Nepal Flash Flood: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में जो सैलाब आया उसने पुरी दुनिया का ध्यान अपनी तरीख खींचा है. सोशल मीडिया पर लोग अब ये सवाल कर रहे हैं कि आखिर जब उस इलाके में उस वक्त तेज बारिश नहीं हो रही थी तो फिर नदी में इतना पानी अचानक आया कहां से आया?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय जैसी ऊंची पहाड़ी इलाकों में बर्फ की विशाल चट्टानें लगातार पिघल रही होती हैं. यह पिघला हुआ पानी अक्सर ग्लेशियर के पास ही एक प्राकृतिक झील का रूप ले लेता है. अब जब यह झील किसी वजह से अचानक फट जाती है तो उसमें जमा पूरा पानी एक ही झटके में नीचे की तरफ बह आता है. इसी घटना को वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है.
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ये झीलें बाढ़ कैसे बनती हैं?
जानकारी के अनुसार जब ग्लेशियर पिघलता है तो उसका पानी अक्सर पत्थरों, मिट्टी और मलबे की एक प्राकृतिक दीवार के पीछे जमा हो जाता है. इस दीवार को मोरेन कहा जाता है. यह मोरेन किसी बांध की तरह काम करता है और पानी को रोके रखता है. अब जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पीछे खिसक रहे हैं तो नई-नई झीलें बन रही हैं और पुरानी झीलें भी आकार में बढ़ती जा रही हैं.
यह मोरेन दीवार अचानक टूटती क्यों है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक मोरेन की यह दीवार बहुत मजबूत नहीं होती है. दरअसल, यह सिर्फ एक ढीली मिट्टी और पत्थरों से बनी होती है. जो आसानी से ढह सकती है. भूस्खलन झील में गिरता है जिससे पानी का स्तर और दबाव अचानक इतना बढ़ जाता है और मोरेन दीवार टूट जाती है.
भोटे कोशी नदी के मामले में क्या आशंका जताई जा रही है?
रसुवा में आई इस बाढ़ में अभी तक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों का मानना है कि तिब्बत क्षेत्र में हुई तेज बारिश और ग्लेशियर झील के फटने से इस आपदा आने की आशंका है. बता दें 2025 में भी भोटे कोशी नदी में बाढ़ आई थी, जो ग्लेशियर झील के फटने से आई बताई गई थी.
तिब्बत में ग्लेशियर के फटने से नेपाल में आई भयानक तबाही, देखिए ये रिपोर्ट #NepalFlood#FlashFlood#NewsNationpic.twitter.com/l8MUMNlbtQ
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क्या ये बाढ़ केवल नेपाल की समस्या है?
नेपाल में आई बाढ़ से यूपी, बिहार को भी खतरा है. इससे पूरे हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र को खतरा है. फिलहाल अगले कुछ घंटे भारत, नेपाल, भूटान, चीन और पाकिस्तान जैसे देश अलर्ट पर हैं. जानकारी के मुताबिक इस विशाल पर्वत श्रृंखला में हजारों की संख्या में ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं और जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक बढ़ते तापमान के साथ इनकी संख्या और आकार दोनों लगातार बढ़ रहे हैं.
यह बाढ़ सामान्य बाढ़ से कितनी खतरनाक होती है?
ग्लेशियर झील से निकलने वाला पानी सामान्य बारिश की बाढ़ से कहीं ज्यादा विनाशकारी माना जाता है. इसकी वजह यह है कि यह पानी बेहद ऊंचाई से और भारी रफ्तार के साथ नीचे आता है और अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा भी बहा ले जाता है. इससे बचाव के लिए प्रशासन द्वारा हिमालयी जगहों पर खतरनाक झीलों की पहचान कर उन पर निगरानी बढ़ाने का काम चल रहा है.
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बर्फ और चट्टानों के विशाल हिमस्खलन
अब तक की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के पीछे बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन है. हिमस्खलन ने ल्हेंडे नदी के रास्ते को अस्थायी रूप से रोक दिया था जिससे ऊपर पानी जमा हुआ और फिर अचानक अवरोध टूटने पर नीचे की ओर विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई. हालांकि वैज्ञानिक अभी इस तबाही की तह तक जाने में लगे हैं और मौके पर सरकार का बचाव कार्य जारी है.
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ग्लेशियर झीलें बेहद खतरनाक क्यों?
एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्लेशियर झीलें इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं क्योंकि ग्लेशियरों के पिघलने से ऊंचे पहाड़ों पर पानी जमा होकर झील बन जाती है और कई बार उसे रोकने वाला प्राकृतिक बांध बर्फ, मलबे या कमजोर चट्टानों का होता है. भूकंप, हिमस्खलन, भूस्खलन या अत्यधिक पानी के दबाव से यह प्राकृतिक बांध टूट सकता है और कुछ ही मिनटों में भारी मात्रा में पानी, बर्फ और मलबा नीचे की घाटियों में पहुंचकर जानलेवा बाढ़ ला सकता है.
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