Fact Check: बिहार में ‘स्कूल चोरी’ का मामला निकला फेक, वनइंडिया से SDO ने बताया- क्या है पूरा मामला?

Published on 11 सित॰ 2026

Time Updated: Friday, September 11, 2026, 12:58 [IST]

Katihar Stolen School News: बिहार के कटिहार के प्राणपुर में स्कूल भवन के नाम पर 44 लाख 85 हजार रुपये के गबन का दावा सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। ग्रामीण ढोल-नगाड़े लेकर अधिकारियों के पास पहुंचे और आरोप लगाया कि स्कूल भवन के लिए आई बड़ी रकम का गबन हो गया, लेकिन स्कूल आज भी नहीं बना। मामला सामने आने के बाद वनइंडिया ने इस पूरे दावे की पड़ताल की और प्राणपुर के सदर एसडीओ सूरज कुमार से सीधे बात कर मामले की सच्चाई जानी।

जांच में सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में 44.85 लाख रुपये का आवंटन या भुगतान हुआ ही नहीं था। बल्कि शिकायत में लगाए गए दस्तावेजों पर ही सवाल खड़े हो गए।

Bihar Katihar Stolen School

44.85 लाख के गबन का दावा कितना सही?

ग्रामीणों की शिकायत में दावा किया गया था कि नया प्राथमिक विद्यालय दीघापार के भवन निर्माण के लिए 44 लाख 85 हजार रुपये की सरकारी राशि आई थी और उसका गबन कर लिया गया। इसी आरोप को लेकर ग्रामीण प्रशासन के पास पहुंचे थे। लेकिन वनइंडिया की पड़ताल में यह दावा सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। जांच टीम ने शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और शिकायत में लगाए गए दस्तावेजों का मिलान किया। इसमें सामने आया कि भवन निर्माण के लिए 44.85 लाख रुपये का आवंटन ही नहीं हुआ था।

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वनइंडिया ने SDO से जानी मामले की सच्चाई

मामले की सच्चाई जानने के लिए वनइंडिया ने प्राणपुर के सदर एसडीओ सूरज कुमार से बात की। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच में सरकारी रिकॉर्ड खंगाले गए और शिकायत के साथ लगाए गए कागजात की भी पड़ताल हुई। अधिकारियों की जांच में 44 लाख 85 हजार रुपये के आवंटन या भुगतान का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं मिला। यानी जिस रकम के गबन का आरोप लगाया गया था, वह सरकारी खाते से निकली ही नहीं थी।

जांच में सामने आया AI से तैयार दस्तावेजों का खेल

जांच के दौरान मामला सिर्फ गलत दावे तक सीमित नहीं रहा। शिकायत के साथ लगाए गए कुछ दस्तावेजों की पड़ताल में उनके फर्जी होने की बात सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक ये कागजात AI की मदद से तैयार किए गए थे और देखने में सरकारी दस्तावेजों जैसे लग रहे थे। इन्हीं कागजातों के आधार पर स्कूल भवन के लिए राशि आवंटित होने और भुगतान का दावा किया गया था। यानी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सिस्टम को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि बड़ी रकम पहले ही जारी हो चुकी है।

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स्कूल की बिल्डिंग नहीं है, लेकिन गबन की रकम भी नहीं

इस पूरे मामले में एक बात ऐसी है जो ग्रामीणों के दावे को कुछ हद तक समझने लायक बनाती है। नया प्राथमिक विद्यालय दीघापार के पास आज भी अपना पक्का भवन नहीं है। स्कूल फिलहाल झोपड़ीनुमा किराए के मकान में संचालित हो रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण लंबे समय से स्कूल के लिए पक्की बिल्डिंग की मांग कर रहे हैं। लेकिन स्कूल भवन का नहीं बनना और 44.85 लाख रुपये के सरकारी गबन का आरोप, दोनों अलग-अलग बातें हैं। जांच में गबन की रकम का दावा गलत मिला।

अब सवाल- AI से फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए?

प्रशासन की जांच से यह साफ हो गया कि 44 लाख 85 हजार रुपये के गबन का दावा सरकारी रिकॉर्ड में सही नहीं पाया गया। लेकिन इसके साथ ही एक नया सवाल खड़ा हो गया है कि अगर सरकारी रिकॉर्ड में रकम जारी ही नहीं हुई, तो शिकायत के साथ ये दस्तावेज आए कहां से? अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेज AI की मदद से तैयार किए गए थे। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि इन फर्जी दस्तावेजों को किसने तैयार किया और किस मकसद से शिकायत में इस्तेमाल किया।