Explainer: समुद्र के पास मुंबई की हवा क्यों हुई खराब? जानें प्रदूषण बढ़ने की 5 बड़ी वजहें

Published on 24 अक्टू॰ 2026

मुंबई में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है. देश की आर्थिक राजधानी की हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 152 दर्ज किया गया. इस दौरान मुंबई प्रदूषण के मामले में दिल्ली से भी आगे निकल गया. रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में यह दूसरी बार है जब मुंबई में ऐसी स्थिति देखने को मिली है. प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. इनमें हवा की धीमी रफ्तार, मौसम में बदलाव, कचरा जलाना, खेतों में पराली जलाना और त्योहारों के दौरान पटाखों का इस्तेमाल शामिल हैं. इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदूषण पर जताई चिंता

मुंबई की बिगड़ती हवा को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अधिकारियों से सवाल किए हैं. अदालत ने प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने स्थिति को आपातकालीन बताते हुए सवाल किया कि मुंबई की हवा दिल्ली से भी ज्यादा खराब कैसे हो सकती है. अधिकारियों को 26 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए किए गए उपायों का विवरण पेश करना है. अब इस मामले में प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर नजर रहेगी.

#WATCH | Mumbai, Maharashtra: A layer of smog engulfs the city. Visuals are from Bandra Kurla Complex (BKC). pic.twitter.com/oaxaH2UUr8

— ANI (@ANI) October 24, 2026

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हवा की रफ्तार कम होने से बढ़ रहा प्रदूषण

विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंबई की भौगोलिक स्थिति आमतौर पर प्रदूषित हवा को फैलने में मदद करती है. समुद्र के किनारे होने के कारण यहां चलने वाली हवाएं प्रदूषकों को दूर ले जाने में सहायक होती हैं. लेकिन जब हवा की रफ्तार कम हो जाती है, तो प्रदूषण फैलने के बजाय एक ही जगह जमा होने लगता है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक हवा में बने रहते हैं. इससे लोगों के सांस लेने वाली हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है.

गर्म और उमस भरे मौसम का भी असर

मुंबई में इस समय असामान्य रूप से गर्मी और उमस महसूस की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मानसून के दौरान बारिश भी कम हुई. मौसम में आए इस बदलाव को भी प्रदूषण बढ़ने की संभावित वजहों में शामिल किया जा रहा है. इस साल जनवरी और फरवरी में मुंबई का AQI करीब 400 तक पहुंचने की बात भी सामने आई थी. इससे पता चलता है कि शहर में वायु गुणवत्ता की समस्या पहले भी गंभीर रूप ले चुकी है. विशेषज्ञों ने अल नीनो और सर्दियों के दौरान तापमान में संभावित बदलावों का भी जिक्र किया है. हालांकि, प्रदूषण पर मौसम का असर हवा की दिशा, तापमान और वायुमंडल की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है.

पराली और कचरा जलाने से भी बिगड़ रही हवा

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में कचरा जलाना भी प्रदूषण की बड़ी वजह माना जा रहा है. ठाणे जिले के भिवंडी और रायगढ़ जिले के अलीबाग जैसे क्षेत्रों में कचरा जलाने की घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क किनारे कचरा जलने वाली जगहों के पास PM2.5 का स्तर 1,000 से ऊपर पहुंच गया था. वहीं, अलीबाग के कुछ इलाकों में इसका स्तर 300 से 400 के बीच दर्ज किया गया. PM2.5 हवा में मौजूद बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. कई ग्रामीण इलाकों में हवा की गुणवत्ता मापने वाले आधिकारिक केंद्रों की कमी के कारण प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी मुश्किल हो जाता है.

#WATCH | Delhi: The Air Quality Index (AQI) in the area around AIIMS is 179, categorised as 'moderate', as per the CPCB (Central Pollution Control Board). pic.twitter.com/ulWbLtbaKH

— ANI (@ANI) October 24, 2026

दूसरे राज्यों से आने वाले प्रदूषकों की आशंका

विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंबई में प्रदूषण का स्तर केवल स्थानीय गतिविधियों से ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले प्रदूषक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं. अक्टूबर और नवंबर के दौरान हवा की दिशा के आधार पर मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे क्षेत्रों से प्रदूषक मुंबई तक पहुंच सकते हैं. हालांकि, इसका प्रभाव हवा की दिशा, गति और प्रदूषकों के वातावरण में बने रहने की अवधि पर निर्भर करता है. ऐसे में मुंबई की हवा को साफ रखने के लिए स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण के साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी ध्यान देना जरूरी है.

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाने होंगे कदम

मुंबई में बढ़ते प्रदूषण ने आम लोगों की सेहत और शहर के पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है. वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों की धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी माना जा रहा है. अब बॉम्बे हाईकोर्ट की 26 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई अहम होगी. इस दौरान अधिकारियों को बताना होगा कि शहर की हवा को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और प्रदूषण कम करने की दिशा में आगे क्या योजना है.

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