EPF Nomination: ईपीएफ खाते में नॉमिनी नहीं होने पर सदस्य की मौत के बाद पीएफ की रकम खत्म नहीं होती, लेकिन परिवार को क्लेम करने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में पात्र परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस जरूरी दस्तावेजों के साथ रकम का दावा कर सकते हैं।
पीएफ खाते में नॉमिनी नहीं होने से क्या परेशानी हो सकती है।
- Published: 22 Jul 2026, 06:16 PM IST
- Last Updated: 22 Jul 2026, 06:16 PM IST
EPF Nomination: नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि रिटायरमेंट के लिए बड़ी बचत होती। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता हर महीने वेतन का एक हिस्सा जमा करते हैं।
समय के साथ यह रकम एक बड़ा फंड बन जाती, जिसका इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद किया जा सकता, लेकिन अगर ईपीएफ खाताधारक की मौत हो जाए और उसने खाते में नॉमिनी नहीं जोड़ा हो, तो परिवार को पैसा मिलने की प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल और लंबी हो सकती।
ईपीएफ खाते में नॉमिनी क्यों जरूरी?
सबसे जरूरी बात यह है कि नॉमिनी दर्ज नहीं होने पर ईपीएफ की जमा रकम खत्म नहीं होती और न ही वह सरकार के पास चली जाती। ऐसे मामले में पात्र परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस जरूरी दस्तावेज जमा करके ईपीएफ की रकम और अन्य लाभों पर दावा कर सकते।
अगर कोई नॉमिनी का नाम नहीं है, तो ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक पात्र परिवार के सदस्यों को ईपीएफ लाभ में बराबर हिस्सा मिल सकता है।अगर कोई पात्र परिवार सदस्य या कानूनी वारिस नहीं है, तो कानूनी रूप से हकदार व्यक्ति को रकम जारी की जाती। हालांकि, नॉमिनी नहीं होने पर क्लेम सेटलमेंट में ज्यादा समय लग सकता है।
जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर सामान्य तौर पर क्लेम करीब सात दिन में प्रोसेस हो सकता है, लेकिन नॉमिनी की गैरमौजूदगी में अतिरिक्त दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया के कारण देरी हो सकती है।
3 साल तक क्लेम नहीं किया तो खाता हो सकता निष्क्रिय
ईपीएफओ के मुताबिक, अगर पीएफ खाते में तीन साल तक कोई दावा नहीं किया जाता है, तो वह निष्क्रिय खाते की श्रेणी में जा सकता। इसलिए परिवार और कानूनी वारिसों को खाताधारक की मृत्यु के बाद क्लेम करने में गैरजरूरी देरी नहीं करनी चाहिए।
पुरुष और महिला सदस्य के लिए परिवार की परिभाषा अलग
ईपीएफओ के नियमों में पात्र परिवार की परिभाषा पुरुष और महिला सदस्य के लिए अलग हो सकती है।
पुरुष सदस्य: पत्नी, बच्चे (विवाहित या अविवाहित), माता-पिता, बेटे की विधवा और उसके बच्चे पात्र परिवार में शामिल हो सकते हैं।
महिला सदस्य: पति, पति के माता-पिता, बच्चे (विवाहित या अविवाहित), माता-पिता, बेटे की विधवा और उसके बच्चे पात्र परिवार में शामिल हो सकते हैं।
ई नॉमिनेशन से आसान होगा क्लेम
ईपीएफओ अपने सदस्यों को ई-नॉमिनेशन की सुविधा देता है। इसके जरिए सदस्य ऑनलाइन अपने लाभार्थी का नाम दर्ज कर सकते हैं। नॉमिनी दर्ज होने से परिवार के लिए ईपीएफ, ईपीएस यानी कर्मचारी पेंशन योजना और बीमा से जुड़े लाभों का दावा करना आसान हो सकता है और कई मामलों में EPFO कार्यालय जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
ई-नॉमिनेशन के लिए सदस्य का आधार से लिंक UAN, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और ईपीएफओ पोर्टल पर अपडेटेड फोटो ओर पता होना जरूरी है। नॉमिनी की आधार डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी और फोटो भी देनी होती है।
इसलिए ईपीएफ सदस्यों को समय रहते अपना ई-नॉमिनेशन पूरा कर लेना चाहिए और परिवार के सदस्यों की जानकारी भी अपडेट रखनी चाहिए। इससे किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को रिटायरमेंट की बचत और संबंधित लाभ हासिल करने में कम परेशानी होगी।
(प्रियंका कुमारी)