नागरिकों पर भी मुक़दमा चलाया जा सकता है, भले ही अमेरिका स्वयं ICC को मान्यता न देता हो.
मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC की अध्यक्ष टोमोको अकाने और वरिष्ठ अभियोजक अब्दुलाए सेये पर नए प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा की. अमेरिका इससे पहले पूर्व मुख्य अभियोजक करीम ख़ान पर भी प्रतिबन्ध लगा चुका है, जिन्हें बाद में उनके पद से हटा दिया गया था.
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब्दुलाए सेये पश्चिमी तट में अवैध इसराइली बस्तियों के वित्तपोषण और बस्तीवासियों को कथित रूप से हथियार दिए जाने से जुड़ी जाँच में शामिल रहे हैं.
नवम्बर 2024 में अभियोजक करीम ख़ान के नेतृत्व में ICC ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और देश के पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट के विरुद्ध गिरफ़्तारी वॉरंट जारी किए थे. उन पर ग़ाज़ा युद्ध से जुड़े कथित युद्ध अपराधों के आरोप लगाए गए थे.
मार्को रुबियो ने एक वक्तव्य में कहा, “ट्रम्प प्रशासन का रुख़ स्पष्ट है: अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय एक भ्रष्ट और पूरी तरह राजनैतिक संस्था है, जिसने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है और अपने शासनादेश की सीमा से आगे बढ़कर काम किया है.”
ये नए प्रतिबन्ध राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के दोनों कार्यकालों में ICC के ख़िलाफ़ उठाए गए पिछले क़दमों को और आगे बढ़ाते हैं. 13 जुलाई को मार्को रुबियो ने भी कहा था कि अमेरिका, ICC से अपनी सम्प्रभुता को होने वाले ख़तरे को “समाप्त” करना चाहता है.
अब न्यायालय के 18 न्यायाधीशों में से नौ, दोनों उप-अभियोजक, पूर्व मुख्य अभियोजक और एक कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों के साथ वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकते और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भी उन्हें कड़े प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ रहा है.
अन्तरराष्ट्रीय न्याय का ‘अहम स्तम्भ’
स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र और अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय अलग-अलग संस्थाएँ हैं और उनके शासनादेश भी अलग हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र ICC को अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय का एक अहम स्तम्भ मानता है और महासचिव उसके काम का पूरा सम्मान करते हैं.”
मार्को रुबियो समेत अमेरिकी अधिकारियों ने प्रतिबन्धों का बचाव करते हुए कहा है कि न्यायालय की कुछ जाँचें और गिरफ़्तारी वॉरंट राजनैतिक रूप से प्रेरित हैं और उसकी शक्तियाँ देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं में दख़ल देती हैं.
ICC ने बुधवार को इसका विरोध करते हुए कहा कि “जब क़ानून लागू करने के लिए न्यायाधीशों को धमकाया जाता है, तो अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी व्यवस्था ही ख़तरे में पड़ जाती है.”
न्यायालय ने कहा कि धमकियों और दबाव के उपायों से पीड़ितों के लिए न्याय पाना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि अन्य सभी रास्ते बन्द होने पर ही वे ICC का रुख़ करते हैं.
ICC ने कहा कि वह अपने कर्मचारियों और “अकल्पनीय अत्याचारों” के पीड़ितों के साथ खड़ा है और स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से अपना काम जारी रखेगा.
न्यायालय ने सदस्य देशों, नागरिक समाज और अन्तरराष्ट्रीय अपराधों के पीड़ितों के लिए न्याय व क़ानून के शासन का समर्थन करने वाले सभी पक्षों की एकजुटता का स्वागत किया.
उसने कहा कि सदस्य देशों और साझीदारों के समर्थन से ICC अपने शासनादेश पर स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से काम जारी रखेगा.