संसद में फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट (FCRA) बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई है। विपक्ष ने इसे 'ड्रैकॉनियन' (कठोर) कानून बताते हुए विरोध किया है।
संसद में फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट (FCRA) बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई है। (Ai Image)
- Published: 06 Aug 2026, 10:49 AM IST
- Last Updated: 06 Aug 2026, 10:50 AM IST
FCRA Amendment Bill 2026: फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) एथेंडमेंट बिल, 2026 (FCRA Bill) के गुरुवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच इस मामले पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है। इसके अलावा, विपक्ष अपनी इस मांग पर भी अड़ा हुआ है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में नीट (NEET) प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर लोकसभा में जवाब दें।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, सरकार इस बिल को सदन में सभी तथ्य रखने और उचित चर्चा सुनिश्चित करने के बाद ही लाना चाहती है। सरकार का उद्देश्य हंगामे और विरोध-प्रदर्शन के बीच इसे पास कराने के बजाय व्यापक सहयोग के साथ इसे पारित कराना है।
किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की मुलाकात बेनतीजा
संसद के मानसून सत्र के सुचारू संचालन के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी से मुलाकात की। पिछले 10 दिनों के भीतर रिजिजू की गांधी के साथ यह दूसरी बैठक थी, जिसमें उन्होंने सदन की कार्यवाही में विपक्ष का सहयोग मांगा।
हालांकि, राहुल गांधी ने किरेन रिजिजू को इस पर कोई भी आश्वासन नहीं दिया। कांग्रेस नेताओं ने इस बिल को 'कठोर' (Draconian) करार दिया है और साफ कर दिया है कि वे मौजूदा स्वरूप में इस बिल को पारित नहीं होने देंगे। आपको बता दें कि संसद का यह मानसून सत्र आगामी 13 अगस्त तक चलने वाला है।
क्या है एफसीआरए बिल और विपक्ष के तर्क?
एफसीआरए (FCRA) अधिनियम यह तय करता है कि भारतीय नागरिक, गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, एसोसिएशन और कंपनियां भारत के बाहर से भेजे गए धन, प्रतिभूतियों या अन्य सामग्रियों को कैसे प्राप्त कर सकती हैं और उनका उपयोग कैसे कर सकती हैं। यह उन सीमित विदेशी-फंडेड गतिविधियों को प्रतिबंधित करता है जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार के अनुसार, इस संशोधन प्रस्ताव में "पंजीकरण समाप्त या रद्द होने पर विदेशी-फंडेड संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकारी की बात कही गई है। इसके अलावा, अधिसूचित एफसीआरए संशोधन नियम पंजीकरण को विशिष्ट उद्देश्यों और स्वीकृत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ता है, और धर्म परिवर्तन (प्रोसेलिटाइजेशन) को अनुमत धार्मिक गतिविधियों से बाहर रखता है।"
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यह प्रस्तावित संशोधन एनजीओ की कीमत पर सरकार की शक्तियों का विस्तार कर सकता है, जिससे सरकार को उनकी संपत्तियों को जब्त करने या उनका निपटान करने की शक्ति मिल जाएगी। उनका कहना है कि इस संशोधन से एनजीओ और अन्य ऐसे संगठन सरकार के सामने कमजोर हो सकते हैं, और इससे विदेशी चंदे पर निर्भर रहने वाले शैक्षणिक, धर्मार्थ और धार्मिक संस्थान भी असंतुलित रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, "यह मानसिकता कि आरएसएस सब कुछ कर सकता है जबकि अन्य एनजीओ नहीं कर सकते, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। हम इसका बहुत कड़ाई से विरोध करेंगे। हम उन्हें ऐसा कठोर (Draconian) बिल पास करने की अनुमति नहीं देंगे।"
सरकार का पक्ष और अन्य दलों का रुख
सरकार का रुख इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है कि यह बिल विदेशी दान के दुरुपयोग को रोकेगा और पारदर्शिता को मजबूत करेगा। दुनिया के अन्य देशों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा है कि दुनिया के प्रमुख लोकतंत्रों ने विदेशी फंडिंग, विदेशी लobbying और विदेशी प्रभाव गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले फ्रेमवर्क को मजबूत किया है।
सरकार का यह भी कहना है कि "इस बात को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है कि जब विदेशी पैसे को विनियमित नहीं किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक संस्थानों, चुनावी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित कर सकता है, और सरकारों ने इसके जवाब में कानून बनाए हैं।"
हालांकि एफसीआरए बिल के पास होने के लिए सरकार को केवल एक साधारण बहुमत की आवश्यकता है, फिर भी सरकार ने विपक्षी दलों तक पहुंच बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, द्रमुक (DMK), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) जैसे दलों ने भी सरकार से संपर्क किया है, लेकिन खबरों के मुताबिक उन्होंने सरकार को यह बता दिया है कि वे वर्तमान रूप में इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे।
अब यह देखना बाकी है कि इस बिल को पारित कराने के लिए सरकार की अगली रणनीति क्या होगी। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक जारी रहेगा।