आगरा में मेट्रो निर्माण के दौरान फुट ओवर ब्रिज (FOB) को हटाए बिना उसके ऊपर U-गर्डर रखने की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। गुरु का ताल के बाद अब न्यू आगरा स्थित अबुल उला दरगाह के पास हाईवे पर भी इसी तकनीक से U-गर्डर रखने की तैयारी है।
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इसके लिए भारी क्रेनों की मदद ली जाएगी। इस तकनीक से फुट ओवर ब्रिज को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी और राहगीरों को भी कम परेशानी होगी।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के अनुसार, आगरा मेट्रो के पहले कॉरिडोर पर निर्माणाधीन गुरु का ताल स्टेशन के पास NH-19 पर स्थित फुट ओवर ब्रिज के ऊपर सुरक्षित तरीके से U-गर्डर रखा जा चुका है। सिविल निर्माण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

दो हेवी क्रेनों की मदद से यू-गर्डर को FOB की हाईट से अधिक ऊंचाई तक ले जाया गया।
FOB को हटाए बिना ऐसे रखा जाता है U-गर्डर
इस तकनीक में रुनकता स्थित कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट तकनीक से U-गर्डर तैयार किए जाते हैं। इसके बाद ट्रक से इन्हें निर्माण स्थल तक लाया जाता है और भारी क्रेन की मदद से दो पिलर के बीच स्थापित किया जाता है।
इससे निर्माण कार्य में समय की बचत होती है और लागत भी कम होती है। साथ ही, पहले से मौजूद फुट ओवर ब्रिज को हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे लोगों को सड़क पार करने में सुविधा मिलती है और यातायात पर भी कम असर पड़ता है।

इसके बाद उसे दो पिलरों पर रखने की प्रक्रिया शुरू हुई।
बॉक्स गर्डर से अलग है U-गर्डर
U-गर्डर का आकार अंग्रेजी अक्षर 'U' जैसा होता है। पारंपरिक बॉक्स गर्डर की तुलना में इसकी बनावट अलग होती है। इसके दोनों किनारों पर मिलने वाली जगह का इस्तेमाल सिग्नलिंग उपकरण लगाने में किया जा सकता है।
आगरा मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशनों पर भी निर्माण की आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है। सामान्य तौर पर शटरिंग और लेंटर के जरिए स्टेशन बनाए जाते हैं, जबकि यहां डबल-टी गर्डर और पाई गर्डर की मदद से कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जा रहा है। इससे निर्माण कम समय में पूरा करने और नीचे चल रहे ट्रैफिक पर असर घटाने में मदद मिलती है।
गुरु का ताल और सिकंदरा स्टेशन सिंगल पिलर तकनीक से बन रहे
गुरु का ताल और सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का निर्माण सिंगल पिलर तकनीक से किया जा रहा है। इस हिस्से में सभी पियर तैयार हो चुके हैं और U-गर्डर की कास्टिंग का काम भी पूरा हो चुका है।
पारंपरिक तकनीक में एलिवेटेड स्टेशन बनाने के लिए तीन ग्रिड में पिलर बनाए जाते हैं। इसके बाद हॉरिजॉन्टल बीम लगाकर कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म का निर्माण होता है।
वहीं, सिंगल पिलर तकनीक में बीच के ग्रिड में ही पिलर बनाए जाते हैं। इन पर पहले कॉनकोर्स के लिए लंबी बीम यानी क्रॉस आर्म रखी जाती है। इसके बाद प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाता है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह तकनीक उपयोगी है। इससे कम जगह में निर्माण किया जा सकता है और ट्रैफिक कम प्रभावित होता है। भविष्य में सड़क चौड़ीकरण के दौरान भी इससे बाधा कम आने की संभावना रहती है।

बिना FOB को हटाए यूपीएमआरसी ने यू-गर्डर रख दिया।
ISBT-सिकंदरा कॉरिडोर में 240 U-गर्डर लगाए जा चुके
ISBT से सिकंदरा के बीच बन रहे कॉरिडोर में कुल 272 U-गर्डर लगाए जाने हैं। इनमें से 240 का इरेक्शन पूरा हो चुका है।
इसके अलावा, इस हिस्से में कुल 52 I-गर्डर में से 40 और 123 पियरकैप में से 117 का निर्माण पूरा कर लिया गया है।

आरबीएस कॉलेज मेट्रो स्टेशन तैयार हो चुका है।
आगरा में 29.4 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क बन रहा
आगरा में कुल 29.4 किलोमीटर लंबे दो मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इनमें कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। मेट्रो निर्माण में अपनाई जा रही इन तकनीकों का उद्देश्य निर्माण कार्य तेजी से पूरा करना, लागत कम करना और शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात को कम से कम प्रभावित करना है।
- पहला कॉरिडोर: ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा तक 14 किलोमीटर लंबा। इसमें 13 स्टेशन हैं, जिनमें 6 एलिवेटेड और 7 भूमिगत हैं। इसके 6 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी सेक्शन में मेट्रो का संचालन हो रहा है। आगे के 5 स्टेशन यात्री सेवाओं के विस्तार के लिए तैयार हैं।
- दूसरा कॉरिडोर: आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक करीब 16 किलोमीटर लंबा। इस पर 14 एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है।