झारखंड में शिक्षा की नींव कमजोर, 60% स्कूलों के पास जमीन नहीं: सरयू राय

Published on 4 अक्टू॰ 2026

Jamshedpur News: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रविवार को डीबीएमएस हाई स्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षक का उत्थान’ कार्यक्रम में झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर, 41 प्रतिशत में पुस्तकालय, 60 प्रतिशत में अपनी जमीन, 33 प्रतिशत में बाउंड्री और 75 प्रतिशत में स्मार्ट बोर्ड नहीं हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी के बावजूद उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, ऐसे में जब शिक्षा की नींव ही कमजोर होगी तो नई शिक्षा नीति क्या करेगी.

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सरयू राय ने कहा कि झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरस्वती वाहिनी के लिए मिलने वाला अनुदान भी समय पर नहीं आता. कई विद्यालयों में शौचालय तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. अनेक स्कूलों में बेंच-डेस्क की कमी है. शिक्षकों की भी घोर कमी है. इसके बावजूद जो शिक्षक हैं, उन्हें पढ़ाने के बजाय दूसरे कार्यों में लगाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर जिलाधिकारी कार्यालय या शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के कार्यालयों में काम कराया जा रहा है. “शिक्षक अध्यापन छोड़कर हर काम कर रहे हैं. जब हमारी नींव ही कमजोर होगी तो नई शिक्षा नीति क्या करेगी. जरूरी है कि हम पहले नींव को मजबूत करें.”

सरयू राय ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्राथमिक स्तर को मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है. कंप्यूटर, पुस्तकालय, शौचालय, बेंच-डेस्क, बाउंड्री और स्मार्ट बोर्ड जैसी सुविधाएं स्कूलों में उपलब्ध नहीं होंगी तो शिक्षा के स्तर में अपेक्षित सुधार कैसे होगा.

उन्होंने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को पढ़ाना है. यदि शिक्षकों को दूसरे सरकारी कामों में लगा दिया जाएगा तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा.

कार्यक्रम में मौजूद कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने कहा कि देश का विकास शिक्षा से ही संभव है. वर्तमान दौर में ज्ञान के साथ कौशल, नवाचार और सामाजिक बदलाव को समझना जरूरी है. उन्होंने शिक्षकों से एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों को समझकर खुद को बदलते समय के अनुरूप तैयार करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य के बीच प्रत्यक्ष संवाद जरूरी है. ऑनलाइन शिक्षा से वह परिणाम नहीं मिल सकता, जो शिक्षक के सामने बैठकर पढ़ने से हासिल होता है.

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने भी माना कि हाल के वर्षों में गुरु-शिष्य इंट्रैक्शन में कमी आई है और इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है. उन्होंने स्कूलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई.

एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ एडवांस लेबोरेटरी प्रोग्राम चलाने की जरूरत है. शिक्षा को रोजगार से जोड़ना होगा, तभी पढ़ाई सार्थक होगी.

सोनादेवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि समाज में मेधावी लोगों और शिक्षकों का सम्मान नहीं होगा तो प्रतिभाएं राह भटक सकती हैं. उन्होंने शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाने की जरूरत बताई और शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों के तबादले पर भी सवाल उठाया.

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं की कमी और समय पर वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समय पर वेतन देना जरूरी है क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं.

युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की कमियों को समझने का प्रयास लगातार जारी रहेगा. शिक्षक सम्मान समारोह अब केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के सभी 24 जिलों में आयोजित किया जाएगा. शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था की कमियों को जानकर उन्हें सरकार के समक्ष रखा जाएगा.

कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. पहले सत्र में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. दूसरे सत्र में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा छात्र-युवा असंतोष पर विचार-विमर्श हुआ. तीसरे और अंतिम सत्र की अध्यक्षता सरयू राय ने की. इस दौरान रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी मुख्य अतिथि रहे.

समापन सत्र में सरयू राय ने शिक्षा नियमावली नहीं बनने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि नियमावली के अभाव में आवश्यकता आधारित शिक्षकों के सिर पर नौकरी जाने का भय बना रहता है. उन्होंने सरकार से शिक्षा नियमावली बनाने की मांग की.

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य एक अदद नौकरी हासिल करना रह गया है. उन्होंने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि केवल 8.1 प्रतिशत ग्रेजुएट ही अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी हासिल कर सके हैं. उन्होंने कहा कि डिग्री के साथ विद्यार्थियों में कौशल विकसित करना जरूरी है.

कार्यक्रम शुरू होने से पहले सरयू राय ने जीतिया पर्व के दौरान स्वर्णरेखा नदी में डूबी दो युवतियों में से एक को बचाने वाले जामू शेख को सम्मानित किया. सरयू राय ने बताया कि जामू शेख हवा वाली मिठाई बेचते हैं और हादसे के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूदकर एक युवती को बचाने में सफल रहे.

इस दौरान हादसे के बाद लोगों से फोन पर मदद की गुहार लगाने वाले शुभम को भी सम्मानित किया गया. दोनों के सम्मान के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

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