Voter List Name Missing: देश के कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वोटर लिस्ट में नाम न मिले या उसमें कोई गलती निकले, तो क्या करें. चुनाव आयोग ने इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों रास्ते खोल रखे हैं. आइए आपको इन सभी सवालों के जवाब व नाम चेक करने या जुड़वाने की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाती है.
सबसे पहले यह कैसे पता करें कि नाम लिस्ट में है या नहीं?
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर आप अपना नाम खोज सकते हैं. इसके लिए नाम, ईपीआईसी यानी वोटर आईडी नंबर या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा वोटर हेल्पलाइन ऐप और ईसीआईनेट ऐप के जरिए भी यह जांच हो जाती है. इन ऐप में 'वोटर रजिस्ट्रेशन' वाले हिस्से में राज्य चुनकर आप अपना नाम देख सकते हैं.
— Election Commission of India (@ECISVEEP) October 14, 2026
Form 6 क्या है और किसके काम आता है?
जानकारी के मुताबिक अगर आप पहली बार वोटर बन रहे हैं, यानी आपकी उम्र 18 साल पूरी हो चुकी है या सूची से आपका नाम छूट गया है तो आपको फॉर्म 6 भरना होगा. यह उन लोगों के लिए भी जरूरी है जो एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में रहने चले गए हैं और नए क्षेत्र की सूची में नाम जुड़वाना चाहते हैं. यहां बता दें कि प्रवासी भारतीय मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म 6ए होता है.
Form 8 कब भरना पड़ता है?
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक अगर आपका नाम सूची में है लेकिन उसमें कोई गड़बड़ी है तो फॉर्म 8 काम आता है. फॉर्म 8 से नाम की स्पेलिंग, उम्र, लिंग, फोटो या पते में हुई गलती को ठीक कराया जाता है. इसके अलावा एक ही विधानसभा क्षेत्र के अंदर घर बदलने पर भी आमतौर पर फॉर्म 8 ही भरा जाता है. वहीं, वोटर आईडी खो जाने या खराब होने पर नया कार्ड बनवाने के लिए भी फॉर्म 8 भरा जाता है.
फिर Form 7 क्या होता है?
फॉर्म 7 नाम जोड़ने या सुधारने के लिए नहीं, बल्कि किसी नाम पर आपत्ति जताने या सूची से नाम हटवाने के लिए है. जैसे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो या वह स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुका हो. इसे सोच-समझकर भरें, क्योंकि गलत जानकारी देना कानूनन अपराध माना जाता है.
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ऑनलाइन फॉर्म 6 कैसे भरें, पूरा तरीका क्या है?
सबसे पहले voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाएं या ईसीआईनेट अथवा वोटर हेल्पलाइन ऐप खोलें. 'वोटर रजिस्ट्रेशन' में जाकर फॉर्म 6 चुनें. फिर अपना राज्य, जिला और विधानसभा क्षेत्र भरें. इसके अलावा नाम, उम्र, पता और परिवार से जुड़ी जानकारी डालें. इसके बाद फोटो, दस्तावेज अपलोड करें और फिर सबमिट कर दें. सबमिट करने पर एक रेफरेंस आईडी मिलती है जिसे संभालकर रखें, क्योंकि उसी से आवेदन की स्थिति ट्रैक होगी.
ऑफलाइन आवेदन का क्या विकल्प है?
जिनके पास इंटरनेट नहीं है या जो ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत महसूस करते हैं, वे फॉर्म भरकर अपने बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ को दे सकते हैं. इसे निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी या मतदान केंद्र पर भी जमा किया जा सकता है. कुछ राज्यों में बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म और दस्तावेज इकट्ठा करने की व्यवस्था भी कर रहे हैं.
फॉर्म के साथ कौन-से दस्तावेज चाहिए होते हैं?
उम्र के प्रमाण के तौर पर जन्म प्रमाणपत्र, दसवीं की मार्कशीट, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या आधार जैसे दस्तावेज इस्तेमाल हो सकते हैं. निवास के प्रमाण में बैंक पासबुक, राशन कार्ड, किराएदारी का एग्रीमेंट, बिजली-पानी-गैस का बिल या डाक से आई चिट्ठी मान्य मानी जाती है. लेकिन सूची राज्य या समय के हिसाब से थोड़ी बदल सकती है, इसलिए फॉर्म के साथ दी गई आधिकारिक सूची जरूर देख लें.
— Election Commission of India (@ECISVEEP) October 14, 2026
क्या अब भी SIR का अतिरिक्त घोषणा-पत्र भरना पड़ता है?
यह राज्य पर निर्भर करता है. चुनाव आयोग ने जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है वहां फॉर्म 6 के साथ लगने वाला अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है. ऐसे राज्यों में अब सिर्फ सामान्य फॉर्म 6 भरना होता है.
फॉर्म भरने के बाद भी नाम न जुड़े या आवेदन खारिज हो जाए, तो क्या करें?
सबसे पहले रेफरेंस आईडी से अपने आवेदन की स्थिति जांचें और संबंधित बीएलओ या निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी से कारण पूछें. अगर दावे या आपत्ति पर फैसला आपके खिलाफ आता है तो नियमों में अपील का रास्ता है. रिपोर्टों के मुताबिक पहली अपील जिला मजिस्ट्रेट या जिलाधिकारी स्तर पर की जा सकती है जबकि दूसरी अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में होती है.
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