Copyright © UttarPradesh.ORG सुलतानपुर विधायक विनोद सिंह पर यौन शोषण के आरोपों के बाद कैंप कार्यालय का प्रेस नोट, FCI गोदाम के लेनदेन पर उठे नए सवाल
सुलतानपुर। भाजपा के सुलतानपुर नगर विधायक विनोद सिंह और उनके कथित गनर धनंजय यादव पर एक महिला द्वारा लगाए गए यौन शोषण (Vinod Singh Harassment Allegations) और धमकी के गंभीर आरोपों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। मामले में विधायक के कैंप कार्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट में आरोप लगाने वाली महिला के पति शशांक पाण्डेय पर एफसीआई गोदाम आवंटित कराने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।
#सुल्तानपुर के भाजपा शहर विधायक विनोद सिंह और उनके गनर धनंजय यादव पर एक महिला द्वारा यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। आरोपों से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रही महिला की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। महिला… pic.twitter.com/AJVQcQprIP
— UttarPradesh.ORG News (@WeUttarPradesh) August 4, 2026
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में महिला ने विधायक विनोद सिंह और धनंजय यादव पर यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म के प्रयास और धमकाने जैसे आरोप लगाए हैं। महिला ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया और सत्ता के दबाव में उसके परिवार के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि महिला की पहचान और उसके दावों की अभी स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस या किसी सक्षम जांच एजेंसी की ओर से भी मामले के तथ्यों पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
विधायक के कैंप कार्यालय से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया है कि वीडियो में आरोप लगाने वाली महिला के पति शशांक पाण्डेय के खिलाफ लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। प्रेस नोट के अनुसार, यह मुकदमा विधायक विनोद सिंह की तहरीर पर 10 जुलाई को दर्ज हुआ।
प्रेस नोट में आरोप लगाया गया कि शशांक पाण्डेय ने एफसीआई का गोदाम आवंटित कराने के नाम पर धन लिया था, लेकिन न तो गोदाम का आवंटन कराया गया और न ही कथित रूप से ली गई रकम वापस की गई। इसी विवाद को वायरल वीडियो और महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि बताया जा रहा है।
हालांकि संबंधित एफआईआर की प्रमाणित प्रति, मुकदमा संख्या, धाराएं और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए प्रेस नोट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
एफसीआई गोदाम के लिए पैसे देने के दावे ने खड़े किए सवाल
कैंप कार्यालय के प्रेस नोट में एफसीआई गोदाम का आवंटन कराने के लिए शशांक पाण्डेय को पैसे दिए जाने के उल्लेख ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे एक विधायक ने किसी व्यक्ति को सरकारी संस्था से गोदाम आवंटित कराने के लिए किस प्रक्रिया और उद्देश्य से धन दिया था।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि कथित रकम किसी वैध व्यावसायिक अनुबंध, निवेश, किराये या अन्य अधिकृत प्रक्रिया के तहत दी गई थी अथवा गोदाम आवंटन कराने के व्यक्तिगत आश्वासन पर। इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
राजनीतिक विरोधियों को अब भाजपा के भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों पर हमला करने का अवसर मिल गया है। हालांकि केवल प्रेस नोट में पैसे देने का उल्लेख होना अपने आप में किसी अपराध या भ्रष्टाचार को प्रमाणित नहीं करता। इसके लिए भुगतान के उद्देश्य, माध्यम, समझौते और सरकारी प्रक्रिया में किसी संभावित हस्तक्षेप की जांच आवश्यक होगी।
महिला ने पुलिस और महिला आयोग को लेकर भी किए दावे
वायरल वीडियो में महिला ने दावा किया कि उसने हजरतगंज पुलिस और महिला आयोग से शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। महिला के अनुसार, महिला आयोग में शिकायत करने के बाद उसके पति और परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
महिला ने कथित रूप से अपनी और बेटी की सुरक्षा को लेकर भी आशंका जताई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में उससे जुड़े कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन इन दावों से संबंधित शिकायत पत्र, पुलिस की प्राप्ति रसीद या महिला आयोग की कार्रवाई का कोई प्रमाणित दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों ने भी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि न होने की बात कही है।
विधायक का व्यक्तिगत आधिकारिक बयान अब भी प्रतीक्षित
मामले में कैंप कार्यालय से प्रेस नोट जारी किया गया है, लेकिन विधायक विनोद सिंह की ओर से कैमरे पर या उनके सत्यापित सार्वजनिक मंच से विस्तृत व्यक्तिगत बयान सामने नहीं आया है। विधायक समर्थक सोशल मीडिया पर जल्द पूरे मामले का पर्दाफाश होने और आरोपों के पीछे कथित साजिश सामने आने की बातें लिख रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष और सोशल मीडिया के कई उपयोगकर्ता महिला के आरोपों की निष्पक्ष जांच, सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा संबंधित लोगों से पूछताछ की मांग कर रहे हैं। इस पूरे मामले में महिला का बयान, कैंप कार्यालय का पक्ष और कथित धोखाधड़ी का मुकदमा—तीनों अलग-अलग जांच के विषय हैं।
दशकों से सुलतानपुर की सक्रिय राजनीति से जुड़े विधायक विनोद सिंह पर इस तरह के गंभीर आरोप पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। वायरल वीडियो और उसके बाद जारी प्रेस नोट ने जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब निगाहें पुलिस के आधिकारिक बयान, कथित एफआईआर के विवरण और विधायक की विस्तृत प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हैं और न ही कैंप कार्यालय द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी के आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध हुए हैं। मामले की वास्तविकता निष्पक्ष जांच और प्रमाणित दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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