Why Makers Betting on Reality shows? आज के समय में एंटरटेनमेंट की दुनिया में रियलिटी शोज का दायरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है. अब टीवी और ओटीटी पर सिर्फ फिक्शन स्टोरी नहीं दिखाई जातीं, बल्कि डांस, सिंगिंग, बिजनेस, कुकिंग, एडवेंचर, माइंड गेम और रिलेशनशिप से जुड़े रियलिटी शोज ऑडियंस खूब देख रही है. जियो हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, सोनी व कलर्स जैसे प्लेटफॉर्म और चैनल इस फॉर्मेट पर बड़ा दांव लगा रहे हैं. इसकी वजह पॉपुलैरिटी के साथ प्रोडक्शन, ऑडियंस और कमाई का पूरा सिस्टम है.
रियलिटी शोज का दायरा लगातार बढ़ रहा
आज रियलिटी शो का मतलब सिर्फ डांस या सिंगिंग शोज नहीं है. करण चौहर का द ट्रेटर्स धोखे, चालाकी और साइकोलॉजिकल गेम पर बेस्ड हैं. बिग बॉस टीवी और ओटीटी दोनों पर खूब देखा जाता है. बिग बॉस ओटीटी पर करीब 5 महीने तक कंटेंट देता है. वहीं, शार्क टैंक इंडिया ने आम ऑडियंस के बीच इक्विटी, वैल्यूएशन और बिजनेस पिच शब्दों को आम किया. लाफ्टर शेफ में कुकिंग के साथ-साथ कॉमेडी को भी दिखाया जा रहा है. जहां ऑडियंस स्टार्स की नोकझोंक को देखना पसंद करते हैं. इसके अलावा खतरों के खिलाड़ी एडवेंचर और स्प्लिट्सविला रिलेशनशिप ड्रामा के लिए जाने जाते हैं. इनकी चर्चा लगातार सोशल मीडिया पर होती रहती है.
मेकर्स को इन शोज से क्या फायदा मिल रहा
मेकर्स की रियलिटी शो पर दांव लगाने की बड़ी वजह इसका मॉडल है. दरअसल, किसी फिक्शन सीरीज या फिल्म में स्क्रिप्ट, एक्टर्स की डेट्स, लोकेशन, शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन पर काफी समय लगता है. वहीं, दूसरी तरफ रियलिटी शो का सेट पहले से तैयार रहता है. बिग बॉस का घर हो या शार्क टैंक का सेट, शूटिंग पूरे शो के दौरान एक जगह की जाती है. करीब 30 से 40 दिनों की शूटिंग में तीन से चार महीने का कंटेंट तैयार किया जा सकता है. जिससे काफी समय बचता है.
स्टोरी लिखने की नहीं पड़ती जरूरत
फिक्शन शो में स्टोरी आगे बढ़ाने के लिए राइटर्स को नए-नए एंगल डालने पड़ते है, जिससे कहानी में ट्विस्ट और टर्न आएं. वहीं, अगर इसके बावजूद भी स्टोरी पसंद नहीं आती, तो टीआरपी पर असर पड़ सकता है. रियलिटी शो में मेकर्स कंटेस्टेंट्स को अलग-अलग सिचुएशन, टास्क और कॉम्पिटिशन देते हैं. जिससे कंटेस्टेस्टेंस खुद ही कंटेंट देते हैं. इसलिए फिक्शन शोज की तरह इसमें स्टोरी लिखने की जरूरत कम हो जाती है. बहस, टास्क का रिजल्ट, दोस्ती, नाराजगी या इमोशनल मोमेंट शोज का असल कंटेंट होता है.
स्टार्स की फीस का भी गेम
फिक्शन प्रोजेक्ट में बड़े बॉलीवुड या ओटीटी स्टार्स की फीस पर बड़ा बजट लगता है. रियलिटी शोज में मेकर्स सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और पॉपुलर लोगों को मौका देते हैं. इन चेहरों की फीस बड़े स्टार्स की तुलना में काफी कम होती है. साथ ही उन्हें शो से मिलने वाली पॉपुलैरिटी और फेम भी मिलता है. मेकर्स को अपने शोज के लिए ऐसे चेहरे मिल जाते हैं जिनकी अपनी ऑडियंस पहले से होती है. इससे कंटेंट और प्रमोशन, दोनों का फायदा मिलता है. जिससे मेकर्स को प्रमोशन के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती है.
ऑडियंस क्यों पसंद करती है रियलिटी शो
रियलिटी शोज की सबसे बड़ी है, कम प्रोडक्शन टाइम या कम बजट नहीं है. इसकी असली ताकत ऑडियंस का जुड़ाव है. लोगों को दूसरी की लाइफ में क्या चल रहा है और उनकी असली पर्सनैलिटी कैसी ये जानने की बहुत दिलचस्पी होती है. जब वे किसी सेलिब्रिटी को हंसते, रोते, लड़ते या अपनी बात रखते देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे उसके असली बिहेवियर को देख रहे हैं. बिग बॉस जैसे शोज में यही सब देखने को मिलता है. जिससे ऑडियंस काफी मजबूती से जुड़ी रहती है. लोग जानना चाहते हैं कि कैमरे के सामने दिखने वाला चेहरा असली कैसे रिएक्ट करता है.
अगले पल क्या होगा, कोई नहीं जानता
फिक्शन स्टोरी में ऑडियंस अक्सर अंदाजा लगा लेती है कि आगे क्या हो सकता है. लेकिन रियलिटी शो में ऐसा नहीं होता है. द ट्रेटर्स में कौन किसे धोखा देगा, यह पता नहीं चलता. शार्क टैंक इंडिया में किस स्टार्टअप को फंडिंग मिलेगी, इसे लेकर भी एक्साइटमेंट बनी रहती है. यही चीज ऑडियंस की दिलचस्पी बनाए रखती है. उन्हें अगले एपिसोड का इंतजार रहता है.
ऑडियंस बन जाती है शो का हिस्सा
रियलिटी शोज का एक बड़ा फायदा यह भी है कि ऑडियंस को सिर्फ शो ही नहीं देखती है बल्कि उन्हें वोटिंग के जरिए अपने फेवरेट कंटेस्टेंट से भी जुड़ने का मौका मिलता है. कोई ऑडियंस अपने पसंदीदा सिंगर, डांसर या बिग बॉस कंटेस्टेंट को बचाने के लिए ऐप पर वोट कर सकती है. इससे ऑडियंस को लगता है कि उसकी रोल है और उसकी पसंद का असर रिजल्ट पर पड़ सकता है.
रियलिटी शोज की कहां से होती है सबसे बड़ी कमाई
रियलिटी शोज का बिजनेस मॉडल कई हिस्सों में बंटा होता है. मेकर्स को स्पॉन्सरशिप और एसोसिएट पार्टनरशिप से काफी मोटी रकम मिलती है. बड़े ब्रांड ऐसे शोज से जुड़ते हैं क्योंकि इनकी पहुंच बहुत बड़ी ऑडियंस तक होती है. इससे ब्रांड को स्पॉन्सर बनाने से उसका प्रोडक्ट बड़ी लोगों में पहुंच सकता है. इसके अलावा शो प्रोडक्ट प्लेसमेंट से भी बड़ी कमाई करते हैं. मान लो किसी कंपनी का फ्रिज दिखाना, टास्क पर ब्रांड का स्मार्टफोन देना या कुकिंग शो में मसाले को कैमरे के सामने दिखाना इसी का हिस्सा है. इससे ब्रांड सीधे शो के कंटेंट में नजर आता है, इसलिए ऑडियंस इसे नॉर्मल एड की तरह आसानी से स्किप नहीं कर सकती.
ओटीटी और ऐप से भी मिलता है फायदा
आज कई रियलिटी शोज टीवी के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी आ रहे हैं. कुछ शोज को देखने के लिए प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है, जिससे मेकर्स को फायदा होता है. इससे प्लेटफॉर्म को नए पेड यूजर्स भी मिलते हैं. वोटिंग भी इस सिस्टम का हिस्सा है. वोटिंग के लिए ऐप डाउनलोड करने से उसकी यूजर संख्या बढ़ती है और प्लेटफॉर्म का यूजर बेस मजबूत होता है.
सोशल मीडिया से मिलती है फ्री पब्लिसिटी
रियलिटी शो को लेकर होने वाली चर्चा सिर्फ टीवी या ओटीटी तक नहीं रुकती. इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, एक्स और मीम्स के जरिए शो के छोटे-छोटे क्लिप लोग शेयर करते हैं. किसी लड़ाई, इमोशनल मोमेंट या मजेदार डायलॉग का वीडियो वायरल होने पर शो को अलग से पब्लिटी मिलती है. जो ऑडियंस एपिसोड नहीं देख पाती, वह इन क्लिप्स से को देखने से अपडेट रहती है. इससे शोज को फ्री में पब्लिसिटी मिलती है.
इन्फ्लुएंसर्स ने बदल दिया पूरा गेम
यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की एंट्री ने रियलिटी शोज का ऑडियंस बेस बहुत स्ट्रॉन्ग किया है. पहले ऐसे शोज में टीवी और बॉलीवुड के चेहरे ज्यादा नजर आते थे. अब मिलियंस की फैन फॉलोइंग वाले इन्फ्लुएंसर्स शो का हिस्सा बनते हैं. इसका फायदा यह है कि इन्फ्लुएंसर के साथ शो को भी रीच मिलती है. उसके फैंस कंटेंट देखते हैं, क्लिप शेयर करते हैं और सोशल मीडिया पर उनके बार में चर्चा करते हैं. ऐसे में इन्फ्लुएंसर्स ने रियलिटी शोज का पूरा गेम बदल दिया.
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